छत्तीसगढ़
सहकारी बैंकों के पास रुपये नहीं, चक्कर काट रहे किसान
By Swadesh | Publish Date: 7/2/2019 2:49:05 PM
सहकारी बैंकों के पास रुपये नहीं, चक्कर काट रहे किसान

जगदलपुर। प्रदेश में इस वर्ष कांग्रेस सरकार के बनते ही स्थानीय बस्तरियां किसानों ने बढ़ चढ़कर अपनी उपज धान का विक्रय किया है। इस वर्ष जहां एक ओर समर्थन मूल्य अधिक मिलने और कर्जमाफी की घोषणा से कांग्रेस ने सत्ता बनाई वहीं दूसरी ओर किसानों ने भी धान बेचकर शासन का सहयोग किया। लेकिन किसानों को धान बेचने के बाद भी अपना भुगतान अपने खाते में नहीं पहुंचने से भटकाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है और वे सहकारी बैंकों के चक्कर कांटते हुए परेशान हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार सहकारी बैंकों के पास अभी इतना फंड नहीं है कि वे किसानों को उनकी उपज का पूरा मूल्य एक साथ प्रदान कर सकें। 

 
उल्लेखनीय है कि प्रदेश सहित बस्तर में धान खरीदी का अंतिम दिन 31 जनवरी था और बस्तर जिले के ही 20 हजार से अधिक किसानों ने 10 लाख 44 हजार से अधिक धान का विक्रय किया। जिसका भुगतान ढाई अरब रूपये से भी अधिक होता है। अब इन किसानों के खातों में उनकी उपज का मूल्य नहीं पहुंच सका जिसके लिए वे सहकारी बैंकों के तथा लेम्पस में स्थित भुगतान बैंक के शाखाओं में कतार लगाकर मात्र 10 से 20 हजार रूपये का भुगतान प्राप्त कर रहे हैं। इस स्थिति में उनके सामने अपने घर-परिवार के लिए तथा मांगलिक अवसरों के लिए नगद की समस्या सामने आ रही है। 
 
इस संबंध में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक बकावंड के शाखा प्रबंधक सुरेश मथुरानी से गुरुवार को बताया कि बैंक की सीमा इनके यहां 20 लाख रुपये तक की है और किसानों को भुगतान देने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। स्वास्थ्य कार्डों व अन्य मांगलिक कार्यो के लिए कुछ किसानों को अधिक राशि दी जा रही है। अभी जैसे ही बैंक की केश लिमिट बढ़ाने की कोशिश सफल होती है वैसे ही किसानों को भुगतान अधिक प्राप्त होने लगेगा। 
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