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अंग्रेजों और वामपंथी इतिहासकारों को कोसने के बजाय नये सिरे से इतिहास लिखें: अमित शाह
By Swadesh | Publish Date: 17/10/2019 4:20:50 PM
अंग्रेजों और वामपंथी इतिहासकारों को कोसने के बजाय नये सिरे से इतिहास लिखें: अमित शाह

- देश के गौरवशाली  इतिहास को सत्य और तथ्य के आधार पर लिखने की जरूरत
- मौर्य वंश और गुप्त वंश का शासन भारत का स्वर्णयुग रहा

वाराणसी।
गृह मंत्री अमित शाह ने देश के इतिहास को नये सिरे से संजोने की जिम्मेदारी इतिहासकारों को दी है। उन्होंने कहा कि भारत का गलत इतिहास लिखने के लिए अब अंग्रेज इतिहासकारों और वामपंथियों को कोसना और गाली देना बंद करना होगा। अब देश के गौरवशाली इतिहास को सत्य और तथ्य के आधार पर लिखने की जरूरत है।

गृहमंत्री गुरुवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन सभागार में भारत अध्ययन केन्द्र की ओर से आयोजित दो दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी 'गुप्तवंशैक वीरः स्कन्दगुप्त विक्रमादित्य का ऐतिहासिक पुनः स्मरण एवं भारत राष्ट्र का राजनीतिक भविष्य' के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। गृहमंत्री ने इतिहासकारों से इतिहास के कालखंडों में विस्मृत किए गए 200 महापुरुषों और 25 साम्राज्यों पर विस्तार से लिखने के लिए आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आजादी के 70 साल बाद और इसके पहले क्या इतिहास लिखा गया, उसके विवाद में न पड़ें। भारतीय संस्कृति और भारतीय नजरिये से नए सिरे से इतिहास लिखे जाने की जरूरत है। इसके लिए किसी ने रोका नहीं है।

गृहमंत्री ने कहा कि अपने इतिहास को संजोने की जिम्मेदारी देश की होती है। देश अब स्वतंत्र है, इसलिए लोकभाषा में भी इतिहास लिखा जाना चाहिए। गृहमंत्री ने कहा कि चंद्रगुप्त विक्रमादित्य और स्कंदगुप्त विक्रमादित्य के साथ इतिहास में बहुत अन्याय भी हुआ। उनके पराक्रम की जितनी प्रशंसा होनी चाहिए थी, उतनी शायद नहीं हुई। गृहमंत्री ने ऐतिहासिक कालखंड का जिक्र कर कहा कि महाभारत काल के 2000 वर्ष बाद 800 वर्ष का कालखंड दो प्रमुख शासन व्यवस्थाओं के कारण पूरे भारत का परचम दुनिया में रहा। इसमें मौर्य वंश और गुप्त वंश का शासन भारत का स्वर्णयुग रहा। दोनों वंशों ने भारतीय संस्कृति को विश्व के अंदर सर्वोच्च स्थान पर स्थापित कर दिया था।

गृहमंत्री ने कहा कि स्‍कंदगुप्‍त के समय भारत में अफगानिस्‍तान से लेकर संपूर्ण भारत में स्‍वर्णकाल रहा। सैन्‍य, साहित्‍य, कला आदि के क्षेत्र में विश्‍वस्‍तरीय सुविधाएं देश में रही। सेना को मजबुत और समृद्ध करने के साथ ही अखंड भारत का निर्माण किया। उन्होंने पूरे देश को एकता के सूत्र में अपने साहस पराक्रम से बांध दिया था। उन्होंने कहा कि चीन की दीवार का निर्माण हूणों के आक्रमण को रोकने के लिए बनी थी, ताकि वहां की सभ्‍यता और संस्‍कृति बनी रहे। विश्व में स्कंद गुप्त विक्रमादित्य ने पहली बार हूणों का पराक्रम से सामना कर उन्हें खदेड़ दिया। उन्होंने कश्‍मीर से कंधार तक हूणों के आतंक से देश को मुक्‍त कराया। विश्‍व में पहली बार स्‍कंदगुप्‍त से हूणों को पराजय मिली और बर्बर आक्रमण को खत्‍म करने के साथ सुखी और समृद्ध भारत का निर्माण किया।

उन्होंने कहा कि तक चीन के तत्कालीन सम्राट को इसका पता चला तो उन्होंने राजदूत से स्कन्दगुप्त के लिए प्रशस्ति पत्र भिजवाया। भारतीय इतिहास में किसी राजा को यह सम्मान नही मिला। ऐसे में विश्वविद्यालयों में सम्राट स्‍कंदगुप्‍त के पराक्रम और उनके शासन चलाने की कला पर चर्चा की जरूरत है। स्‍कंदगुप्‍त के इतिहास को पन्‍नों पर स्‍थापित कराने की जरूरत है। विश्वविद्यालय भारतीय संस्कृति और इतिहास का ज्योतिपुंज बने। गृहमंत्री ने कहा कि आज एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्व स्तर पर भारत के संस्कृति का पताका फहरा रहे हैं । उनके विचारों को भी प्रति​स्थापित करने की जरूरत है। दुनिया में भारत का सम्‍मान बढा है। भारत के विचार को दुनिया महत्‍व देती है।

उन्होंने वीर सावरकर का उल्लेख कर कहा कि 1857 की क्रांति इतिहास नहीं बनती, अगर वीर सावरकर न होते। वीर सावरकर ने ही 1857 को पहला स्वतंत्रता संग्राम का नाम दिया था। नहीं तो अंग्रेज और वामपंथी इतिहासकारों ने इसे विप्लव बताया था। गोष्ठी में बीज वक्तत्व प्रो. कमलेश दत्त त्रिपाठी ने दिया। गोष्ठी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केन्द्रीय मंत्री डॉ. महेन्द्र पांडेय, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के डॉ. बाल मुकुन्द पांडेय ने भी विचार रखा। कार्यक्रम की अध्यक्षता बीएचयू कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने किया। अतिथियों का स्वागत अध्ययन केन्द्र के निदेशक प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी और संचालन प्रो. राकेश कुमार उपाध्याय ने किया।

गोष्ठी में इनका हुआ सम्मान
गोष्ठी में गृहमंत्री अमित शाह ने प्रो. कमेलश दत्त त्रिपाठी,प्रो.रेवा प्रसाद द्विवेदी, डॉ. ज्ञानेश्वर चौबे, सुनील विश्वकर्मा, डॉ. नीरज राय, डॉ. बीआर मणि को सम्मानित किया। गोष्ठी में गृहमंत्री ने स्कंदगुप्त विक्रमादित्य पर आधारित पुस्तक और स्मारिका का लोकार्पण और विमोचन भी किया।

बीएचयू की जमकर ​की तारीफ
गृहमंत्री अमित शाह ने बीएचयू के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि जब काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना महामना ने की तब उनकी सोच चाहे जो भी रही हो, लेकिन स्थापना के इतने वर्षों बाद भी यह विश्वविद्यालय हिंदू संस्कृति को बनाए रखने के लिए अडिग खड़ा है और हिन्दू संस्कृति को आगे बढ़ा रहा है।

बाबतपुर एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत
इसके पूर्व गृहमंत्री विशेष विमान से बाबतपुर एयरपोर्ट पर पहुंचे तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में राज्य के मंत्रियों, विधायकों के साथ केन्द्रीय मंत्री डॉ. महेन्द्र पांडेय ने गर्मजोशी से स्वागत किया। एयरपोर्ट से गृहमंत्री सीधे हेलीकाप्टर से बीएचयू हेलीपैड पर आये।

संगोष्ठी में इनकी खास मौजूदगी रही
संगोष्ठी में जापान के प्रो. ओइबा ताकाकी, प्रो. ईयामा मातो, मंगोलिया से डॉ. उल्जित लुबराजाव, थाइलैंड से डॉ. नरसिंह चरण पंडॉ. डॉ. सोम्‍बत, श्रीलंका से डॉ. वादिंगला पन्‍नलोका, वियतनाम से प्रो. दोथूहा, अमेरिका से डॉ. सर्वज्ञ के द्विवेदी, नेपाल से डॉ. काशीनाथ न्‍यौपने, आइसीएसएसआर के प्रो. दीनबंधु पांडेय, राष्‍ट्रीय संग्राहालय महानिदेशक प्रो. बुद्ध रश्मि पांडेय की खास उपस्थिति रही।

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