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लोकसभा चुनाव: मोदी के 56 इंची सीना का एहसास कराने में जुटा विद्यार्थी परिषद
By Swadesh | Publish Date: 20/3/2019 4:05:12 PM
लोकसभा चुनाव: मोदी के 56 इंची सीना का एहसास कराने में जुटा विद्यार्थी परिषद

लखनऊ। विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन का दर्जा हासिल किए हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद भी चाहता है कि भारत का दोबारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही बनें। इस लक्ष्य को हासिल करने में अभाविप ने एड़ी-चोटी एक कर दी है। नरेन्द्र मोदी व भाजपा के सुर में सुर मिलाकर परिषद अपने काम में जुट गयी है। बता दें कि अभाविप पिछली लोकसभा-2014 में भाजपा की जीत में विद्यार्थी परिषद की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 

 
स्वयं को गैरराजनीतिक संगठन होने का दावा करने वाली विद्यार्थी परिषद का भाजपा के प्रति यह लगाव किसी से छुपा नहीं है। चुनाव आते ही परिषद राष्ट्रवाद के मुद्दे पर भाजपा के प्रचार-प्रसार में जुट जाती है। परिषद, समवैचारिक संगठनों व भाजपा की संयुक्त बैठकें ताबड़तोड़ होने लगती हैं। इन बैठकों में चुनावी रणनीति की व्यापक खांचा खींचे जाते हैं। अब लोकसभा-2019 चुनाव का बिगुल फूंका जा चुका है। ऐसे में एकबार फिर अभाविप भाजपा को दिल्ली की सत्ता दिलाने में सक्रिय हो गयी है। परिषद में ऊपर के पदाधिकारी अपने स्थानीय कार्यकर्ताओं से संपर्क साधने में जुट गये हैं। परिषद जमीनी हलचल को भी थाह रही है। इसको लेकर पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में प्रवास पर प्रवास कर रहे हैं।
 
प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में भेजें जाऐंगे परिषद कार्यकर्ता 
सूत्रों की जानकारी के मुताबिक, लोकसभा चुनाव में पूरे उत्तर प्रदेश में एक हजार से अधिक कार्यकर्ताओं की फौज उतारी है। प्रत्येक लोकसभा में कम से कम एक व अधिकतम तीन कार्यकर्ता भाजपा के लिए तैनात करेगी। भाजपा के लिए लगने वाले ये कार्यकर्ता आम नहीं होंगे। यह अच्छी तरह से प्रशिक्षित होंगे। इनको भाजपा की रीति नीति सीखाकर क्षेत्र में भेजा जाएगा। ये कार्यकर्ता भाजपा के कोर कार्यकर्ता की तरह काम करेंगे। ये कार्यकर्ता प्रत्याशी के साथ भी तैनात होंगे। साथ ही भाजपा इनको अपने कामों के अनुरूप उपयोग करेगी। किन कार्यकर्ताओं को भाजपा के प्रचार में भेजा जाए, कई बैठकों के बाद उन लोगों की सहमति पर इसकी सूची लगभग तैयार हो गयी है। उन कार्यकर्ताओं को सूचित कर दिया गया है कि उन्हें कभी भी कहीं भी भाजपा के लिए काम करने के लिए तैयार रहना है।
 
भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने के लिए तैनात होने वाले ये परिषद के कार्यकर्ता मोदी सरकार योजनाओं का प्रचार प्रसार करेंगे। सर्जिकल व एयर स्ट्राइक का भी जिक्र करके मोदी के 56 इंच सीने का एहसास कराएंगे। वहीं, मतदाताओं के भीतर चल रही उठा-पटक को भी टटोलेंगे और अपने ऊपर के पदाधिकारियों से अवगत कराएंगे। 
 
नोटा के खिलाफ भी सक्रिय है अभाविप
विद्यार्थी परिषद नोटा का पुरजोर विरोध कर रही है। इनका मानना है कि नोटा लोकतंत्र के खिलाफ है। नोटा का प्रयोग न करने के लिए परिषद सोशल मीडिया से लेकर धरातल पर जोर-शोर से प्रचार कर रही है। सोशल मीडिया पर लंबे-लंबे पोस्ट लिखकर समझाने की कोशिश की जा रही है कि किस प्रकार नोटा बेहतरीन विकल्प को खत्म कर रहा है। वहीं, कॉलेज, कैंपसों से लेकर गली-चौराहों पर नुक्कड़ नाटक करके नोटा के खिलाफ माहौल तैयार किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नोटा से भाजपा को ही हानि है। इसलिए भाजपा के काम में जुटी परिषद को नोटा के खिलाफ आन्दोलन खड़ा करना मजबुरी है। 
 
नोटा चिन्तन छोटा
विद्यार्थी परिषद के अखिल भारतीय प्रकाशन व प्रशिक्षण प्रमुख मनोजकांत की मानें तो नोटा एक छोटा चिंतन है। इससे देश का भला नहीं हो सकता। नोटा के खिलाफ माहौल बनाने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा है। उन्होंने इसके तर्क दिए हैं और नोटा समर्थकों से कुछ प्रश्न भी किए हैं। 
 
नोटा अतिवादी व निरर्थक विकल्प 
मनोजकांत ने लिखा है कि पिछले कुछ दिनों से देखता हूं, जब-जब चुनाव निकट आता है, मतदाताओं का एक बहुत ''छोटा समूह नोटा-नोटा'' जपने लगता है। इनका कहना है कि कोई भी प्रत्याशी योग्य नहीं है। प्रश्न यह है कि क्या आप जिसे पूर्ण योग्य प्रत्याशी मानेंगे, वह सबको ठीक लगेगा, इसकी गारण्टी है क्या? उन्होंने कहा कि नोटा अतिवादी व निरर्थक विकल्प है। 
 
 
किस व्यवस्था में सर्वशुद्ध प्रत्याशी उपलब्ध होता है?
नोटा समर्थकों से उन्होंने प्रश्न पूछा है कि विश्व की ऐसी कोई व्यवस्था बताइए जिसमें सर्वशुद्ध प्रत्याशी उपलब्ध होता हो? जब आप सबको नकार देते हैं, तब जीता हुआ प्रत्याशी आपका प्रतिनिधि नहीं होता, फलत: आप उससे किसी प्रकार की अपेक्षा रखने के अधिकार से स्वयं को वंचित कर लेते हैं। ऐसे में विजयी जन-प्रतिनिधि द्वारा आपकी बात के अनसुना किये जाने पर आप कुण्ठित तो नहीं हो जायेंगे?
 
सर्वश्रेष्ठ को भी नकारने की व्यवस्था है नोटा
उन्होंने आगे लिखा है कि नोटा उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ को भी नकारने की व्यवस्था है। अत: नोटा दबाने से बेकार लोग चुनकर आ जायेंगे, तब आप अपराध-बोध के कारण तनावग्रस्त होकर परिवार को भी तनावग्रस्त-अशांत तो नहीं बना देंगे? उन्होंने आह्वान किया है कि जागरूक बनें। देशहित में सर्वश्रेष्ठ का चुनाव करें। मतदान अवश्य करें। जवाबदेह बनें। 
 
'मैं हूं चौकीदार' कैंपेन को समर्थन कर रहें हैं परिषद के लोग
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीते 15 मार्च को देश में मैं हूं चौकीदार मुहिम को छेड़ दिया। देखते ही देखते लाखों-करोड़ों लोग इस मुहिम के समर्थन में खड़े हो गये। इसी बीच परिषद के कार्यकर्ता भी सोशल मीडिया पर 'मैं हूं चौकीदार' कैंपेन का हिस्सा बन गये हैं। परिषद के कार्यकर्ता इस पर सफाई दे रहे हैं कि देश का हर सच्चा नागरिक चौकीदार ही तो है। जो देश-समाज में सकरात्मक बदलाव लाने की कोशिश में जुटा है, वह देश का चौकीदार ही है। 

इन मुद्दों के कारण भाजपा के पक्ष में उतर जाती है परिषद
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अपने आपको राष्ट्रवाद का पोषक बताती है। इनकी मानें तो ये राष्ट्र अराधना में रत रहते हैं। और जो राजनीतिक दल राष्ट्रवाद के मुद्दे पर मुखर होगा, उसके समर्थन में रहने का दावा हमेशा करते हैं। विद्यार्थी परिष को लगता है कि धारा 370, राम मंदिर, भारत-पाकिस्तान मुद्दा आदि को भाजपा की सरकारें हीं खत्म कर सकती हैं, इसलिए भी भाजपा के पक्ष में खड़े होते हैं। 
 
क्षेत्रीय संगठन मंत्री रमेश गड़िया ने कहा कि हम राष्ट्रवाद के मुद्दे पर हम हमेशा मुखर रहेंगे। गांव और शहर के गलियों तथा चौराहों पर मोदी के सकारात्मक प्रभाव को लेकर चर्चा है। हालांकि उन्होंने कहा कि हम किसी राजनीतिक दल के सहयोगी नहीं हैं।
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