Ad
जरा हटके
बांसवाड़ा में दिखी दुर्लभ क्लेमोरस रीड वार्बलर चिड़िया
By Swadesh | Publish Date: 12/2/2019 11:26:16 AM
बांसवाड़ा में दिखी दुर्लभ क्लेमोरस रीड वार्बलर चिड़िया

उदयपुर। पक्षी प्रेमियों ने उदयपुर संभाग के बांसवाड़ा में एक दुर्लभ चिड़िया को खोज निकाला है। इस दुर्लभ चिड़िया क्लेमोरस रीड वार्बलर को उदयपुर के पक्षी विशेषज्ञ डॉ. विजय कोली व रिसर्च स्कॉलर उत्कर्ष प्रजापति के नेतृत्व में पहुंचे दल ने खोजा है। इस चिड़िया को कूपड़ा तालाब में देखा गया। यह स्वभाव से शर्मीली होती है। 

 
गौरतलब है कि जिले की समृद्ध नैसर्गिक संपदा से जन-जन को रूबरू करवाने के उद्देश्य से जिला पर्यटन उन्नयन समिति एवं परिंदों व पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत वागड़ नेचर क्लब के तत्वधान में हो रहे 'एक्सप्लोरिंग बर्ड्स इन बांसवाड़ा’ कार्यक्रम के तहत पक्षी प्रेमी बांसवाड़ा में एकत्र हैं। 
 
मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के प्राणिशास्त्र विभाग के सहायक आचार्य और बर्ड एक्सपर्ट डॉ. विजय कोली व रिसर्च स्कॉलर उत्कर्ष प्रजापति के नेतृत्व में पहुंचे दल को जनसंपर्क उपनिदेशक व वागड़ नेचर क्लब के कमलेश शर्मा ने कूपड़ा तालाब पर बर्डवॉचिंग करवाई। दल सदस्यों ने यहां पर दुर्लभ प्रजाति की क्लेमोरस रीड वार्बलर को देखा तथा इसकी यहां पर उपस्थिति पर उत्साहित हुए। डॉ. कोली ने बताया कि तेज आवाज में चिल्लाने वाली इस छोटी चिड़िया का आकार मात्र 18 से 20 सेमी होता है। उन्होंने बताया कि यह विशेष प्रकार की लंबी घास व झाड़ियों के बीच में ही रहती है। 
 
इस दौरान दल उत्कर्ष प्रजापति ने यहां पर प्रवासी पक्षी कॉमन, टफटेड पोचार्ड, पिनटेल, नॉदर्न शॉवलर, यूरेशियन राईनेक, ग्रे हेडेड कैनेरी फ्लाईकैचर को देखकर खुशी जताई। तालाब पर बड़ी संख्या में कॉमन कूट्स, पॉट बिल डक्स, ग्रीब्स, विसलिंग टील, ग्रे हेडेड स्वॉम्पहेन, परपल हेरोन, इण्डियन रोलर, कॉमन क्रेस्टल, टैगा फ्लाईकैचर, ग्रे हॉर्नबिल, कॉपरस्मीथ बारबेट, ओरियेन्टल मेकपाई रॉबिन, सिल्वर बिल, व्हाईट ब्रेस्टेड किंगफिशर और अन्य 50 से अधिक प्रजातियों के स्थानीय पक्षियों को देखा और इनके बारे में जानकारियां संकलित की। 
 
इस दौरान बर्ड एक्सपर्ट डॉ. कोली ने कूपड़ा तालाब की समृद्ध जैैव विविधता की सराहना की और कहा कि यहां पर एक साथ इतनी बड़ी संख्या में स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की उपस्थिति खुशी का विषय है। जनसंपर्क उपनिदेशक शर्मा ने डॉ. कोली व अन्य सदस्यों को इस तालाब पर पिछले दो वर्षों से लगातार आयोजित किए जा रहे बर्डफेस्टिवल के बारे में भी बताया तो उन्होंने कहा कि तालाब प्रदूषणमुक्त है और इसी कारण से यहां पर पक्षियों की उपस्थिति है, इसे संरक्षित रखा जाए और इसमें मानवीय दखल को रोका जाए। 
COPYRIGHT @ 2018 SWADESH. ALL RIGHT RESERVED.DESIGN & DEVELOPED BY: 4C PLUS