मध्य प्रदेश
बीजेपी हाईकमान ने पूर्व सीएम शिवराज सिंह को दिल्ली तलब किया? जानें क्यों
By Swadesh | Publish Date: 5/11/2019 6:40:53 PM
बीजेपी हाईकमान ने पूर्व सीएम शिवराज सिंह को दिल्ली तलब किया? जानें क्यों

भोपाल. झाबुआ उपचुनाव में हार के बाद पवई से भाजपा विधायक प्रह्लाद सिंह लोधी की सदस्यता खत्म होने के बाद प्रदेश भाजपा में सियासी घमासान मचा हुआ है। हलचल दिल्ली तक पहुंच गई है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को हाईकमान ने दिल्ली बुलाया है। मंगलवार को भाजपा के दस विधायक भोपाल पहुंचे और नरोत्तम मिश्रा के आवास पर बैठक हुई। इसके बाद विधायकों का प्रतिनिधि मंडल राज्यपाल लालजी टंडन से मिलने राजभवन पहुंचे। दल में वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा और सीतासरण शर्मा भी शामिल थे। ये सभी प्रह्लाद लोधी की सदस्यता खत्म का विरोध जताने गए थे।
सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन
इधर पवई विधायक लोधी की सदस्यता खत्म होने का गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। कहा जा रहा है कि ये सरगर्मी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के हस्तक्षेप के बाद बढ़ी है।
दोबारा पहुंचे शिकायत लेकर सीतासरण शर्मा
बताया जा रहा है कि भाजपा विधायक बगैर तैयारी के राज्यपाल से मिलने पहुंच गए थे, राज्यपाल लालजी टंडन ने भाजपा विधायकों को एक हफ्ते का समय दिया है। भाजपा विधायकों का दल लिखित ज्ञापन लेकर नहीं पहुंचे। इसलिए राज्यपाल टंडन ने एक हफ्ते का समय देकर फिर से लिखित शिकायत लेकर आने को कहा है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीतासरण शर्मा कहा कि धारा 192 में विधायक को हटाने का अधिकार राज्यपाल को है विधानसभा स्पीकर को नहीं है।
विधि विशेषज्ञों से राय लेगी भाजपा
भाजपा अब राजभवन के विधि विशेषज्ञों के साथ आवेदन तैयार करेगी। हालांकि सीतासरण शर्मा फिर से राज्यपाल से मिलने गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस मसले पर चर्चा के लिए शिवराज सिंह चौहान को दिल्ली तलब किया गया है। जहां उन्होंने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की।
भाजपा के 107 विधायक, वहीं कांग्रेस 115 हुई
मप्र विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस ने 114 सीटें जीतीं, भाजपा ने 109 पर जीत हासिल की। इसके बाद झाबुआ उप चुनाव में भाजपा चुनाव हार गई, उसकी एक सीट कम हो गई और वह 108 पर आ गई। कांग्रेस बढ़कर 115 हो गई। इधर, पवई विधायक प्रह्लाद सिंह लोधी सरकारी कर्मी से मारपीट में दोषी ठहराए जाने के बाद 2 साल की सजा होने पर विधानसभा से उनकी सदस्यता खत्म कर दी गई। इसके बाद भाजपा की सीटें 107 हो गईं। निर्दलीय, बसपा और सपा के साथ मिलकर कांग्रेस मप्र में पूर्व बहुमत में है।


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