मध्य प्रदेश
स्वास्थ्य विभाग ने निपाह वायरस से बचाव के लिए जारी की एडवाइजरी
By Swadesh | Publish Date: 20/6/2019 1:20:15 PM
स्वास्थ्य विभाग ने निपाह वायरस से बचाव के लिए जारी की एडवाइजरी

भोपाल। निपाह वायरस से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जनसामान्य के लिए एडवाइजरी जारी की है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एन.यू. खान ने बताया कि निपाह वायरस एक घातक वायरल बीमारी है, जो कि चमगादड़ द्वारा फैलती है। इस वायरस का स्त्रोत चमगादड़ के रक्त में पाया गया है लेकिन इससे चमगादड़ की मृत्यु नहीं होती। चमगादड़ द्वारा खाए गए फलों को अन्य जीव जन्तु एवं मनुष्यों के खाने पर यह बीमारी उनमें फैलती है तथा इससे मृत्यु भी हो सकती हैं। अभी तक यह बीमारी सुअरों और मनुष्यों मे ही पाई गई है।


निपाह वायरस बीमारी के लक्षण
सीएमएचओ डॉ एन.यू. खान ने बताया कि तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, खांसी, सांस लेने मे तकलीफ, बैचेनी, सुस्ती, बेहोशी, उल्टी-दस्त निपाह वायरस के लक्षण है। निपाह वायरस की जांच के लिए भारत सरकार द्वारा वर्तमान मे एनआईवी पुणे बायोलॉजी लैब को चयनित किया गया है, जिसमे संदिग्ध रोगियों के रक्त, मूत्र, गले की लार तथा सीएसएफ के नमूनो का वायरोलोजी परीक्षण किया जाता है। संदिग्ध लक्षण वाले मरीजों को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पर संपर्क करने की सलाह दी है।
 
निपाह से बचाव एवं रोकथाम के उपाय
जनसामान्य को सलाह दी गई कि चमगादड़ वाले क्षेत्रों में चमगादड़ के कुतरे फलों को न खाएं और न ही पेड पर लटकी ताड़ी का सेवन करें। इसी प्रकार बाजार से लाए गए फलों की जांच कर लें कि कहीं वे कुतरे तो नहीं गए हैं। यदि ऐसा हो तो तत्काल उन फलों को फेंक दें, उनका सेवन न करें। लंबे समय से बंद तहखाने एवं कुओं में जहां चमगादड हो सकती है, वहां नहीं जाने की सलाह दी गई है। निपाह रोग से संक्रमित व्यक्ति से दूर रहने तथा रोग की शंका होने पर तत्काल चिकित्सक से सम्पर्क करने के लिए कहा गया है।
 
 
इससे पहले शी और किम जोंग पेचिंग और चीन-उत्तरी कोरियाई सीमावर्ती चीनी शहर दालियन में मिल चुके हैं। यों इन दोनों देशों के बीच 70 साल पुराने कूटनीतिक संबंधों की यह वर्षगांठ भी है। दोनों देशों के बीच मिसाइल प्रक्षेपण और संयुक्त राष्ट्र की ओर से आर्थिक प्रतिबंधों के बाद कोरियाई द्वीप में तनाव से दूरियां बढ़ गई थी। किम जोंग उन की चीनी राष्ट्रपति से पहली मांग आर्थिक प्रतिबंधों में ढील की गुज़ारिश करना होगा। जबकि चीन की कोशिश होगी कि पूर्वी एशियाई देशों में अपने नेतृत्व को आगे बढ़ा सकें।
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