मध्य प्रदेश
ड्राइवर का बेटा बना सिविल जज, लाइनमैन की बेटी बोलेगी ऑर्डर-ऑर्डर
By Swadesh | Publish Date: 22/8/2019 2:57:00 PM
ड्राइवर का बेटा बना सिविल जज, लाइनमैन की बेटी बोलेगी ऑर्डर-ऑर्डर

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा आयोजित सिविल जज परीक्षा वर्ग-दो के परिणाम बुधवार को देर शाम जारी किये गये। इस परीक्षा में कुछ ऐसे उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं। इंदौर में एक ड्राइवर का बेटा सिविल जज बन गया है, जबकि रतलाम में एक लाइनमैन की बेटी का भी सिविल जज के लिए चयन हुआ है। वह भी अदालत में ऑर्डर-ऑर्डर बोलेगी। सिविल जज परीक्षा में रीवा की जसविता शुक्ला प्रदेश की टॉपर बनी हैं।

 
मप्र हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (एग्जाम) जोगिंदर सिंह के अनुसार बुधवार को देर शाम सिविल जज परीक्षा वर्ग-दो के परिणाम घोषित किये गये, जिसमें कुल 157 अभ्यर्थी सफल हुए हैं। इनमें  सामान्य वर्ग के 93, अन्य पिछड़ा वर्ग के 25, अजा के 29 और अजजा वर्ग के 10 अभ्यर्थी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इस बार अनारक्षित वर्ग के लिए कट-ऑफ मार्क्स 211.5, ओबीसी के लिए 200.5, एससी के लिए 181 व एसटी के लिए 180.5 रखा था। प्रतीक्षा सूची में अनारक्षित वर्ग के 18, ओबीसी के 5 और एससी के 6 अभ्यर्थी शामिल हैं।
 
इस परीक्षा में इंदौर जिला अदालत में पिछले 40 वर्षों से ड्राइवर की नौकरी करने वाले गोवर्धनलाल बजाड़ के बेटे चेतन ने सिविल जज परीक्षा में 450 में से 257.5 अंक हासिल कर ओबीसी वर्ग की सूची में 13वीं रैंक प्राप्त की है। चेतन ने बताया कि उसके दादा इंदौर जिला अदालत में चौकीदार थे और पिता यहां ड्राइवर हैं। पिता की इच्छा थी कि उनका एक बेटा जज बने। इसीलिए उन्होंने तीनों बेटों को कानून की पढ़ाई करवाई। चेतन ने बताया कि उनके दो भाई राम बजाड़ और योगेश वकील हैं और उसने सिविल जज के लिए परीक्षा दी, जिसमें वह सफल रहा। उसने सिविल जज बनकर अपने पिता की इच्छा पूरी की है।
 
शाजापुर जिले के ग्राम टांडा निवासी नीलम गुर्जर ने भी सिविल जज की परीक्षा में सफलता हासिल की है। नीलम के पिता सिद्धनाथ गुर्जर सोनकच्छ में बिजली कंपनी में लाइनमैन हैं। नीलम का कहना है कि पिता की इच्छा थी कि वह जज बने और इसीलिए उन्होंने उसे कानून की पढ़ाई करवाई। उसने कड़ी मेहनत कर सिविल जज परीक्षा सफलता पाई है। 
 
सिविल जज परीक्षा में रीवा की जसविता शुक्ला प्रदेश की टॉपर रहीं। जसविता के साथ उनकी बड़ी बहन अर्पिता शुक्ला ने भी साथ में सिविल जज की परीक्षा दी थी। दोनों ने फरवरी 2019 में प्री और अप्रैल माह में मेंस क्वालिफाई किया था, लेकिन मंजिल तक पहुंचने के मामले में जसविता बड़ी बहन से आगे निकल गईं। जसविता ने बताया कि उनके जीवन में संघर्ष उस समय बहुत ज्यादा हो गया, जब उनके पिता रंगनाथ शुक्ला लकवाग्रस्त हो गए। इसके बाद दोनों बहनों ने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया और हायर सेकेंडरी में 90 प्रतिशत से अधिक अंक लाने पर जसविता को छात्रवृत्ति मिली। जसविता ने स्कूल की पढ़ाई आदर्श गर्ल्स हाई स्कूल से पूरी की है। बीए व एलएलबी टीआरएस कॉलेज से 82 प्रतिशत अंकों के साथ टॉपर रहीं। 
 
इसी तरह शाजापुर की पूजा विजयवर्गीय और नीमच की अंकिता पलास ने भी सिविल जज बनने में सफलता पाई है। अंकिता रतलाम में जिला विधिक सहायता अधिकारी हैं। उन्होंने इंदौर से लॉ की परीक्षा पास की और 2015 में उनका चयन विधिक सहायता अधिकारी के पद पर हुआ और बड़वानी पदस्थ किया गया। इसके बाद अगस्त 2017 में रतलाम पदस्थ किया गया। अंकिता ने बताया कि पांचवीं बार में उसे सिविल जज बनने में सफलता मिली। वहीं पूजा विजयवर्गीय सिविल जज की परीक्षा में 15वीं रैंक हासिल की है। पूजा ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी कड़ी मेहनत और अपने परिजनों को दी है।
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