Ad
ब्रेकिंग न्यूज़
पाकिस्तान में तालिबान के हमले में दो सुरक्षाकर्मियों की मौतविक्रमसिंघे से मुलाकात में सुषमा ने की विकास परियोजनाओं की समीक्षामहाकाल के दर पर पहुंचे हार्दिक, बोले-लोगों को जागरूक करने से होगा देश का निर्माणदुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान दो गुटों में हिंसक झड़प, दो की मौत, धारा 144 लागूबीजापुर में पुलिस व नक्सलियों के बीच मुठभेड़, तीन नक्सली ढेर और छह घायलजम्मू/कश्मीर निकाय चुनाव: अब तक के परिणाम में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरीअमृतसर रेल हादसा: मुख्यमंत्री अमरिंदर ने दिए मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश, अमृतसर में तीन दिनों का शोकविजयादशमी पर्व पर अमृतसर में हुए रेल हादसे पर कांग्रेस नेताओं ने दुख व्यक्त किया
छत्तीसगढ़
नहीं मिला वाहन तो खाट में शव लेकर तीन किलोमीटर पैदल चले परिजन
By Swadesh | Publish Date: 4/8/2018 4:52:15 PM
नहीं मिला वाहन तो खाट में शव लेकर तीन किलोमीटर पैदल चले परिजन

कोरबा। प्रदेश सरकार हर रोज विकास के दावे भर रही है तो वहीं यहां के कई इलाकों में अलग ही घटना देखने को मिल रही है। ऐसी ही घटना कोरबा जिले से भी देखने को मिल रही है। जहां शव वाहन न मिलने के कारण मृतक के परिजनों को शव खाट पर ढोना पड़ा। दरअसल, कोरबा के लेमरू थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम काटाद्वारी में  दिनेश राम नाम के एक युवक ने आत्महत्या कर ली थी।  जिसके चलते पुलिस ने पंचनामा की कार्यवाई कर पीएम कराना जरूरी बताया। ऐसे में पहले तो परिजनों ने शव वाहन के लिए फोन किया, लेकिन जब कई घंटों तक वाहन नहीं पहुंचा तो परिजनों ने शव को खाट सहित उठाकर चलना शुरू कर दिया। वहीं जब शव को लेकर परिजन लेमरू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे तो देखा कि अस्पताल में ताला लटका हुआ है। ऐसे में परिजनों को शव को खुले में रखकर कई घंटों तक अस्पताल के खुलने का इंतजार करना पड़ा।

 
वहीं जब 3-4 घंटों बाद स्वास्थ्य केंद्र खुला तब कहीं जाकर शव का पोस्टमार्टम किया जा सका।  परिजनों के मुताबिक उनके बेटे दिनेश ने किसी बात से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी। जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया जरूरी बताई। ऐसे में पर्याप्त पैसे न होने के कारण प्राइवेट वाहन करना जरा मुश्किल था। इसलिए सरकारी शव वाहन के लिए फोन किया गया, लेकिन जब वाहन नहीं पहुंचा तब हमें शव को बिना वाहन शव को कंधे पर ही ढोना पड़ा।
 
परिजनों ने बताया कि वाहन की व्यवस्था न होने के कारण उन्हें 3 किलोमीटर तक शव को पैदल ही ढोना पड़ा। इस दौरान जिस ने भी शव को यूं ढोते देखा प्रशासन को कोसने लगा। वहीं इसकी जानकारी जब प्रशासन तक पहुंची प्रशासन ने कार्यवाई की बात कर पल्ला झाड़ लिया। 
COPYRIGHT @ 2018 SWADESH. ALL RIGHT RESERVED.DESIGN & DEVELOPED BY: 4C PLUS