मध्य प्रदेश
जलकोटा समेत कई क्षेत्रों में धड़ल्ले से हो रहा अवैध रेत खनन
By Swadesh | Publish Date: 10/4/2019 3:51:12 PM
जलकोटा समेत कई क्षेत्रों में धड़ल्ले से हो रहा अवैध रेत खनन

खरगौन। निमाड़ की जीवनदायनी माँ नर्मदा का आँचल अवैध रेत खनन से तार-तार हो रहा है। रेत माफिया द्वारा नर्मदा किनारे बसे छोटे-छोटे ग्रामों में अवैध रेत खनन किया जा रहा है। ग्राम जलकोटा में भी अवैध रेत खनन का मामला प्रकाश में आया है।

ग्राम जलकोटा में महेश्वर के दर्शनीय स्थल सहस्त्रधारा एवं प्रसिद्ध दत्त मंदिर है, जो कि पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है। जलकोटा महेश्वर से जुड़ा एक छोटा सा ग्राम खराड़ी पंचायत का है, जहां के हल्का न. 21 की सरकारी भूमि पर कब्जा कर अवैध खनन हो रहा है। 
 
खदान ग्राम पंचायत खराड़ी के अधीन है, जिसके एवज में ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा खननकर्ताओं से रॉयल्टी वसूली जा रही है। विडंबना ये है कि अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय उक्त खसरा न. की जिस रेत खदान को ग्राम पंचायत के अधीन किया गया है, उस रेत खदान की रेत पहले ही समाप्त हो चुकी है। परंतु ग्राम जलकोटा में अब भी निरंतर अवैध रेत खनन जारी है। 
 
ग्राम पंचायत के सरपंच का कहना है कि उन्हें खनिज विभाग से 5 खदान आवंटित की गई है जिनका खसरा न. 88, 97, 170, 172 और 176 है। अभी सिर्फ खसरा न. 88 की 5 एकड़ खदान पर ही खनन हो रहा है। बाकी खदान अभी चालू ही नहीं हुये हैं जबकि कई खदानों पर रेत खनन पहले ही समाप्त हो चुकी है | ग्राम जलकोटा महेश्वर से 8 किमी की दूरी पर नर्मदा किनारे बसा गांव है। जलकोटा से सीधे धामनोद बड़वाह राजमार्ग पक्का रास्ता बना हुआ है। रेत माफिया इसी रास्ते का उपयोग बिना महेश्वर पहुचे रेत परिवहन के लिए करते हैं।
 
शासन को लग रही है करोड़ों की चपत
अवैध रेत खनन के कारण शासन को रॉयल्टी के तौर पर मिलने वाली बड़ी राशि की चपत लग रही है। शासन के नियमानुसार 125 रुपये घनमीटर की दर से रॉयल्टी वसूली जाती है, जिसके हिसाब से 1 डम्पर रेत में 14 घनमीटर रेत के हिसाब से 1750 रुपये रॉयल्टी बनती है। प्रतिदिन 20-30 डम्पर एवं ट्राली रेत का अवैध खनन किया जा रहा है। वही रॉयल्टी भी 200 रुपये घन मीटर के हिसाब से वसूली जा रही है। मतलब शासन के नाम पर 75 रुपये प्रति घन मीटर की अवैध रॉयल्टी भी वसूली जा रही है। 
 
एक माह पूर्व ही खनिज विभाग ने की थी बड़ी कार्यवाई 
उल्लेखनीय है कि खनिज विभाग की विशेष टीम ने ग्राम सुलगांव में अवैध खनन पर कार्यवाई की थी। मौके पर एक पोकलेन मशीन का प्रकरण बनाया गया था। सुलगांव में कार्यवाई के बाद से अभी सुलगांव में तो खनन कार्य बन्द है परन्तु सुलगांव से जुड़े डम्पर अब जलकोटा से अपने डम्पर भरकर रेत का परिवहन कर रहे हैं।
 
नर्मदा पट्टी में वर्षों से चल रहा है अवैध खनन
वैसे देखा जाए तो नर्मदा नदी के किनारे रेत के अकूत भंडार है। पर रेत माफियाओ के तिरछी नजरे कई वर्ष पहले ही इस खजाने पर पड़ गयी थी। शासन के नियमानुसार तो रेत का खनन हो रहा है पर अधिकतर जगहों पर नियमो के विपरीत सबसे ज्यादा रेत का खनन हो रहा है। अवैध उत्खनन से पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ रहा है। 

क्या कहते हैं अधिकारी 
एसडीएम आनंद राजावत का कहना है कि मेरी जानकारी में स्वीकृत रकबे पर ही खनन हो रहा है। जो जानकारी उपलब्ध करवाई गयी है, मैं मामले की जांच करवाकर कार्यवाई करवाउंगा।
 
दिलीप जामरा (सरपंच, ग्राम पंचायत जलकोटा) का कहना है कि वर्तमान में खनिज विभाग से पंचायत को 5 खदानें आवंटित हैं | प्रति घन मीटर के हिसाब से रॉयल्टी भी वसूली जा रही है। 
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