ब्रेकिंग न्यूज़
करतारपुर कॉरिडोर: श्रद्धालुओं से शुल्क वसूलने पर अड़ा पाकिस्तान, भारत समझौते के लिए तैयारनक्सल प्रभावित क्षेत्र में तैनात जवानों के चलते हम सुरक्षित: अनुसुईया उइकेविचारधारा से सहमत नहीं लेकिन सावरकर की उपलब्धि को नकारा नहीं जा सकता : अभिषेक सिंघवीछत्तीसगढ़ सीडी कांड : ट्रायल कोर्ट में चल रही सुनवाई पर लगी रोकविराट कोहली के भाई-भाभी समेत कई वीआईपी ने किया मतदानफेसबुक पर ’रोहित’ बनकर अशफाक ने बढ़ाई थी कमलेश तिवारी से दोस्तीजम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाने में पुलिस बलों का महत्वपूर्ण योगदान: अमित शाहभारत ने श्रृंखला में दूसरी बार दक्षिण अफ्रीका को दिया फॉलोआन
छत्तीसगढ़
चंदन युक्त जल से स्नान कराया गया जगन्नाथ जी को
By Swadesh | Publish Date: 17/6/2019 5:19:01 PM
चंदन युक्त जल से स्नान कराया गया जगन्नाथ जी को

जगदलपुर। जगदलपुर में मनाए जाने वाले विश्व प्रसिद्ध गोंचा का प्रारंभ रविवार को चंदन स्नान के साथ हुआ। जिसे चंदन यात्रा भी कहा जाता है। स्थानीय जगन्नाथ मंदिर में प्रात: 8 बजे भगवान जगन्नाथ जी बलभद्र और शुभद्रा जी के काष्ठ प्रतिमाओं को चंदन युक्त जल से स्नान कराया एवं परम्परानुसार पूजा अर्चना की गयी और भगवान जगन्नाथ के 6 खण्डों में विराजित मूर्तियों को आसन से हटाकर नीचे रखा गया, जहां आज दिन भर भगवान की पूजा अर्चना की गयी।

 
इस दौरान श्रीजगन्नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और प्रसाद ग्रहण करते रहे। चंदन स्नान के साथ भगवान बीमार पड़ जाते हैं, जिसके चलते आज से भगवान जगन्नाथ की पूजा अर्चना में विशेष औषधि युक्त भोग प्रसाद भी शामिल किया गया। मंदिर के पुजारी ने बताया कि भगवान जगन्नाथ को आज आसन से उतारकर दिन भर यही पूजा अर्चना की गयी।
 
इसके पश्चात  संध्या की आरती के बाद भगवान जगन्नाथ अनसर में स्वास्थ्य लाभ के लिए मंदिर के मुक्ति मंडप में विराजित किए गए जहां 15 दिनों तक श्रद्धालुओं को अनसर के दौरान दर्शन करना वर्जित होगा। इसके बाद आषाढ़ कृष्ण पक्ष प्रथमा से भगवान को पहुंडि कराकर अनसर गृह मंदिर में स्थित मुक्ति मंडप में ले जाया जावेगा।
 
पौराणिक मान्यता के अनुसार अत्यधिक जल से स्नान करने के कारण भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रादेवी 15 दिनों तक बीमार हो जाते हैं, इस बीच पुन: देव विग्रहों को सजाने का कार्य संपादित किया जाता है। इस कार्य के लिए 15 दिन का समय लग जाता है।
 
 देव विग्रहों को अनसर गृह में रखा जाता है। इस अवधि में उन्हें विभिन्न प्रकार के जड़ी-बूटियों से निर्मित भोग लगाए जाने की प्रथा है, जिससे भगवान जल्द ही स्वास्थ्य लाभ ले सकें। इन 15 दिनों में भक्तगण भगवान के दर्शन नहीं कर सकते। देव स्नान पूर्णिमा (चंदन यात्रा) तथा प्राण प्रतिष्ठा के बाद अमावस्या के दूसरे दिन प्रतिपदा को नेत्र उत्सव का आयोजन किया जाता है।
COPYRIGHT @ 2018 SWADESH. ALL RIGHT RESERVED.DESIGN & DEVELOPED BY: 4C PLUS