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ममता बनर्जी की पार्टी के पूर्व सांसद ने कहा- प्रधानमंत्री का होना चाहिए सम्मान
By Swadesh | Publish Date: 18/5/2019 3:58:41 PM
ममता बनर्जी की पार्टी के पूर्व सांसद ने कहा- प्रधानमंत्री का होना चाहिए सम्मान

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की पूर्व सांसद कृष्णा बोस ने कहा है कि प्रधानमंत्री का सम्मान उनके पद के अनुरूप निश्चित तौर पर किया जाना चाहिए। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परिवार की बहू कृष्णा और उनके बेटे भी सांसद रहे हैं।

वर्तमान राजनीतिक हालात में आए दिन मुख्यमंत्री ममता द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की जा रही उटपटांग बातों के संबंध में प्रतिक्रिया के लिए संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी का नेता नेत्री हो सकता है। उसकी विचारधारा से हम सहमत या असहमत हो सकते हैं लेकिन उसकी संवैधानिक क्षमता और पद का सम्मान मर्यादा अनुरूप किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी को भी यह नहीं भूलना चाहिए कि राज्य सरकारें निर्वाचित होती हैं और उनके पास शक्तिया होती हैं।
 
कृष्णा बोस ने कहा-'मैं भाजपा की विचारधारा से सहमत नहीं हो सकती, लेकिन जब तक नरेंद्र मोदी देश के चुने हुए प्रधानमंत्री हैं, मुझे उनके प्रति सम्मान करना होगा। मैं उन्हें देश के पीएम के रूप में सम्मान करूंगी न कि एक ऐसी पार्टी के प्रमुख के रूप में, जिससे मैं इत्तेफाक नहीं रखती।' चार बार सांसद रह चुकी कृष्णा बोस ने पीएम मोदी द्वारा ममता बनर्जी को 'स्पीड ब्रेकर दीदी' कहे जाने और सीएम ममता बनर्जी द्वारा पीएम को 'एक्सपायरी पीएम' कहे जाने के संदर्भ में कहा कि इस तरह के बयान में प्रतिशोध झलकता है और यह बिल्कुल अनावश्यक है।
 
यह पूछे जाने पर कि भाजपा ममता पर बंगाल में मुसलमानों को खुश करने का आरोप लगाती रही है, बोस ने कहा कि नेताओं को एक निर्वाचित सरकार के प्रमुख को दोषी ठहराने से बचना चाहिए। सभी को यह याद रखना चाहिए कि भारत एक बहुभाषी, बहु-सांस्कृतिक और बहु-धार्मिक देश है और यदि आप उस आदर्श का पालन नहीं करते हैं तो आप वास्तव में भारत पर शासन नहीं कर सकते। 
 
मुस्लिम तुष्टीकरण के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कृष्णा बोस ने कहा कि आजादी के बाद से अल्पसंख्यक समुदाय का विकास नहीं हो पाया है और विकास के नाम पर उन्हें हमेशा ठगा जाता रहा है। इसके लिए केवल ममता बनर्जी या किसी दूसरी पार्टी के नेता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। चुनाव के समय यह मुद्दा होता है और बाद में उसे भूल जाते हैं।
 
पूर्व सांसद बोस ने  ईमानदारी से स्वीकार किया कि पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी काफी मजबूत बन कर उभरी है और इसकी वजह स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी के प्रति एक असंतोष की लहर चल रही है जिसका लाभ भाजपा को मिल रहा है। बंगाल में भाजपा के उत्थान के सवाल पर बोस ने कहा कि इसकी वजह तृणमूल सरकार के साथ राज्य के लोगों में बढ़ता असंतोष है। 
 
बोस ने दावा किया कि ममता ने बंगाल के विकास के लिए कुछ अच्छे काम किए हैं, लेकिन उनके सभी अच्छे कार्यों को उनके आसपास के कुछ लोगों ने बिगाड़ दिया है। बोस ने कहा कि सिंडिकेट को लेकर सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए। माकपा और काग्रेस की ढीली पड़ती पकड़ भी राज्य में भाजपा के तेजी से उत्थान की वजह है लेकिन तृणमूल इसका पुरजोर तरीके से मुकाबला कर रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में सत्तारूढ़ पार्टी की एक विशेष विचारधारा है। वे इसे खुले तौर पर कहते हैं। वे हिंदुत्व चाहते हैं लेकिन बंगाल में उन्हें रोकने के तरीके में भी बदलाव लाना होगा।
 
चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को ममता बनर्जी द्वारा निशाना बनाए जाने के सवाल पर कृष्णा बोस ने कहा कि चुनाव आयोग, सेना अथवा अन्य संवैधानिक संस्थाएं जिसमें न्यायपालिका भी शामिल हैं, इन्हें राजनीति का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। जो लोग भी इसे खींचते हैं वे गलत हैं। उन्होंने बंगाल में प्रत्येक मतदान केंद्र पर केंद्रीय बलों को तैनात करने की आवश्यकता पर भी कृष्णा बोस ने सवाल उठाया। 
 
उन्होंने कहा कि हमें केंद्रीय बलों या पुलिस या राज्य पुलिस की आवश्यकता क्यों है? इसका मतलब है कि हम स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान आयोजित करने में असमर्थ हैं। मैं 1952 से चुनावों को देख रही हूं। पहले ऐसी समस्या नहीं थी। लोकतंत्र में लोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहते हैं लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के लोकतंत्र की खूबी है कि इतने लंबे समय तक हम लोकतांत्रिक परंपरा में रह रहे हैं। इसे बचा कर रखने के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों को संभालने की जिम्मेदारी सभी राजनीतिक पार्टियों की है।
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