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छत्तीसगढ़
13 हजार छात्राओं को मिलेगी साइकिल
By Swadesh | Publish Date: 8/2/2019 4:00:41 PM
13 हजार छात्राओं को मिलेगी साइकिल

कोरबा। वर्तमान शिक्षा सत्र के नौ माह बाद छात्राओं के लिए साइकिल का आंवटन शुरू हुआ है। साइकिल असेंबल करने का काम अंधरीकछार स्कूल में शुरू हो चुका है। चुनाव आचार संहिता के कारण वितरण बाधित था। जिले के 213 हाईस्कूल के 13 हजार छात्राओं के लिए ब्लॉक मुख्यालयों में साइकिल के पार्ट्स का आवंटन हो चुका है। असेंबल के साथ स्कूलों में वितरण शुरू किया जाएगा। परीक्षा के पहले तक साइकिल मिलने से केंद्र पहुंचने में छात्राओं को सहूलियत होगी। 

 
सरस्वती साइकिल योजना के तहत छात्राओं को नौ महीने के इंतजार के बाद साइकिलाें का वितरण होगा। स्कूल में पहुुंचने के लिए छात्राओं को घर से पैदल जाना न पड़े, इस आशय से साइकिल प्रदान किया जाता है। चुनावी वर्ष होने के कारण शैक्षणिक सत्र में समय पर साइकिल वितरण नहीं हुआ। अजगरबहार, सतरेंगा, चैतमा, पोड़ी-उपरोड़ा, मोरगा आदि ऐसे हाईस्कूल हैं, जहां वनांचल ग्रामीण क्षेत्र आदिवासी बालिकाओं को आज भी पैदल चलकर स्कूल आते हुए देखा जा सकता है। साइकिल छात्राओं तक पहुंचने के लिए पखवाड़े भर का समय लग जाएगा। 
 
छात्राओं को जारी वर्ष में समय पर साइकिल नहीं मिले से उपस्थिति पर भी असर देखा जा रहा है। पूर्व में शासन की ओर से छात्राओं के खाते में राशि प्रदान कर दी जाती थी, जिससे छात्राएं अपनी पसंद की साइकिल खरीद सके। नियम में परिवर्तन करते हुए पूर्व शासन ने साइकिल की खरीदी जीएम पोर्टल से कर वितरण का निर्देश दिया था। साइकिल की गुणवत्ता कमजोर होने के कारण छात्राओं इसका सही लाभ नहीं मिल पा रहा। नवमीं कक्षा से बारहवीं तक चार साल तक टिक सके ऐसी साइकिल नहीं दी जा रही। साइकिल के अभाव में छात्राओं के लिए पैदल चलना ही एकमात्र विकल्प है। 
 
योजना के अनुसार साइकिल अजा, अजजा व बीपीएल परिवार से संबद्ध बालिकाओं को दिया जाना है। आर्थिक रूप से विपन्न अभिभावकों ने इस आस में साइकिल की खरीदी नहीं की है कि उन्हें योजना के तहत साइकिल मिलेगी। अब तक साइकिल नहीं मिलने से छात्राओं को पैदल चलकर अथवा अन्य साधन से स्कूल आना पड़ रहा है। शासन की ओर से की गई लेटलतीफी का खामियाजा छात्राएं भुगत रही हैं। वर्ष 2017-18 में डाइस कोड के आधार पर मंगाई गई साइकिलों में 2023 साइकिलें बच गई थी। बची हुई साइकिलों को छात्राओं को वितरित किया जा चुका है।
 
यात्री वाहन से आवागमन
देवपहरी, अजगरबहार, पोड़ी-उपरोड़ा, मोरगा ऐसे वनांचल हाईस्कूल हैं जहां 10 से 12 किलोमीटर के दायरे से छात्राएं पढ़ने आती हैं। साइकिल नहीं मिलने से छात्राओं को बस अथवा अन्य यात्री वाहन से स्कूल आना पड़ता। प्रतिदिन यात्रा के लिए किराया नहीं होने से छात्राओं को अनुपस्थिति से काम चलाना पड़ता है। इसके अलावा जिन गांवों में यात्री वाहनों की सुविधा नहीं है, वहां की छात्राओं को पूर्व वर्ष की छात्राओं के साथ डबल सवारी के तौर स्कूल आना पड़ रहा है।
 
पांच किमी से भी दूर है स्कूल
आदिवासी जिलों में प्रति पांच किलोमीटर के दायरे में हाईस्कूल संचालित करने का प्रावधान है। जिले में 192 हाईस्कूल का संचालन हो रहा है। इनमें 62 मिडिल स्कूल को राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत उन्नयन किया गया है। ऐसी भी स्थिति देखी जा रही है, जहां पहले से हाईस्कूल संचालित है वहां अतिरिक्त हाईस्कूल खोल दिया गया है। ऐसे में वास्तव में जहां साइकिल की आवश्यकता है, उन गांवों के छात्राओं को साइकिल से वंचित होना पड़ेगा।
 
परिवहन शुल्क लिया तो खैर नहीं
साइकिल के पार्ट्स ब्लॉक मुख्यालयों में कंपनी की ओर से पहुंचा दी जाती है। असेंबल के बाद जब स्कूलों तक साइकिल को ले जाने के लिए परिवहन भाड़ा की बात आती है, तो छात्राओं से चंदा लिया जाता है। बतौर चंदे की राशि 200 से 300 रुपये वसूल किया जाता है। वस्तुस्थिति को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने प्रत्येक स्कूल प्रबंधन को कहा है कि साइकिल परिवहन के लिए किसी भी अभिभावक या छात्रा से सहयोग राशि लेने पर कार्रवाई की जाएगी। 
 
जिला शिक्षा अधिकारी सतीश पांडेय ने बताया कि, जिले के पांचों ब्लॉक में साइकिल का पार्ट्‌स पहुंच चुका है। असेंबल करने का कार्य मैकेनिकों ने शुरू कर दिया है। साइकिलों की कसावट जैसे-जैसे पूरी होगी छात्राओं को वितरण किया जाएगा। ब्लॉक से स्कूल तक साइकिल ले जाने की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की होगी। परिवहन के लिए किसी छात्रा अथवा अभिभावक से राशि लेने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
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