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छत्तीसगढ़
उपचार के दौरान बच्चा हाथी की मौत
By Swadesh | Publish Date: 28/11/2018 12:11:32 PM
उपचार के दौरान बच्चा हाथी की मौत

महासमुंद। जिले के पासिद (सिरपुर) गांव के कैंप में रखे गए गंभीर रूप से घायल बच्चा हाथी की उपचार के दौरान मंगलवार की देर शाम को मौत हो गई। चिकित्सकों के हरसंभव कोशिशों के बाद भी हाथी के बच्चे को नहीं बचाया जा सका । बच्चा हाथी के अंतिम सांस लेने तक उपचार करने वाले चिकित्सक डाॅ. योगेश्वर पटेल (वीएएस) का कहना है कि इस बच्चा हाथी के सिर में भी अंदरूनी चोटें थी। सिर का हड्डी टूटा हुआ था। यही मौत का कारण बना। 

 
बच्चा हाथी की मौत के बाद डा योगेश्वर पटेल, डाॅ. सीएस चंद्राकर और डा. जगमोहन चंद्राकर की तीन सदस्यी टीम ने पोस्टमार्टम किया। जिसमें बच्चा हाथी के बुरी तरह से जख्मी होने का खुलासा हुआ। चार दिन तक लगातार उपचार के बावजूद बच्चा हाथी को डाक्टर बचा नहीं पाए। इधर, महासमुंद वनमंडलाधिकारी आलोक तिवारी ने बताया कि पीएम के बाद बच्चा हाथी को पासिद के जंगल में दफना दिया गया है। 
 
मालूम हो कि पिछले 23-24 नवंबर की दरम्यानी रात सिरपुर के जंगल से आगे बढ़ते हुए हाथियों का दल समोदा बैराज के पास महानदी को पार कर रायपुर की ओर बढ़ रहे थे। आरंग ब्लाक के चपरीद गांव के पास महानदी में सुबह-सुबह कीचड़ में फंसे इस बच्चा हाथी को गंभीर हालत में ग्रामीणों ने निकाला । तब तक बच्चा हाथी बहुत ज्यादा पानी पी चुका था। अनुमान लगाया जा रहा है कि महानदी पार करते समय गहरे पानी में चले जाने से वह डूबते-डूबते बचा था। खेत-खार पार करते हुए नवजात हाथी किसानों के खदेड़े जाने से बड़े हाथियों के दल के साथ भाग रहा था। इससे खेत के मेड़ अथवा किसी पेड़ आदि से टकराने से उसके सिर में गंभीर चोट आने का अनुमान वन अमला लगा रहा है।उसके पैर में भी जगह-जगह गहरे जख्म थे। इससे पहले ही वन्य जीव चिकित्सक डा. जेके जड़िया ने बच्चा हाथी की हालत चिंताजनक घोषित कर दिया था। बावजूद, चिकित्सकों की टीम ने हार नहीं मानी और उपचार निरंतर जारी रखा। चार दिन के नियमित उपचार के बावजूद बच्चा हाथी को बचाया नहीं जा सका ।
 
हाथी भगाओ फसल बचाओ समिति के संयोजक राधेलाल सिन्हा ने बताया कि बीते कुछ दिनों से लहंगर-पीढ़ी के जंगल में 16 हाथियों का दल डेरा जमाए हुए हैं। 27 नवंबर मंगलवार को भी शाम सात बजे तक हाथियों को लहंगर के बघर्रा नाला के पास देखा गया है। किसानों का कहना है कि अपने बच्चे को ढूंढते हुए हाथियों का यह दल इस क्षेत्र में लंबे समय तक डेरा डालकर उनकी फसल को चौपट करता रहेगा, इसे लेकर किसान काफी चिंतित है।
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