मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर विस में हंगामा, नहीं हो सका प्रश्नकाल
By Swadesh | Publish Date: 17/7/2019 4:57:28 PM
मध्य प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर विस में हंगामा, नहीं हो सका प्रश्नकाल

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को सदन में प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर जमकर हंगामा हुआ। पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के बीच दो बार सदन की कार्यवाही स्थगित की गई और प्रश्नकाल नहीं हो पाया। राजधानी भोपाल में पौने चार के बच्चे को अगवा कर मौत के घाट उतारने के साथ ही अन्य हत्या और नाबालिग बच्चियों से दुष्कर्म के मामले में विपक्ष ने सदन में स्थगन प्रस्ताव रखने की मांग की, जिस पर सत्तापक्ष ने भी विपक्ष को ही कठघरे में खड़ा करने का प्रयास किया। इसके चलते प्रश्नकाल हंगामे की भेंट चढ़ गया। 

 
मध्यप्रदेश की 15वीं विधानसभा के मानसून सत्र में चार दिन के अवकाश के बाद बुधवार को प्रश्नकाल शुरू होने से पूर्व ही पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने सदन विपक्ष ने प्रदेश की कानून व्यवस्था और राजधानी में पौने चार वर्ष के मासूम के अपहरण के बाद हत्या समेत अन्य अपराधों का मामला उठाते हुए स्थगन प्रस्ताव देने की बात कही। ठाया। भार्गव ने कहा कि बेटियों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं हो रही हैं। मासूमों का अपहरण हो रहा है। कैसे चुप बैठ जाएं। शिवराज ने कहा कि खराब कानून-व्यवस्था के लिए पुलिस नहीं सरकार दोषी है, क्योंकि पैसे लेकर पोस्टिंग हो रही है। विधायक नरोत्तम मिश्रा, यशपाल सिसोदिया ने भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। सत्ता पक्ष की ओर से संसदीय कार्यमंत्री डॉ गोविंद सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि जिन लोगों का मुंह बंद था, वे आज चिल्ला रहे हैं। मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, जीतू पटवारी, प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि अपने दिन याद करो। इसी बात को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ, जिसके चलते विधानसभा अध्यक्ष ने पांच मिनट के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। 
 
पांच मिनट बाद दोबारा सदन की कार्यवाही शुरू हुई, लेकिन विपक्ष कानून व्यवस्था को लेकर स्थगन प्रस्ताव देने की मांग पर अड़ा रहा और प्रश्नकाल नहीं चलने दिया। सत्तापक्ष की ओर से भी मंत्रियों ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। मंत्रियों का कहना था कि पूर्ववती भाजपा के शासन में प्रदेश अपराधों का गढ़ बन गया था, जबकि विपक्ष वर्तमान में हो रहे अपराधों को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा था। विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने बार-बार अनुरोध किया कि प्रश्नकाल चलने दीजिए। इस मुद्दे पर विपक्ष मेरे कक्ष में आकर चर्चा कर सकता है, लेकिन सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच नोकझोंक जारी रही। विपक्ष कानून व्यवस्था को लेकर स्थगन प्रस्ताव की मांग पर अड़ा रहा। स्पीकर ने कहा कि बजट के दौरान स्थगन प्रस्ताव आमतौर पर नहीं लिया जाता, लेकिन इस पर वे स्वयं फैसला लेंगे। इसी बीच विपक्ष के विधायक नारेबाजी करते हुए गर्भगृह तक पहुंच गए और सरकार पर तानाशाही के आरोप लगाए। हंगामा बढ़ता देख विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी। 
 
सदन की कार्यवाही पुन: शुरू हुई और विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने शून्यकाल की सूचनाएं पढ़ने के लिए कहा तो विपक्ष ने फिर कानून व्यवस्था को लेकर स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की मांग की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कहा कि बजट सत्र में स्थगन प्रस्ताव की कोई परंपरा नहीं है। इसलिए इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं कराई जा सकती है। उन्होंने पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान को सदन में अपनी बात रखने को कहा। जब शिवराज अपनी बात सदन में रख रहे थे तो सत्तापक्ष के मंत्रियों और विधायकों ने उन्हें बोलने तक नहीं दिया। इस पर विपक्ष ने सत्तापक्ष पर तानाशाही का आरोप लगाया। इस पर विपक्षी सदस्य हंगामा कहते हुए बीच लॉबी में पहुंच गए। विपक्षी विधायकों ने सदन में लोकतंत्र में तानाशाही नहीं चलेगी के नारे लगाए और सदन से वॉकआउट कर दिया।
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