Ad
देश
गैंगरेप से कठुआ की हुई थी देशभर में किरकिरी
By Swadesh | Publish Date: 10/6/2019 5:36:30 PM
गैंगरेप से कठुआ की हुई थी देशभर में किरकिरी

- निजी रंजिश के लिए अबोध बच्ची को बनाया था मोहरा

- सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद पठानकोट स्थानांतरित हुआ था केस
चंडीगढ़। जम्मू-कश्मीर के कठुआ में जनवरी 2018 में आठ साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या ने देश को समूचे विश्व में शर्मसार किया था। इस घटना के बाद सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया था, जिससे घाटी के कई इलाकों में भयंकर विवाद गहराने से ध्रुवीकरण की संभावना बन गई थी। 
पुलिस के अनुसार बच्ची का अपहरण और हत्या जम्मू क्षेत्र के रसाना नामक गांव से बकरवाल समुदाय के सदस्यों को बाहर निकालने की साजिश का हिस्सा था। एक पूर्व राजस्व अधिकारी और प्रसिद्ध स्थानीय व्यक्ति सांझी राम ने लडक़ी के अपहरण, बलात्कार और हत्या की साजिश रची। अन्य आरोपी सांझी राम के भतीजे, सांझी राम के बेटे विशाल जंगोत्रा, एक स्नातक छात्र, विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया और सुरेंद्र वर्मा, हेड कांस्टेबल तिलक राज, उप-निरीक्षक आनंद दत्ता, और एक अन्य किशोर (नाबालिग का दोस्त) इसमें शामिल थे। यह मामला 9 अप्रैल, 2018 को सुर्खियों में आया, जब पुलिस ने कठुआ की अदालत में आरोप पत्र दायर किया। पुलिस को आरोपपत्र दाखिल करने से रोकने के लिए, स्थानीय वकीलों ने हंगामा किया। उसके बाद मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप कर इस मुकदमे को पठानकोट में स्थानांतरित करने का आदेश देने के साथ ही प्रत्येक दिनों की कार्रवाई कैमरे के समक्ष करने की बात कही थी। 
 
वरिष्ठ वकील एस एस भासरा और जिला अटॉर्नी जे सी चोपड़ा द्वारा हुए बहस में यह सामने आया कि मामला आरोप पत्र पर आधारित है, जिसमें कहा गया है कि इस मामले में सबसे पहली पूछताछ सांझी राम के भतीजे से हुई जो स्कूल से बाहर हो गया था। वह उस आठ साल की बच्ची से पहली बार पास के जंगल में मिला था। किशोर के अनुसार जिस दिन लडक़ी का अपहरण किया गया था, उसने अपने लापता घोड़ों को खोजने के लिए मदद मांगी थी। उस वक्त उसे जबरन सांझी राम के मवेशी शेड में ले जाया गया और उसके हाथ-पैर बांध दिए गए। 16 जनवरी तक उसे बंदी बनाए रखने के बाद, उसने लडक़ी के साथ बलात्कार करने का प्रयास किया लेकिन जब आठ साल की नाबालिग ने भेद खोलने की बात कही तो उसने उसका गला घोंट दिया और सिर पर पत्थर मार दिया। 
 
पुलिस द्वारा फाइल की गई चार्जशीट के अनुसार अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि सांझी राम ने किशोर को समुदाय से बदला लेने के लिए उकसाया, ताकि पिछली मार का बदला लिया जा सके। इसलिए, 10 जनवरी को जब वे आठ साल की बच्ची को सांझी राम के स्वामित्व वाले ‘देवी-चरण’ मंदिर में ले गए, तो किशोर और एक अन्य दोस्त ने लडक़ी को नशा देकर बेहोश कर दिया। 12 जनवरी को किशोर ने कथित तौर पर अपने दोस्त विशाल जंगोत्रा को मेरठ से अपनी वासना को शांत करने के लिए बुलाया। किशोर और जंगोत्रा ने उसके साथ बलात्कार भी किया। देवी-स्थान पर सांझी राम के निर्देशन में, किशोर, उसका दोस्त और विशाल कथित तौर पर लडक़ी को पुलिया पर ले गए।
 
चार्जशीट में दावा किया गया था कि जब सभी उसे मारने के लिए तैयार थे, तो खजुरिया ने कथित तौर पर बलात्कार करने के उद्देश्य से उन्हें रोक दिया। इसके बाद खजुरिया और फिर किशोर द्वारा लडक़ी के संग फिर से सामूहिक बलात्कार किया गया। इसके बाद एसपीओ ने लडक़ी की गर्दन को अपनी जांघ पर रखा और उसे मारने के लिए जोर लगाना शुरू कर दिया। जब वह उसे मार नहीं सका तो किशोर ने अपने घुटनों के बल उसकी पीठ पर तब तक जोर लगाया जब तक उसकी मौत नहीं हो गई। यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह मर चुकी है, उसके सिर पर पत्थर से हमला किया गया। 
 
साजिश के अनुसार शव को हीरानगर में नहर पर ले जाया जाना था लेकिन जब कार चालक ने अपनी कार लाने से इनकार कर दिया तो उन्होंने शव को पास के जंगल में फेंक दिया। 17 जनवरी को यह शव बरामद किया गया था।
COPYRIGHT @ 2018 SWADESH. ALL RIGHT RESERVED.DESIGN & DEVELOPED BY: 4C PLUS