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सियासी दलों पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी कार्रवाई, प्रत्‍याशियों की क्रिमिनल रिकॉर्ड अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पर डालने का आदेश

अगर राजनीतिक पार्टियां क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले शख्स को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारती हैं, तो उन्‍हें बतानी होगी इसकी वजह, दागियों की योग्यता के बारे में 72 घंटे के अंदर चुनाव आयोग को देनी होगी पूरी जानकारी

सियासी दलों पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी कार्रवाई, प्रत्‍याशियों की क्रिमिनल रिकॉर्ड अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पर डालने का आदेश

नई दिल्ली. राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्‍त फैसला दिया है. कोर्ट ने सभी सियासी दलों से दागी उम्मीदवारों को चुनाव का टिकट देने की वजह बताने का आदेश दिया है. जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन और एस. रविंद्र भट की पीठ ने कहा कि अगर राजनीतिक दल अपने प्रत्‍याशियों का क्रिमिनल रिकॉर्ड अपने-अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट और ट्विटर हैंडल पर नहीं डालते हैं तो उन पर अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है.

चुनाव आयोग राजनीतिक दलों के खिलाफ कार्रवाई करे

बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय समेत कई याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों पर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को टिकट नहीं देने का दबाव डाला जाए. दागी नेताओं को टिकट देने पर चुनाव आयोग राजनीतिक दलों के खिलाफ कार्रवाई करे. याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सवाल किया कि पार्टियां किस मजबूरी में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशी को टिकट देती हैं. सुनवाई के दौरान और फैसले में कोर्ट की ओर से कही गई बड़ी बातें...

फैसले में कही गई बड़ी बातें

अगर राजनीतिक पार्टियां क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले शख्स को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारती हैं, तो उन्‍हें इसकी वजह भी बतानी होगी. राजनीतिक दलों को बताना होगा कि आखिर वह क्यों किसी बेदाग प्रत्याशी को चुनाव का टिकट नहीं दे पाईं. दागियों की योग्यता के बारे में 72 घंटे के अंदर चुनाव आयोग को पूरी जानकारी देना जरूरी होगा.

पार्टी अगर किसी दागी को टिकट देती है, तो उसकी योग्यता, उपलब्धियों और मेरिट की जानकारी बतानी होगी. अगर पार्टी इन दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करती है तो उसके खिलाफ चुनाव आयोग कानून के तहत कार्रवाई करेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने राजनीति के अपराधीकरण को खत्म करने के लिए चुनाव आयोग को एक हफ्ते में फ्रेमवर्क तैयार करने का निर्देश दिया था.

लंबित आपराधिक मामले वाले प्रत्‍याशियों के बारे में पार्टियां कोर्ट की व्यवस्था का पालन नहीं करतीं तो चुनाव आयोग इसे शीर्ष अदालत के संज्ञान में लाए.

सुप्रीम कोर्ट ने राजनीति के अपराधीकरण को खत्म करने के लिए चुनाव आयोग को एक हफ्ते में फ्रेमवर्क तैयार करने का निर्देश दिया गया था.

सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि बीते चार आम चुनाव से राजनीति में अपराधीकरण तेजी से बढ़ा है. देश में राजनीति के अपराधीकरण को रोकने के लिए कुछ तो करना ही होगा. सिर्फ प्रत्‍याशियों की ओर से आपराधिक रिकॉर्ड देने से समस्या हल नहीं हो सकती.

सितंबर, 2018 में 5 जजों की संविधान पीठ ने केंद्र से कहा था कि वह गंभीर अपराध में शामिल लोगों के चुनाव लड़ने और पार्टी पदाधिकारी बनने पर रोक लगाने के लिए कानून बनाए.

जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा-8 दोषी नेताओं को चुनाव लड़ने से रोकती है, लेकिन ऐसे नेता जिन पर सिर्फ मुकदमा चल रहा है, वे चुनाव लड़ने के लिए स्वतंत्र हैं.

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