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छत्तीसगढ़
चांदनी क्षेत्र में चीते की धमक, ग्रामीणों में दहशत
By Swadesh | Publish Date: 12/6/2019 1:39:55 PM
चांदनी क्षेत्र में चीते की धमक, ग्रामीणों में दहशत

सूरजपुर। जंगली चीते की उपस्थिति से दूरस्थ अंचल चांदनी बिहारपुर क्षेत्र के 10 से अध‍िक गांवों के ग्रामीण खौफजदा है। बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम महुली के रोहिना पहाड़ की तराई पर बसे मोहल्ले के निवासी शिवकुमार सारथी ने सोमवार की शाम को अपने घर की बाड़ी में बकरी को रस्सी से बांधकर रखा था। इसी दौरान रात करीब 10 बजे जंगली चीता यहां पहुंचा और रस्सी तोड़कर बकरी को जंगल की ओर ले गया और वहां उसका शिकार कर खा गया । मंगलवार की सुबह जब घर की बाड़ी में जब उसे बकरी बंधी हुई नहीं मिली तो, वह गांव के अन्य लोगों को साथ लेकर जंगल की ओर बकरी की तलाश में निकला। वहां उन्हें बकरी की क्षत-विक्षत शव मिली। 

 
इसके बाद जंगल से वापस लौटे ग्रामीणों ने बाड़ी में जाकर देखा तो जमीन पर बने पंजे के निशान से जंगली चीते की आमद रफ्त कि बात पूरे क्षेत्र में फैल गई। दूसरी ओर गांव में जंगली चीता के आने की सूचना और बकरी को मारकर अपना शिकार बना लेने की घटना के संबंध में जानकारी लगी तो समूचा गांव दहशत में आ गया है। ग्रामीणों के द्वारा एहतियात सुरक्षा के उपाय वन विभाग से करने की मांग की है। मृत मवेशी के मुआवजा हेतु तहसीलदार को भी सूचित किया गया है।
 
उल्‍लेखनीय है क‍ि इस क्षेत्र में सूरजपुर वनमंडल के अंतर्गत आने वाले बिहारपुर वनपरिक्षेत्र के अलावा गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण क्षेत्र से लगा हुआ है। यहां अक्सर जंगली जानवर विचरण के लिए आते रहते हैं। खूंखार एवं संरक्षित प्रजाति के वन्य प्राणियों के आवागमन से अक्सर ग्रामीण जन दहशत में रहते हैं। यह जंगली जानवर अब तक ग्रामीणों की मवेशियों को अपना शिकार बनाते रहे है।  इसके अलावा चांदनी बिहारपुर क्षेत्र के अधिकांश गांव जंगलों और पहाड़ों से घिरे हुए हैं। 
 
इन गांवों में गज आतंक के अलावा जंगली भालू, लकड़बग्घा, चीता, जंगली सूअर, सियार और अन्य जंगली जानवरों के अचानक आगमन से दहशत बना रहता है। स्थानीय लोग तो अब अंधेरा होने के बाद घर से बाहर निकलने में भी डरते हैं। ग्रामीणों की मवेशियां अक्सर इन जंगली जानवरों के शिकार बनते रहे हैं। लेकिन वन विभाग द्वारा जंगली जानवरों से हुई क्षति का मूल्यांकन नहीं करनें के आरोप ग्रामीण लगाते रहते हैं।
 
वहीं इस मामले पर बिहारपुर वनपरिक्षेत्र अधिकारी रामशरण राम सें चर्चा करनें पर बताया कि अधिकांश रहवासी आबादी के करीब चार पंचायत के लोग वन अधिकार पट्टा हासिल करनें के लिए आबादी वाले क्षेत्र को छोड़ जंगल के आसपास घर बनाकर रह रहे हैं।इन्हें कई दफा समझाईश भी दिया गया है ,लेकिन यह मानते नहीं है। जबकी गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण क्षेत्र रिजर्व वनक्षेत्र अंतर्गत आता है और यहां वन्य प्राणियों के सुरक्षित विचरण हेतु आरक्षित क्षेत्र हैं ,जहां आमजन स्थाई रहवास क्षेत्र बनाकर नहीं रह सकते।
 
कई दफा इन्हें यहां से वापस आबादी क्षेत्र भेजने के लिए कार्यवाही भी संबंधित उद्यान के अधिकारी कर चुके हैं।कार्यवाही के समय कुछ दिन वापस आकर रहने के बाद फिर से वापस जंगल के निकट चले जाते है।रिजर्व वन्य क्षेत्र में कई मामलों में नियमों के अनुसार क्षतिपूर्ति देने का प्रवधान नहीं होने के कारण इन्हें नहीं मिलपाता हैं। 
 
बिहारपुर रेंज अंतर्गत आने वाले क्षेत्र के  पंचायतों में ऐसे मामलों पर क्षतिपूर्ति दिया जा चुका है और जंगली चीते कि आमद कि सूचना पर स्थल पर वनकर्मी जाकर जांच में जुटे हुए हैं।
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