छत्तीसगढ़
पटवारी, कोटवार, शिक्षक व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी रखेंगे बाल विवाह पर नजर
By Swadesh | Publish Date: 1/4/2019 3:58:38 PM
पटवारी, कोटवार, शिक्षक व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी रखेंगे बाल विवाह पर नजर

कोरबा। वैवाहिक समय आने पर पर जिले में बाल विवाह को रोकना प्रशासन व संबंधित विभाग के लिए चुनौती होगी। जिले में आम तौर पर रामनवमी एवं अक्ती को शुभ मुहूर्त मानकर शादियां होती है। इस दौरान कई नाबालिगों की भी शादियां होती हैं। वहीं अगर जिले में पूर्व के 4 वर्ष का रिकॉर्ड देखा जाए तो 72 बाल विवाह रोके गए हैं। जिसमें 2015-16 के दौरान 9 मामले, 2016-17 के दौरान 24 मामले, 2017-18 के दौरान 34 मामले एवं एक अप्रैल 2018 से अब तक चार बाल विवाह के मामले संयुक्त टीम ने रुकवाएं हैं।

 
राम नवमी व अक्षय तृतीया का इंतजार, प्रशासन चौकन्ना
जिले में आने वाले 14 अप्रैल को राम नवमी व 7 मई को अक्षय तृतीया को देव लग्न होने की स्थिति में हजारों की संख्या में विवाह होने की संभावना है। देव लग्न के दौरान कई नाबालिग भी विवाह के बंधन में बंध सकते हैं, जिसे देखते हुए जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। जानकारी के अनुसार पूर्व में भी जिले में इन तिथियों पर बाल विवाह के प्रकरण सामने आ चुके हैं। जिसे देखते हुए इस बार पटवारी, कोटवार शिक्षक व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर ग्राम स्तर पर शासकीय महकमा को बाल विवाह को लेकर चौकन्ना कर दिया गया है।
 
इस तरह के प्रयास सामने नहीं आए 
जिले में बाल विवाह की रोकथाम के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार का अभाव देखा जा रहा है। जिसके तहत गांवों में दीवार लेखन, पांपलेट वितरण, स्कूल व आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों की रैली, बाल विवाह रोकने के उपाय, समाज को जागरूक करने के प्रयासों का अभाव देखा जा रहा है। वहीं सूचना तंत्र की कमी पूर्व वर्ष में भी सामने आती रही है, जो रोकथाम के लिए बाधक साबित हो सकता है। बहरहाल जिले में बाल विवाह की रोकथाम को लेकर सार्थक प्रयास किए जाने की दरकार है।
 
इस बार महिला स्वसहायता समूह भी सक्रिय रहेगा 
महिला बाल विकास अधिकारी आनन्द किस्पोट्टा ने बताया कि जिले में बाल विवाह की रोकथाम के लिए पुलिस के साथ-साथ विभिन्न विभागों को भी जिम्मेदारी दी गई है। बाल विवाह की सूचना पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। जिले के ग्रामीण अंचलों में बाल विवाह को लेकर महिला स्वसहायता समूहों को भी दायित्व सौंपा गया है। इसके आलावा जिले में 12 विभाग प्रमुखों को जिले में बाल विवाह की रोकथाम को प्रभावी करने के लिए प्रशासन ने सक्रिय किया है।
 
विवाह पंजीयन की अनिवार्य हो तो रुकेगा बाल विवाह
जानकारों की माने तो प्रत्येक ग्राम पंचायतों में विवाह पंजीयन कराने का प्रावधान है। पंजीयन की पहली शर्त आयु निर्धारण है, जिसके पालन में लोग बाल विवाह से पीछे हट सकते हैं। बाल विवाह की रोकथाम के लिए पंजीयन की अनिवार्यता की जानी चाहिए। इसके आलावा विवाह के दौरान वर वधु के आयु का उल्लेख करने का प्रावधान है, जिस पर अमल कम होने से बाल विवाह होने की संभावना होती है। ऐसेे विवाह कार्ड में दोनों की जन्म तिथि दर्शाने की बाध्यता होने पर भी बाल विवाह पर अंकुश लगाया जा सकता है।
 
तो हो सकती है दो साल की सजा 
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों के अंतर्गत 18 वर्ष से कम आयु की लड़की एवं 21 वर्ष से कम आयु के लड़के के विवाह को प्रतिबंधित किया गया है। जो व्यक्ति निषिद्ध आयु सीमा का उल्लंघन कर विवाह करता या करवाता है या उसमें सम्मिलित होता या सहायता करता हैै, उसे भी 1 लाख रुपये तक का जुर्माना या 2 वर्ष तक कठोर कारावास अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है। वहीं बाल विवाह करने पर वर व वधु के माता-पिता सगे संबंधियों व विवाह कराने वाले पुरोहितों पर भी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
 
जिला बाल संरक्षण अधिकारी दया दास महंत ने बताया कि बाल विवाह रोकने टीम सक्रियता से जुटी हुई है। बाल विवाह की सूचना मिलने पर मौके पर जाकर शादी रोकी जाएगी। बालक की उम्र 21 व बालिका की आयु 18 वर्ष से कम होने पर स्थल पर पंचनामा तैयार कर निर्धारित आयु पूर्ण होने के बाद ही शादी करने संबंधी शपथ-पत्र परिजनों से भरवाया जाता है। आने वाले समय में भी कार्रवाई जारी रहेगी।
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