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बीमारी का लक्षण है दूसरे की लाइफ में ज्यादा दिलचस्पी लेना, होती है इलाज की जरूरत

बीमारी का लक्षण है दूसरे की लाइफ में ज्यादा दिलचस्पी लेना, होती है इलाज की जरूरत

नई दिल्ली . सोशल मीडिया के अधिक यूज के कारण सायकाइट्रिस्ट्स के पास आनेवाले ऐसे पेशंट्स की संख्या काफी बढ़ गई है, जिन्हें कोई ना कोई सोशल मीडिया के अधिक इस्तेमाल के कारण हुई है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कई बार तो कुछ लोग सिर्फ इसलिए एंग्जाइटी के गंभीर स्तर पर पहुंच जाते हैं क्योंकि सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट को लोगों ने लाइक नहीं किया है...

सोशल मीडिया के कारण होने वाली परेशानियां

आमतौर पर सोशल मीडिया के कारण आंखों और मन से जुड़ी परेशानियां घेरती हैं। मानसिक परेशानियों की बात करें तो चिंता, तनाव, अकेलापन, असुरक्षा की भावना और आत्मविश्वास की कमी लोगों में बहुत अधिक देखने को मिलती है। कई बार बात इतनी गंभीर हो जाती है कि लोग अपनी काबिलियत पर शक भी करने लगते हैं।

दूसरे की लाइफ में दिलचस्पी

सोशल मीडिया के कारण एक और मानसिक समस्या जो तेजी से लोगों को अपना शिकार बना रही है वह एक कंपल्सिव डिजायर है। इसे 'फियर ऑफ मिसिंग आउट' के नाम से भी जाना जाता है। इस मानसिक दिक्कत में पेशंट को हर समय पीछे छूटने का डर सताता रहता है। इस कारण वह कोशिश करता है कि ज्यादा से ज्यादा समय सोशल मीडिया पर ऐक्टिव रहे ताकि उसे पता हो कि दूसरे लोग अपनी वॉल्स पर क्या पोस्ट कर रहे हैं। यह एक शुरुआत होती है, जो धीरे-धीरे आदत में बदलने लगती है। ऐसे में व्यक्ति दूसरे की पर्सनल लाइफ के बारे में अधिक से अधिक जानने के लिए बेचैन होने लगता है।

खुद को कम समझने की दिक्कत

'Fear of Missing Out' में व्यक्ति लगातार अपनी तुलना दूसरों से करता रहता है। उसे लगने लगता है कि उसके अपने पास जो चीजें हैं, वे दूसरों को हासिल सुविधाओं और खूबियों के सामने कुछ भी नहीं हैं। ऐसे में अगर उनके सोशल ग्रुप में कोई कुछ बड़ा अचीव कर तो इनका तनाव कई गुना बढ़ जाता है। इस स्थिति में ये खुद को इतना लो फील करते हैं कि इन्हें अपने अंदर कोई खूबी और हुनर नजर नहीं आता है। इन्हें लगने लगता है कि इनका जीवन एकदम व्यर्थ है।

परेशानियों का बोझ

फियर ऑफ मिसिंग आउट की मानसिक स्थिति से गुजर रहे लोग हर छोटी समस्या को बहुत बड़ा करके आंकने लगते हैं। सोशल मीडिया के अडिक्शन के कारण इनकी अपनी पर्सनल लाइफ और रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ता है। ये हर छोटी-बड़ी बात पर अक्सर खीजते हुए रिप्लाई करने लगते हैं। इस कारण इनके रिश्तों में दूरियां आने लगती हैं या इनकी इमेज झगड़ालू व्यक्ति की बनने लगती है। इससे ये और अधिक परेशान रहने लगते हैं।

इंपॉर्टेंस खोने का डर

इस कंपल्सिव डिजायर के कारण इससे प्रभावित लोगों में अपनी अहमियत खोने का डर भी हावी होने लगता है। इन्हें लगने लगता है कि इनकी तुलना में तेजी से आगे निकल रहे लोग इन्हें अपनी लाइफ से बाहर ना कर दें। इस कारण ये हर समय उस मानसिक दबाव महसूस करते हैं, जिसका वास्तव में कोई अस्तित्व ही नहीं होता है। क्योंकि दुनिया अपनी ही रफ्तार से चल रही है। अगर कोई यह सोचने लगे कि दुनिया तेजी से आगे भाग रही है और हम पीछे छूट गए हैं तो सोचने से ऐसा सच नहीं हो जाता। बस इसी अंतर को फियर ऑफ मिसिंग यानी फोमो से परेशान लोग समझ नहीं पाते।

क्या है इलाज?

अगर मेडिकल टर्म्स की बात करें तो फियर ऑफ मिसिंग आउट मेंटल डिजीज नहीं बल्कि मेंटल डिसऑर्डर है। इसे काउंसलिंग और बिहेवियरल थेरपी से दूर किया जा सकता है। बाकी यह हर पेशंट की अपनी-अपनी कंडीशन पर निर्भर करता है। इस समस्या से निजात पाने के लिए सायकाइट्रिस्ट की सलाह लेनी चाहिए। इन्हें जरूरी लगेगा तो ये आपको कंसल्टेंट खुद ही सजेस्ट कर देंगे।

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