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फेडरल ज्यूरी ने टाटा कन्सल्टेंसी को दी बड़ी राहत
By Swadesh | Publish Date: 30/11/2018 12:25:38 PM
फेडरल ज्यूरी ने टाटा कन्सल्टेंसी को दी बड़ी राहत

लॉस-एंजेल्स। फेडरल ज्यूरी ने एक एेतिहासिक फैसले में चार दशक से कार्यरत टाटा कन्सल्टेंसी सर्विस (टीसीएस) को अमेरिकी वीजा नियमानुसार कामकाज करने के मामले में क्लीनचिट दी है। ज्यूरी के इस फैसले से अमेरिका में कार्यरत भारत की अन्य सॉफ्यवेयर कंपनियां- इंफोसिस, विप्रों और एचसीएल लाभान्वित हो सकेंगी। 

 
कैलिफोर्निया में ऑकलेंड स्थित फेडरल ज्यूरी के समक्ष टीसीएस के तीन गैर दक्षिण एशियाई कर्मियों ने अदालत में दाखिल मामले में आरोप लगाया था कि कंपनी ने पक्षपात के आधार पर उन्हें प्रताड़ित किया और नौकरी से बाहर कर दिया। ये तीन गैर दक्षिण एशियाई कर्मचारी थे क्रिस्टोफर स्लेट, सैयद आमेर मसूडी और नौवेल में डोली। 
 
इन्होंने टीसीएस पर आरोप पत्र में कहा था कि इस कंपनी ने सन 2011 के बाद 12.6 प्रतिशत गैर दक्षिण एशियाई कर्मियों को नौकरी से हटाया, जबकि मात्र एक प्रतिशत दक्षिण एशियाई कर्मियों को नौकरी से हटाया गया। पिछली पांच नवम्बर को दायर एक मामले में पक्षपात का आरोप लगाया था। 
 
इस पर कंपनी ने अपने जवाब में फेडरल ज्यूरी के सामने किसी भी कर्मी के साथ पक्षपात किए जाने से मना किया था। कम्पनी ने जवाबनामे में कहा था कि टीसीएस कंपनी योग्यता के आधार पर पक्षपात रहित रोजगार देने और रोजगार से हटाने का अधिकार रखती है, जो उनके क्लाइंट की जरूरतों और अपेक्षाओं की कसौटी पर खरा उतर सके। ऐसी स्थिति में कंपनी को अमेरिका के ऐसे दूर-दराज के क्षेत्रों में स्थापित कंपनियों में इंजीनियरों को स्थानांतरित करना अनिवार्य होता है। इस तरह के मामले भारत की अन्य सॉफ्टवेयर कंपनियों-इंफोसिस, विप्रों और एचसीएल को अदालतों में झेलने पड़ते हैं।
 
उल्लेखनीय है कि टीसीएस के दुनियाभर में चार लाख कर्मचारी हैं। इसका सौ अरब डॉलर का कारोबार है, जिसमें अमेरिका से अधिकतम राजस्व की प्राप्ति होती है।
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