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कला और कमर्शियल फिल्मों की उत्कृष्ट अदाकारा थीं स्मिता पाटिल
By Swadesh | Publish Date: 17/10/2019 3:34:35 PM
कला और कमर्शियल फिल्मों की उत्कृष्ट अदाकारा थीं स्मिता पाटिल

मुंबई। कहा जाता है ईश्वर जिसे बहुत चाहता है उसे जल्दी ही अपने पास बुला लेता है। अच्छे लोग तो ईश्वर के प्यारे होते ही हैं तभी तो मात्र 31 वर्ष की उम्र में महान अदाकारा, भव्य व्यक्त्वि की मालकिन, एक मां और पत्नी स्मिता पाटिल इस धरा को छोड़ कर चली गईं। 17 अक्टूबर 1955 को पुणे के एक राजनीतिक परिवार में जन्मींं स्मिता पाटिल ने अपनी कला यात्रा की शुरुआत दूरदर्शन के समाचार वाचक के रूप में की। 70 के दशक में सिनेमा आंदोलन में एक नया नाम जुड़ा था समांतर सिनेमा का जिसे कला फिल्में भी कहा जाता था। मुख्यधारा से इतर राजनीतिक विचारधारा का प्रतिनिधित्व करती इन्हीं फिल्मों की सशक्त हस्ताक्षर थींं स्मिता पाटिल।

केवल एक दशक की अपनी सिने यात्रा में मराठी, हिंदी, मलयालम और कन्नड़ आदि के 80 से अधिक फिल्मों में काम किया। 'भूमिका' और 'चक्र' में उनके अभिनय प्रतिभा को मान्यता देते हुए उन्हें उत्कृष्ट अभिनेत्री का राष्‍ट्रीय पुरस्कार दिया गया। फिल्मफेयर पुरस्कार से भी उन्हें सम्मानित किया गया। उनकी मराठी फिल्म 'उम्बरठा' को राज्य चित्रपट पुरस्कार मिला था।

श्याम बेनेगल की यह खोज शीघ्र ही मृणाल सेन, सत्यजीत रे, गोविंद निहलानी, अरविंदन की हिरोइन बन गईं। यही नहीं उनकी बहुमुखी प्रतिभा ने मेनस्ट्रीम सिनेमा के नामी निर्देशकों राज खोसला, शक्ति सामंत, बी. आर. चोपड़ा, रमेश सिप्पी को भी भा गयीं। कला फिल्मों की इस नामचीन हेरोइन ने 'शक्ति' और 'नमक हलाल' जैसी फिल्मों में अपने ग्लैमर से सबको अभिभूत कर दिया था। लेकिन काल को कुछ और ही मंजूर था। 13 दिसम्बर 1986 को वे पति राज बब्बर और पुत्र प्रतीक बब्बर सहित अपने असंख्य प्रसंशकों को दुखी कर विदा हो गईं।

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