मध्य प्रदेश
विदिशा में हमेशा रहेगी सुषमा दीदी की उपस्थिति
By Swadesh | Publish Date: 7/8/2019 5:23:21 PM
विदिशा में हमेशा रहेगी सुषमा दीदी की उपस्थिति

विदिशा/भोपाल। भाजपा की मुखर, प्रखर वक्ता कुशल प्रशासन और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का मध्यप्रदेश से गहरा नाता रहा है। सहृदय और मिलनसार सुषमा के निधन की खबर से प्रदेश के भाजपा कार्यकर्ता और पदाधिकारी वैसा ही महसूस कर रहे हैं, जैसे किसी ने अपने परिजन को खो दिया हो। वैसे तो सुषमा स्वराज का आना-जाना इंदौर और भोपाल भी लगा रहता था, लेकिन विदिशा से उनका खास संबंध था, जहां से वे दो बार सांसद रहीं। एक सांसद के रूप में सुषमा ने विदिशा को जो सौगातें दी थीं, वे हमेशा विदिशा में उनकी उपस्थिति का अहसास कराती रहेंगी। विदिशा के लोग इसे कभी नहीं भुला पाएंगे।

बड़ी बहन सा स्नेह करती थीं सुषमा दीदी
विदिशा के जिला भाजपा अध्यक्ष राकेश जादौन बताते हैं कि सुषमा दीदी इतनी बड़ी नेता थीं। देश की विदेश मंत्री थीं, लेकिन जब वे विदिशा आती थीं तो हर कार्यकर्ता से उनका व्यवहार बड़ी बहन जैसा ही स्नेहिल होता था। जादौन याद करते हुए बताते हैं कि उस समय मैं जिला अध्यक्ष नहीं था। गंजबासौदा के पास एक गांव में कोई कार्यक्रम था। सुषमा दीदी समेत कई बड़े नेता आए थे। मैं कार्यक्रम स्थल के बाहर खड़ा था। सुषमा दीदी जब जाने लगीं तो उनकी नजर मेरे ऊपर पड़ी। उन्होंने गाड़ी रुकवाई और मुझसे पूछा यहां क्यों खड़े हो? फिर दीदी ने मुझे बुलाया और साथ चलने को कहा। वो मुझे अपने साथ अगले गांव तक लेकर गईं और पूरे रास्ते में वैसी ही आत्मीयता से बात करती रहीं, जैसे अपने परिवार का कोई व्यक्ति करता है। 
 
ओवरब्रिज, सड़कें, कारखाना सब कुछ दिया
जिला भाजपा अध्यक्ष जादौन बताते हैं कि सुषमा दीदी ने एक सांसद के रूप में अपने दो बार के कार्यकाल में विदिशा को काफी कुछ दिया। उन्होंने विदिशा में कई ट्रेनों के स्टापेज कराए, रेल कलपुर्जों का कारखाना स्थापित कराया, ओवरब्रिज बनवाया। जिले की विदिशा-गुलाबगंज एवं गंज बासौदा-ग्यारसपुर सड़कें उन्हीं की सौगात हैं। वे कहते हैं कि सुषमा दी के प्रयासों से ही विदिशा को मेडिकल कॉलेज की सौगात भी मिली। उन्होंने कहा कि अब दीदी नहीं हैं, लेकिन उनके किए गए काम विदिशा के लोगों को हमेशा उनकी उपस्थिति का अहसास कराते रहेंगे। 
नमकीन, चटपटा खाने की शौकीन थीं दीदी
पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज का राजनीतिक सफर काफी व्यस्तता भरा रहा, लेकिन उन्होंने इससे अपने जीवन को कभी बोझिल नहीं होने दिया। जब भी अवसर मिलता वे अपने जीवन को उसी हल्के-फुल्के अंदाज में जीती थीं, जैसे एक आम आदमी जीता है। प्रदेश भाजपा कार्यालय की व्यवस्थाएं देखने वाले पुराने कर्मचारी रामोजी बताते हैं कि मैं  1997 में आडवाणी द्वारा निकाली गई रथ यात्रा में भोपाल से राजकोट तक उनके साथ गया था। सुषमा दीदी भी साथ में थीं। लेकिन सुषमा दीदी ने कभी यात्रा के तनाव को हावी नहीं होने दिया। वे हंसी-ठिठोली करती रहती थीं। रामोजी बताते हैं कि सुषमा दीदी खाने की शौकीन थीं और नमकीन तथा चटपटी चीजें उन्हें काफी पसंद थीं। यात्रा के दौरान भी जब अवसर मिलता, दीदी उनका लुत्फ उठा ही लेती थीं।  
COPYRIGHT @ 2018 SWADESH. ALL RIGHT RESERVED.DESIGN & DEVELOPED BY: 4C PLUS