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होली के दिन डलमऊ के लोग मनाते हैं शोक
By Swadesh | Publish Date: 20/3/2019 12:04:54 PM
होली के दिन डलमऊ के लोग मनाते हैं शोक

रायबरेली। होली उल्लास और खुशी का पर्व है और जब इस दिन सभी रंग में सराबोर होकर जश्न मनाते हैं तो जनपद में हजारों लोग ऐसे भी होते हैं जो इस दिन गमगीन रहते हैं। उनके लिए ये तीन दिन बेहद शोक के होते हैं। सदियों से चली आ रही इस परम्परा के पीछे कई ऐतिहासिक तथ्य और मान्यताएं हैं, जिनका लोग अभी भी पालन कर रहे हैं। 

 
रायबरेली जिले के दक्षिणी क्षोर में बसा ऐतिहासिक कस्बा डलमऊ और उसके आसपास के करीब 70 गांवों के पचास हजार लोग होली के पर्व पर जश्न की बजाय शोक मनाते हैं। पंद्रहवीं शताब्दी में रायबरेली में भर राजाओं का शासन था। राजा डल इसी भर राजाओं में एक वीर और प्रतापी राजा थे। ब्रिटिश गजेटियर के अनुसार 1402 ई. और 1421ई. के बीच उनका शासन था जिसका प्रभाव न केवल रायबरेली बल्कि आसपास के जिलों में व्यापक था।
 
जौनपुर के शर्की वंश के इब्राहिम शर्की की कुटिल दृष्टि इस राज्य पर थी। इतिहासकारों के मुताबिक इब्राहिम शर्की ने डलमऊ के राजा डल को अपने अधीन करने का कई बार असफल प्रयास किया। सीधे लड़ाई में असफल होने पर इब्राहिम शर्की ने एक कुटिल चाल चली और होली के दिन राजा पर आक्रमण करने की रणनीति बनाई। होली पर जब राजा डल अपनी प्रजा के साथ जश्न मना रहे थे तभी गंगा के रास्ते शर्की के सिपाहियों ने आकर आम लोगों के बीच घुसकर चुपके से राजा की हत्या कर दी। होली में राजा के सभी सेना और सिपाही जश्न मना रहा थे, जिससे वह प्रबल विरोध नहीं कर सके। 
 
राजा डल की हत्या के बाद इब्राहिम शर्की के सिपाहियों ने जमकर तांडव और मारकाट की। इतिहासकार डॉ. शैलेंद्र सिंह के अनुसार राजा डल का व्यापक प्रभाव क्षेत्र था और होली को भर राजा पूरे उत्साह से मनाते थे और होली के दिन सिपाही और सैनिक सभी निहत्थे होकर जश्न मनाते थे। इसीलिए रणनीतिक तौर पर इस दिन को हमले के लिए चुना। अपने प्रिय राजा की हत्या के बाद दुःखी जनता इस घटना के बाद इतना आहत हुई कि उसने होली मनाना ही छोड़ दिया। ये सिलसिला अनवरत आज भी जारी है। करीब छह सौ साल बाद भी इस क्षेत्र में आज भी होली नहीं मनाई जाती और पूरा डलमऊ क्षेत्र शोक में डूब जाता है।
 
होली के अवसर पर इस क्षेत्र के 70 गांवों के करीब पचास हजार लोग जश्न न मना कर शोक मनाते हैं। तीन दिन तक यह शोक रहता है और लोग अपने राजा को याद करते हैं। शोक के अवसर पर अभी भी लोग महत्वपूर्ण कार्य आदि नहीं करते। तीन दिन के शोक के बाद इस क्षेत्र के लोग होली का उत्सव मनाते हैं और अपनी खुशी का इजहार करते हैं।
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