छत्तीसगढ़
मुर्गों की लड़ाई में ग्रामीण और अन्य लोग हो रहे दिवालिया
By Swadesh | Publish Date: 21/11/2018 1:41:35 PM
मुर्गों की लड़ाई में ग्रामीण और अन्य लोग हो रहे दिवालिया

जगदलपुर। बस्तर अंचल में मुर्गा लड़ाई का साप्ताहिक बाजारों के पास आयोजन होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस मुर्गों की लड़ाई में लगने वाले जुआ रूपी दांव से सैकड़ों ग्रामीण सहित शहरी अपनी कमाई लुटाकर दिवालिया हो रहे हैं। पहले यह सीमित स्तर पर ही ग्रामीणों के मध्य छोटे-मोटे मुर्गों पर हार जीत के साथ होता था। इसका एक मात्र उद्देश्य मनोरंजन करना था, लेकिन अब इसका स्वरूप विकृत हो गया है और अब यह मुर्गा लड़ाई मनोरंजन का नहीं वरन् जुऐ के अड्डे के रूप में सामने आ गया है। 

 
उल्लेखनीय है कि जगह-जगह पर होने वाली मुर्गा लड़ाई रूपी जुआ के अड्डों में आजकल लाखों रूपए तक के दांव लगाये जा रहे हैं और इनमें जीतने वाले मुठ्ठी भर लोग होते हैं और हारने वाले दर्जनों होते हैं। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि लोग अपने सप्ताह भर या माह भर काम करने के बाद जो पारिश्रामिक प्राप्त करते हैं, उसे भी बिना सोचे विचारे दांव लगाकर हार जाते हैं। इस राशि को गंवा देने के बाद उनके घर का खर्चा कैसे चलेगा और उनके बच्चों की पढ़ाई कैसी होगी? यह उन्हें याद नहीं रहता है। इस बुराई पर सामाजिक व वैधानिक स्तर पर प्रतिबंध लगाना अतिआवश्यक हो गया है। ताकि समाज का ताना बाना चलता रहे और लोग कर्ज के बोझ से मुक्त रह सकें। 
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