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राष्ट्रपति चुनाव 2020: गर्भपात बन रहा है मुख्य मुद्दा
By Swadesh | Publish Date: 7/6/2019 11:00:50 AM
राष्ट्रपति चुनाव 2020: गर्भपात बन रहा है मुख्य मुद्दा

लॉस एंजेल्स। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में महिलाओं के मौलिक अधिकार 'गर्भपात' को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है। राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के संभावित डेढ़ दर्जन प्रत्याशियों की होड़ में अग्रणी पूर्व राष्ट्रपति जोइ बिडेन ने  महिलाओं के गर्भपात के अधिकार पर चोट कर पार्टी के अंदर नई बहस छेड़ दी है। 

जोइ बिडेन ने बलात्कार और चिकित्सीय संबंधी परिस्थितियों को छोड़कर गर्भपात क़ानून के पक्ष में अपनी प्रतिक्रिया जारी की है। इस संदर्भ में वह धार्मिक पृष्ठभूमि में भ्रूण हत्या को उचित नहीं मानते।
 
जोइ बिडेन के इस नज़रिए की भारतीय मूलवंशी कमला हैरिस सहित आधा दर्जन डेमोक्रेट प्रत्याशियों ने निंदा की है। इनका कहना है कि बिडेन के ये विचार रिपब्लिकन पार्टी के विचारों से मेल खाते हैं। समाजवादी डेमोक्रेट और नंबर दो पर चल रहे बर्नी सैंडर्स ने दो टूक शब्दों में कहा है कि वह जोइ बिडेन की इस वैचारिक और राजनैतिक सोच से कतई सहमत नहीं है। 
 
उन्होंने कहा है कि महिलाओं के लिए गर्भपात विधान सम्मत एक मौलिक अधिकार है, जो उन्हें पारिवारिक प्रबंधन की अनुमति देता है। उन्होंने यह भी कहा है कि रिपब्लिकन बहुल अल्बामा और मिसूरी सहित कुछेक रिपब्लिकन राज्यों में गर्भपात क़ानून को पारित कर दिया है। लेकिन रिपब्लिकन यह भूल रहे हैं कि एक ग़रीब और असहाय महिला फ़ेडरल अथवा राज्य की आर्थिक मदद के बिना कैसे अपने परिवार का प्रबंधन कर सकती है, जीवन का कैसे निर्वाह कर सकती है? गर्भपात के पक्ष में कमला हैरिस के अलावा क्रिस्टीन गिलब्रैंड, एमी क्लोबुरच, एलिज़ाबेथ वारेन, कोरी बूकर और ब्रेतो ओर्के ने भी समर्थन किया है। 
 
गौरतलब है कि सन 1973 में देश के सर्वोच्च न्यायालय ने रो बनाम वाडे मामले में गर्भपात को उचित ठहराया था और बीस सप्ताह के नीचे के गर्भपात की अनुमति प्रदान की थी, बशर्ते भ्रूण के दिल की धड़कन सुनाई नहीं पड़ती हो। अमेरिकन सिविल लिबरटीज यूनियन इस मुद्दे को लेकर गर्भपात क़ानून को सही ठहराने के पक्ष में हैं। इसके अलावा 'नियोजित पेरेंटहुड' संगठन ने भी गर्भपात के पक्ष में अपनी बात ज़ोरदार ढंग से उठाई है। 
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