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अमेरिका में जे-1वीज़ा पर आए हज़ारों भारतीय चिकित्सकों का भविष्य अधर में!
By Swadesh | Publish Date: 9/5/2019 12:44:44 PM
अमेरिका में जे-1वीज़ा पर आए हज़ारों भारतीय चिकित्सकों का भविष्य अधर में!

लॉस एंजेल्स। अमेरिका में रेज़िडेंसी के पश्चात ग्रामीण क्षेत्रों में जे-1अस्थाई वीज़ा पर वर्षों से कार्यरत हज़ारों भारतीय चिकित्सकों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। यह वीज़ा इस साल के अंत तक मान्य है। अमेरिकी कांग्रेस ‘कनकार्ड-30 वेवर प्रोग्राम’ के अंतर्गत इस वीज़ा की अवधि अगले दो साल के लिए नहीं बढ़ती है, तो भारत के क़रीब दस हज़ार चिकित्सक और उनके परिवार के सदस्यों को मजबूरन स्वदेश लौटना पड़ सकता है। 

सिनेटर एमी क्लोबूचर, सुसान कोलिन और जैकी रोज़िन और चार्ल्स ग्रैसली ने गत 29 मार्च 2019 में कनकार्ड स्टेट 30 प्रोग्राम के तहत इस वीज़ा की अवधि दो साल बढ़ाए जाने का प्रस्ताव सीनेट में प्रस्तुत किया हुआ है। इस पर दोनों ही पार्टियों के सदस्य यह प्रस्ताव पारित कराए जाने के लिए प्रयत्नशील हैं। अमेरिकी ग्रामीण अंचलों में मनोचिकित्सकों, मनोरोग, फ़ैमिली मेडिसन, प्रसूती रोग आदि संबंधित चिकित्सकों की कमी है, लेकिन अस्थाई वीज़ा के मामले में अमेरिकी विधान कड़ा है। इस कार्य में डेमोक्रेट बहुल प्रतिनिधि सभा में बहुमत दल के नेता स्टेनी होयर भी दिलजान से लगे हैं कि यह विधेयक पारित हो।
 
भारतीय चिकित्सक वाशिंगटन डी सी में कांग्रेस में सत्ताधारी रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी, दोनों ही दलों के सदस्यों से मुलाक़ात करने में जुटे हैं। पिछले सप्ताह वाशिंगटन में भारतीय अमेरिकी चिकित्सक असोसिएशन ‘आपी’ के सम्मेलन के दौरान कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने भी भरोसा दिलाया है।
 
अमेरिका के ग्रामीण अंचलों में चिकित्सा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए सन 1994 में नार्थ डेकोटा के सिनेटर केंट कनकार्ड के प्रयासों से ‘कनकार्ड-30 वेवर्स कार्यक्रम’ के अधीन जे -1वीज़ा अवधि बढ़ाई गई थी। तब इसे एक विधेयक पारित कर क़ानून की शक्ल दी गयी थी। इस नियम के तहत अमेरिका के सभी 50 राज्य और संघीय इकाइयां संघीय हेल्थ केयर प्रोग्राम के अंतर्गत अधिकतम 30 चिकित्सकों की नियुक्ति कर सकती है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत छूट सिर्फ़ इतनी है कि ये राज्य अपने अपने ग्रामीण अंचलों में उन्हीं इंटेरनेशनल मेडिकल ग्रेजुएट को सात वर्षों के लिए नियुक्त कर सकते हैं, जो ग्रेजुएट तीन वर्षीय रेज़िडेंसी कर चुके होते हैं। ऐसे सभी अंतराष्ट्रीय चिकित्सकों को प्रति सप्ताह 40 घंटे काम करना अनिवार्य है।
 
भारतीय चिकित्सकों के प्रवक्ता डा राम संजीव अलूर ने मीडिया से कहा है कि अब कनकार्ड-30 वेवर्स प्रोग्राम के अंतर्गत काम कर रहे चिकित्सकों को सीनेट में मौजूदा विधेयक के पारित होने पर आशाएं टिकी हैं। प्रशासन की कठिनाई यह है कि अमेरिकी चिकित्सक गांवों में जाना नहीं चाहते और देश के सभी 50 राज्यों में संघीय हेल्थ केयर को चलाना है, तो इस कार्यक्रम को कोई न कोई रूप देना ही होगा। यूं इस कार्यक्रम को स्थाई रूप दिए जाने के लिए सन 2013 से बराबर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई स्थाई समाधान हाथ नहीं लगा है। 
 
डाक्टर रणजीत अग्रवाल कहते हैं, ‘एक वक़्त था, जब सत्तर के दशक में भारतीय चिकित्सकों को तत्काल ग्रीन कार्ड मिल जाता था। अब ग्रीन कार्ड की संभावनाएं कदाचित क्षीण हो गई हैं। आज अमेरिका के स्थाई निवासी बनने अर्थात ग्रीन कार्ड के लिए इंटरनेशनल मेडिकल ग्रेजुएट के सम्मुख दो विकल्प हैं। एक, सात वर्षों की अवधि समाप्त होने के बाद स्वदेश लौट जाएं और वहां दो साल रहने के बाद फिर एच-1बी के लिए आवेदन करें। दूसरे विकल्प में चिकित्सक स्वदेश लौटने की बजाए कनकार्ड स्टेट-30 वेवर्स ले सकते हैं। इस प्रोग्राम के तहत चिकित्सक की स्पाउस को भी काम करने का अधिकार मिला है।’  
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