मध्य प्रदेश
भोपाल के एम्स और बीएमएचआरसी पर होगी कार्रवाई
By Swadesh | Publish Date: 1/11/2019 11:06:39 PM
भोपाल के एम्स और बीएमएचआरसी पर होगी कार्रवाई

भोपाल। नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के सीईओ इंदु भूषण ने कहा है कि केन्द्र सरकार के एम्स भोपाल और बीएमएमएचआरसी अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इन दोनों अस्पतालों में आयुष्मान योजना को बेहतर तरीके से नहीं चलाया जा रहा। ऐसे मे इन दोनों अस्पतालों को सबक मिलना चाहिए। उन्होंने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्धन को फोन कर एम्स में आयुष्मान का सही क्रियान्वयन न किये जाने के मामले में कार्रवाई करने के संबंध में बात की। साथ ही डीएचआर के निदेशक डा. बलराम भार्गव से चर्चा कर भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर पर कार्रवाई करने की बात की।
राजधानी भोपाल के मिंटो हॉल में स्वास्थ्य के अधिकार पर दो दिवसीय कार्यक्रम में वह बोल रहे थे। प्रदेश के नागरिकों को स्वास्थ्य की गारंटी देने वाले राइट टू हेल्थ कॉन्क्लेव का उद्घाटन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने किया। इस कानून के तहत प्रदेश के 1 करोड़ 88 लाख परिवारों को स्वास्थ्य का अधिकार मिल सकेगा। स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रहे देश- विदेश के गैर सरकारी संगठनों और समाजसेवियों की मौजूदगी में तीन कार्यक्रमों का शुभारंभ करते हुए पुस्तिका विमाचन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ऐतिहासिक दिन है। मप्र का 64वां स्थापना दिवस है हम स्वास्थ्य के अधिकार कानून को आगामी विधानसभा सत्र के पटल पर रखकर पारित करेंगे। आज से दस साल बाद मप्र स्वास्थ्य सूचकांक में सबसे अग्रणी राज्य होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश पहला राज्य होगा जहां ये अधिकार दिया जायेगा। राइट टू हेल्थ जनता के लिए बुनियादी अधिकार है। जब हम हेल्थ की बात करते है। तब हम सुविधाओं की बात करते हैं। ह्यूमन रिसोर्स और सुविधाओं की बात करते हैं। हमारे पास सारी सुविधायें हैं। कई योजनायें चल रहीं हैं लेकिन डिलीवरी सिस्टम ठीक न होने के चलते योजना असफल साबित हो रही है। मैं पीपीपी मोड के सही मॉडल पर काम करने के तरीके को पसंद करता है। भारत के एक बहुत बड़ा देश है। हर 50 किलोमीटर पर प्राइमरी हेल्थ सेंटर है। लेकिन कितने प्राइमरी हेल्थ सेंटर काम कर रहे हैं।
डॉक्टरों को समझना होगा कि वे समाज सेवा कर रहे हैं।
इस मौके पर योजना आयोग के पूर्व सदस्य अर्थशास्त्री हर्ष मंदर ने कहा ये बहुत अच्छी पहल है कि स्वास्थ्य के अधिकार की चर्चा शुरू हुई है। भारत में पैसों की कमी नहीं हैं। देश के 9 उद्योगपतियों की आमदनी जिनी बढी उतना सरकार का साल भर का बजट है। भूख और इलाज से लोगों को जूझना पड़ रहा है। देश में भरपूर साधन होने के बावजूद गरीबों की जिंदगी में बदलाव नहीं आ पा रहा है।

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