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यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड के चैयरमैन को सुरक्षा मुहैया कराने का सुप्रीम कोर्ट ने दिया निर्देश
By Swadesh | Publish Date: 14/10/2019 6:09:43 PM
यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड के चैयरमैन को सुरक्षा मुहैया कराने का सुप्रीम कोर्ट ने दिया निर्देश

- अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को पूरी हुई 38वें दिन की सुनवाई  
 
नई दिल्ली। अयोध्या मामले पर सोमवार को 38वें दिन की सुनवाई पूरी हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड के चैयरमैन ज़फर फारूकी को सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया है। फ़ारूक़ी ने मध्यस्थता पैनल के सदस्य श्रीराम पंचू को अपनी जान के खतरे की जानकारी दी थी। इसके बाद श्रीराम पंचू ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को पत्र लिखकर फ़ारूक़ी को खतरे के अंदेशे की जानकारी दी थी। फारुखी ने ही दोबारा मध्यस्थता की मांग की थी। मुस्लिम पक्षकारों ने इसे उनकी व्यक्तिगत मांग बताकर खारिज किया था।
 
आज दिन भर मुस्लिम पक्ष की ओर से वकील राजीव धवन ने अपनी दलीलें पेश की। सुनवाई शुरू होते ही राजीव धवन ने कोर्ट से आज के बाद डेढ़ धंटे का और वक्त अपनी जिरह पूरी करने के लिए मांगा। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि आज ही अपनी बात पूरी करने की कोशिश कीजिए। धवन ने कहा कि आज जिरह पूरी करना संभव नहीं हो पायेगा। राजीव धवन ने सुब्रमण्यम स्वामी के वकीलों के साथ आगे की सीट पर बैठने पर भी आपत्ति जाहिर की। धवन ने कहा कि 'विजिटर' को यहां बैठने आने की इजाज़त नहीं है और स्वामी को कोई छूट नहीं दी जा सकती है। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि हम इस पर विचार करेंगे। इस पर स्वामी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
 
केस में सुनवाई के दौरान राजीव धवन ने कहा कि बाबर के काम की समीक्षा अब अदालत में नहीं की जा सकती। सुप्रीम कोर्ट दोबारा इतिहास नहीं लिख सकता। बाबर के काम की समीक्षा होगी तो सम्राट अशोक के काम की भी समीक्षा होगी।
 
धवन ने कहा कि परंपरा और आस्था कोई दिमाग का खेल नहीं है, इन्हें अपने मुताबिक नहीं ढाला जा सकता है, धवन ने कहा कि 1885 और 1886 में जब उनके दावे को मंजूरी नहीं मिली तो अब उनका दावा नहीं बनता। धवन ने कहा कि विवादित ज़मीन पर लगातार मुस्लिमों का कब्जा रहा है । 1989 से पहले हिन्दू पक्ष ने कभी ज़मीन पर मालिकाना दावा पेश नहीं किया। 1986 में राम चबूतरे पर मंदिर बनाने की मंहत धर्मदास की मांग को फैज़ाबाद कोर्ट खारिज कर चुका है।
 
धवन ने कहा कि अवैध कब्जा होने कि स्थिति में वास्तविक मालिक को अधिकार मिलता है और निर्मोही अखाड़ा 1934 से अपना कब्जा स्पष्ट करता है और ऐसे में सुन्नी वक्फ बोर्ड का मालिकाना हक छीना नहीं जा सकता। राजीव धवन ने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट में मंदिर के ध्वस्त करने मस्जिद बनाने की बात नहीं कही गई है। धवन ने कहा कि हिन्दू पक्ष की तरफ की तरह से जिन फैसलों के हवाला दिया गया है उसमें तथ्य सही नहीं थे। तब जस्टिस डीवाई चन्द्रचूड़ ने राजीव धवन से हिंदूओं के बाहरी अहाते पर कब्ज़े के बारे में पूछा कि 1858 के बाद के दस्तावेजों से पता चलता है कि राम चबुतरा की स्थापना की गई थी, क्या उनके पास अधिकार था। 
 
जस्टिस एसए बोब्डे और जस्टिस डीवाई चन्द्रचूड़ ने कहा कि क्या मुसलमानों का एकमात्र अधिकार होने का दावा हल्का नहीं होगा अगर हिंदुओं को बाहरी आंगन में प्रवेश करने का अधिकार था। जस्टिस चन्द्रचूड़ ने कहा कि कई दस्तावेज है जो दिखाते हैं कि वह बाहरी आंगन में रहते थे। इस पर राजीव धवन ने कहा कि सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सारे सवाल मुस्लिम पक्ष से हो रहे है, हिन्दू पक्ष से कोई सवाल नहीं पूछा गया। रामलला के वकील सीएस वैद्यनाथन ने इस पर एतराज जाहिर करते कहा कि ये ग़लत औऱ बेबुनियाद है। तब धवन ने कहा कि मैं कोई बेबुनियाद बात नहीं कह रहा हूं। मेरी ज़िम्मेदारी बनती है कि मैं बेंच के सारे सवालों के जवाब दूं, पर सारे सवाल मुस्लिम पक्ष से ही क्यों हो रहे हैं।
 
धवन ने कहा कि आस्था, स्कंद पुराण, विदेशी यात्रियों, के आधार पर उनको मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता है। मुस्लिम का मालिकाना हक के ऊपर कभी कोई सवाल नही रहा। उनको पूजा का अधिकार मिला अब यह मालिकाना हक़ की बात कर रहे हैं।
 
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