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परम्पराः होली में सैकड़ों सालों से पढ़ा जाता है हिन्दू पंचांग
By Swadesh | Publish Date: 18/3/2019 11:53:22 AM
परम्पराः होली में सैकड़ों सालों से पढ़ा जाता है हिन्दू पंचांग

-रामजानकी मंदिर के बाहर गांव के सभी लोगों के बीच ग्रामीणों को सुनाया जाता है हिन्दू पंचांग

-सैकड़ों साल पुरानी परम्परा से क्षेत्र में मजबूत है सामाजिक एकता
हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में ग्राम कुण्डौरा में एक दिन सिर्फ महिलाओं द्वारा होली खेलने की परम्परा तो कायम है ही इसके साथ-साथ इस गांव में होली के अगले दिन धार्मिक स्थल में भारी जन समूह के बीच हिन्दू कलेण्डर (पंचांग) पढ़कर सुनाने की भी परंपरा सैकड़ों वर्षों से कायम है।
 
जिले के सुमेरपुर क्षेत्र कुण्डौरा निवासी रमेश कुमार वर्मा के अनुसार अतीत में यह परम्परा इसलिए डाली गयी थी ताकि गांव के लोग त्योहार, मौसम, लग्न, बाजार का रुख, वार्षिक राशिफल, भविष्य का फल सामूहिक रूप से जान सकें। इसीलिए सैकड़ों वर्ष पुरानी परम्परा आज भी कायम है। होलिका जलने के बाद परेवा को जब गांव में पुरुष वर्ग द्वारा होली मिलन समारोह आयोजित होता है तो गांव के रामजानकी मंदिर में कुण्डौरा व दरियापुर के लोग एकत्र होते हैं। फाग गायन करने वाले गायक व वादक पहले बड़े चाव से ईसुरी कवि की फागें (होली गीत) गाते हैं। इसी बीच गांव के ब्राह्मण या मंदिर के पुजारी हिन्दू पंचांग पढ़कर सुनाते हैं कि इस वर्ष कौन त्योहार कब मनाया जायेगा। किस राशि वाले का राशिफल कैसा रहेगा। वर्ष भर बाजार का रुख मंदा रहेगा या तेज रहेगा। वर्ष में प्रकृति का रुख कैसा होगा। राजनीति कैसी रहेगी आदि तमाम बातों की जानकारी पंचांग के आधार पर दी जाती है। 
 
गांव के लालता प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि अभी तक पंचांग पढ़कर सुनाने का काम गांव के सुन्दरलाल द्विवेदी करते चले आये हैं। अब जब वह इस संसार में नहीं है तो उनका स्थान रामकिशोर शास्त्री ने ले लिया है। अब वहीं पंचांग की सम्पूर्ण जानकारी उनके द्वारा दी जा रही है। हालांकि अब जमाना बदल गया है। इंटरनेट का जमाना आ चुका है। न्यूज चैनल, आकाशवाणी, प्रिंट मीडिया के माध्यम से हर तरह की जानकारी लोगों को मिल जाती है। नेट के माध्यम से कोई जानकारी ऐसी नहीं जो हासिल न हो सके। किन्तु परम्पराओं के प्रति यहां के जन मानस की इतनी अगाध आस्था है कि उसे जोड़े रखने में लोग आत्म संतोष भी महसूस करते है। इसलिए यह परम्परा वहां कायम है। 
गांव के प्रधान अवधेश यादव कहते हैं कि पंचांग पढ़ने की परम्परा से गांव के लोगों में एकता-प्रेम का भाव उत्पन्न होता है। कहीं-कहीं त्योहार दो-दो दिन मनाये जाते हैं। किन्तु जब समस्त ग्रामवासियों के बीच कौन त्योहार कब मनाया जायेगा। किस राशि वाले का राशिफल कैसा रहेगा। वर्ष भर बाजार का रुख मंदा रहेगा या तेज रहेगा। वर्ष में प्रकृति का रुख कैसा होगा। राजनीति कैसी रहेगी आदि तमाम बातों की जानकारी पंचांग के आधार पर दी जाती है। 
 
कुंडौरा गांव के भइयालाल कुशवाहा ने बताया कि होली पर्व पर पंचांग पढ़ने की परम्परा सैकड़ों साल पुरानी है। गांव के लोग प्रसिद्ध रामजानकी मंदिर में एकत्र होते है फिर वहीं पंचांग पढ़ा जाता है। इससे सुनने के लिये पूरे गांव के लोग एकत्र होते है। गांव की बुजुर्ग महिला देवरती ने बताया कि होली त्योहार पर यहीं ऐसा गांव है जहां पंचांग पढ़ने के बाद होली का रंग चढ़ता है।
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