मनोरंजन
एनएसडी का 'जश्न-ए-बचपन' 17 से
By Swadesh | Publish Date: 13/11/2018 1:39:32 PM
एनएसडी का 'जश्न-ए-बचपन' 17 से

नई दिल्ली। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय ने अपने बहुप्रतीक्षित अन्तराष्ट्रीय रंगमंच उत्स्व के 14 वें संस्करण जश्न-ए-बचपन की घोषणा कर दी है। यह महोत्सव 17 से 25 नवम्बर तक एनएसडी परिसर में आयोजित किया जाएगा। 

 
महोत्सव में इस वर्ष भारत के 21 और विदेशों के तीन समूह अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। इनमें श्रीलंका (नॉन-वर्बल), स्विट्जरलैंड (अंग्रेजी) और इंडोनेशिया (जावानी) शामिल होंगे। भारत के विभिन्न राज्यों, जैसे महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, केरल, उत्तर प्रदेश, असम, मणिपुर और त्रिपुरा आदि से प्राप्त 221 प्रविष्टियों में से कुल 24 समूहों का चयन किया गया है। नाटकों का मंचन मूक, अंग्रेजी, हिंदी व अन्य विदेशी भाषाओं के अलावा बंगाली, मराठी, असमिया और मलयालम जैसी स्थानीय भाषाओं में किया जाएगा।
 
पिछले संस्करणों के समान ही, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के परिसर को मेले में परिवर्तित कर दिया जाएगा, क्योंकि उत्सव में 500 से अधिक थिएटर प्रेमियों के भाग लेने की उम्मीद है। उद्घाटन समारोह 17 नवंबर को एनएसडी परिसर में शाम 5.30 बजे आयोजित होगा। इसके बाद 'उड़ान' नामक एक संगीत व नृत्य प्रदर्शन होगा। इसमें थांगटा पंग चोलम (मणिपुर), कालबोलिया (राजस्थान), गोटिपुआ (उड़ीसा) और भांगड़ा/ लोक संगीत (पंजाब) जैसे समूहों द्वारा चार प्रस्तुतियां दी जायेंगी। डॉ. लईक हुसैन के मार्गदर्शन में असम (बिहू), सिक्किम (शेर नृत्य), नागालैंड (काबुल नागा नृत्य) और मणिपुर (स्टिक बैलेंस) जैसे भव्य कार्यक्रम मुख्य आकर्षण रहेंगे।
 
चार श्रेणियो में होंगे नाटक
इस बार नाटकों को चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है- बच्चों द्वारा किये जाने वाले प्रदर्शन, बच्चों और वयस्कों के प्रदर्शन, वयस्को द्वारा बच्चों के लिए प्रदर्शन और एक कठपुतली प्रस्तुति। 
 
नियमित नाटकों के अलावा, थिएटर उत्साही लोगों के लिए छह माह के क्रैश कोर्स- एनएसडी संडे क्लब के छात्र भी प्रतिदिन दोपहर को परिसर के हरे-भरे लॉन में अपनी परफॉर्मेंस देंगे। 
 
चूंकि इस उत्सव में बचपन का जश्न मनाया जा रहा है, इसलिए दिल्ली व एनसीआर के विभिन्न गैर सरकारी संगठनों के जरूरतमंद बच्चों को भी उद्घाटन समारोह में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। इस पहल के पीछे विचार यह है कि ऐसे बच्चों को मुख्यधारा में लाया जाये और जश्न-ए-बचपन जैसे एक वैश्विक मंच पर उनमें मनोरंजन के साथ कला व संस्कृति के प्रति उत्साह पैदा किया जाये। 
 
बच्चों के लिए रंगमंच की महत्ता पर संगोष्ठी
नाटक के महत्व को समझने के लिए, उत्सव में 24 -25 नवंबर को 'बच्चों के लिए रंगमंच / नाटक पर विचार' दो-दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की जायेगी। इस सत्र को रंगमंच के प्रतिष्ठित व्यक्ति संबोधित करेंगे। हर दिन डायरेक्टर्स मीट हुआ करेगी। मीट में बीते दिन नाटक प्रस्तुत कर चुके कोई तीन समूह दर्शकों एवं मीडिया के साथ अपने अनुभव साझा करेंगे। नाटकों के निर्माता इन नाटकों की तैयारी के पीछे की बारीकियों पर भी चर्चा करेंगे।
 
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के निदेशक सुरेश शर्मा ने कहा, ''जश्न-ए-बचपन के आयोजन का मुख्य उद्देश्य थियेटर को प्रमुखता में लाना है। डिजिटल माध्यमों की वजह से आधुनिक युग में इसकी चमक फीकी पड़ी है। बच्चे इन दिनों रंगमंच से अवगत नहीं हो रहे है, क्योंकि स्कूलों में थिएटर को एक विषय के रूप में नहीं पढ़ाया जाता है। संगीत और कला की तरह, रंगमंच को भी स्कूलों में पढ़ाया जाना चाहिए, क्योंकि यह न केवल भावनाओं को व्यक्त करने के सबसे आसान तरीकों में से एक है, बल्कि यह हमें अपने व्यक्तित्व को विकसित करने में सक्षम भी बनाता है।''
 
बुक माई शो पर टिकट 
नाटकों के लिए टिकट बुक माई शो और साथ ही, निर्धारित ऑडिटोरियम, प्रोडक्शन काउंटरों पर बच्चों के लिए 20रुपये और वयस्कों के लिए 50 रुपये उपलब्ध रहेंगे। टिकट दो टाइम स्लॉट में उपलब्ध होंगे - सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे और दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक।
1998 में शुरू हुआ, जश्न-ए-बचपन, एनएसडी की टी.आई.ई. कंपनी का एक उद्यम है। इसे देश भर में बच्चों के रंगमंच के विकास में योगदान करने के लिए प्रारंभ किया गया था। साल-दर-साल सफलता के बाद, अब यह भारत में बच्चों के लिए सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण रंगमंच उत्सवों में शुमार हो गया है। 
 
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