मध्य प्रदेश
कटनी: टूटे ट्रैक से गुजरी शटल एक्सप्रेस, चालक की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा
By Swadesh | Publish Date: 5/11/2019 3:22:08 PM
कटनी: टूटे ट्रैक से गुजरी शटल एक्सप्रेस, चालक की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा

कटनी। कटनी-जबलपुर रेल खंड पर स्थित कटनी साउथ स्टेशन के पहले मंगलवार को सुबह एक बड़ा ट्रेन हादसा होने से टल गया। जबलपुर-रीवा शटल टूटे ट्रैक से गुजर गई, लेकिन चालक की सूझ-बूझ से वह दुर्घटनाग्रस्त होते-होते बच गई। बताया जा रहा है कि गाड़ी संख्या 51701 जबलपुर-रीवा शटल पैसेंजर मंगलवार को सुबह लगभग 9.20 बजे निवार से रवाना हुई थी। कटनी साउथ स्टेशन पर पहुंचने से पहले ट्रेन को अचानक झटके लगे तो चालक ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को वहीं रोक दिया। इस दौरान यात्री घबराकर ट्रेन से नीचे उतर गए और देखा तो ट्रैक टूटा हुआ था। ट्रेन के चालक-परिचालक ने तत्काल इंजीनियर विभाग को सूचना दी।

जानकारी के मुताबिक गाड़ी संख्या 51701 जबलपुर-रीवा शटल सुबह जबलपुर से रीवा के लिए रवाना हुई थी। इस ट्रेन के चालक (लोको पायलट) सुशील चौधरी व एएलएपी कृष्णराज शुक्ला की ड्यूटी थी। बताया गया है कि जब ट्रेन निवार व कटनी साउथ स्टेशनों के बीच किलोमीटर 1073/2-3 पर सुबह करीब 9.30 बजे पहुंची तो वहां पर ट्रैक टूटा था और टूटे ट्रैक से ट्रेन गुजरी तो चालक दल को कुछ संशय हुआ और उन्होंने तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगाकर गाड़ी को रोका और एएलपी द्वारा पीछे जाकर जांच की तो रेल पटरी टूटी हुई मली। टूटे ट्रैक से चार कोच निकल चुके थे, जबकि पांचवां कोच टूटी पटरियों के ऊपर खड़ा था।

कटनी साउथ स्टेशन के स्टेशन मास्टर संजय दुबे ने बताया कि जबलपुर-रीवा शटल मंगलवार को सुबह टूटे ट्रैक से गुजरी तो ट्रेन झटके खाने लगी। ट्रेन की स्पीड कम थी, इसलिए बड़ा हादसा होने से टल गया। चालक ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक दिया और इंजीनियर विभाग को सूचना दी गई। ट्रैक टूटा होने के कारण ट्रेन लगभग एक घंटे तक सेक्शन में खड़ी रही। सूचना मिलने पर रेलवे के इंजीनियर मौके पर पहुंचे और सुधार कार्य किया।

इसके बाद ट्रेन का सावधानीपूर्वक ट्रेक से आगे निकालकर रीवा की ओर रवाना किया गया। इस हादसे में किसी यात्री को चोट नहीं आई है। चालक की सूझबूझ से बड़ा हादसा होने से टल गया। हालांकि, ट्रेन के झटके खाने से यात्री घबरा गए थे और उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। यदि ट्रेन के चालक दल द्वारा तत्काल ही अपनी सूझबूझ व सतर्कता का परिचय देकर ट्रेन को नहीं रोका जाता तो संभव था कि पीछे की कुछ बोगियां इन टूटी पटरियों से नीचे उतर सकती थीं और बड़ा हादसा होने की संभावना थी।

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