ब्रेकिंग न्यूज़
मध्य प्रदेश
बाढ़ प्रभावितों के लिए मध्य प्रदेश ने केंद्र से फिर मांगे 30 हजार करोड़
By Swadesh | Publish Date: 19/9/2019 1:28:19 PM
बाढ़ प्रभावितों के लिए मध्य प्रदेश ने केंद्र से फिर मांगे 30 हजार करोड़

भोपाल। मध्यप्रदेश में बाढ़ प्रभावितों को लेकर जमकर राजनीति हो रही है। भाजपा जहां राज्य सरकार पर बाढ़ प्रभावितों को राहत देने में आनाकनी करने का आरोप लगा रही है वहीं कमलनाथ सरकार केंद्र पर ठीकरा फोड़ रही है। मंत्री आरोप लगा रहे हैं कि केंद्र सरकार ने राज्य को मिलने वाले फंड में कटौती कर दी है और पैसे जारी नहीं किए जा रहे हैं। अब राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावितों को राहत पहुंचाने के लिए केंद्र से 30 हजार करोड़ रुपये शीघ्र जारी करने की मांग की है।
 
प्रदेश के जनसम्पर्क मंत्री पीसी शर्मा ने कहा है कि राज्य सरकार राहत एवं बचाव कार्यों पर अब तक 325 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। राहत और बचाव कार्य निरंतर जारी है। प्रदेश के प्रशासनिक अमले और आपदा प्रबंधन एजेन्सियों ने अति वर्षा और बाढ़ की स्थिति में लोगों की सुरक्षा के लिये पूरी मुस्तैदी से काम किया है और कर रहे हैं। गांधी सागर बांध से भी न्यूनतम समय में संबंधित शासकीय अमले और एजेन्सियों ने बांध से पानी निकालने का काम किया। प्रदेश सरकार का पूरा ध्यान प्रदेश के बाढ़ प्रभावितों की सुरक्षा और उन्हें राहत देने पर केन्द्रित है।
 
उन्होंने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रदेश सरकार केन्द्र सरकार से अति वर्षा और बाढ़ की स्थिति से हुए नुकसान और प्रभावितों को राहत पहुंचाने के लिये अधिकतम सहायता का आग्रह किया है। आपदा की इस घड़ी में प्रदेश से निर्वाचित केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिख रहे हैं, जबकि उन्हें प्रधानमंत्री को अधिकतम सहायता देने के लिये पत्र लिखना चाहिए। शर्मा ने मांग की है कि प्रदेश में अति वर्षा और बाढ़ से हुई जन, पशु, फसल और भौतिक अधोसंरचनाओं को भारी पैमाने पर हुई क्षति पर 11 हजार 881 करोड़ की सहायता तत्काल मुहैया कराना चाहिए। इसके अतिरिक्त प्रदेश के रोके गये 10 हजार करोड़ और गुजरात से बकाया 10 हजार करोड़ रुपये भी केन्द्र सरकार जारी करे।
 
इन जिलों में हुई भारी बारिश
प्रदेश के राजगढ़, रायसेन, विदिशा, खण्डवा, रतलाम, हरदा, मंडला, बालाघाट, सिवनी, सागर, मंदसौर, उज्जैन, आगर, नीमच, भोपाल, शाजापुर, नरसिंहपुर, देवास, मुरैना, श्योपुर, भिण्ड, निवाड़ी, सीहोर और अशोकनगर में अतिवर्षा से गंभीर स्थिति पैदा हुई है। इन जिलों में अति वर्षा से विभिन्न बांधों/जलाशयों से पानी की निकासी अथवा नदियों के बैकवाटर से ज्यादा पानी के प्रवाह से स्थिति गंभीर हुई है। अकेले मंदसौर जिले में गांधी सागर बांध में 16 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह हुआ, जबकि बांध का अधिकतम जल निकासी स्तर (आउट फ्लो) 6.6 लाख क्यूसेक पानी है। इस स्थिति के उत्पन्न होने से बांध के सभी 19 गेट खोले गये हैं। इसके अलावा इंदौर संभाग के बड़वानी, धार और अलीराजपुर जिले सरदार सरोवर परियोजना के अप्रत्याशित बढ़े हुए जल-स्तर से प्रभावित हुए हैं।
 
17 बांधों के गेट अब भी खुले हैं
प्रदेश के 28 बड़े बांधों में से 17 बांधों के गेट वर्तमान में खुले हुए हैं। प्रदेश के अधिकांश जलाशय अपनी जल संग्रहण क्षमता से सौ फीसदी जल के साथ पूर्ण जलाशय स्तर (एफआरएल) पर है। प्रदेश की अधिकांश नदियाँ पिछले दिनों से खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और अभी भी खतरे के निशान से ऊपर ही बह रही है। प्रदेश में आने वाले समय में अब अधिक वर्षा की स्थिति नहीं बन रही है। प्रदेश के कुल 52 जिलों में से 36 अति वर्षा से प्रभावित हुए हैं। प्रदेश के 52 हजार गाँवों में से लगभग 8000 गांव अति वर्षा से प्रभावित हुए हैं।
 
जायजा लेने भोपाल पहुंचे दो केन्द्रीय दल
प्रदेश में अति वृष्टि एवं बाढ़ से हुई क्षति का अवलोकन करने के लिये केन्द्रीय अंतर मंत्रालयीन के दो दल दो दिवसीय दौरे पर गुरुवार को भोपाल पहुंच चुके हैं। यह दल शुक्रवार शाम तक प्रदेश में अतिवृष्टि और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगा। 
COPYRIGHT @ 2018 SWADESH. ALL RIGHT RESERVED.DESIGN & DEVELOPED BY: 4C PLUS