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बिरला के अध्यक्ष बनने का सभी दलों ने किया स्वागत
By Swadesh | Publish Date: 19/6/2019 2:43:07 PM
बिरला के अध्यक्ष बनने का सभी दलों ने किया स्वागत

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के कोटा से सांसद ओम बिरला को लोकसभा का अध्यक्ष बनाए जाने का सभी पार्टियों ने स्वागत करते हुए बधाई दी। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि उनकी पार्टी सदन में चर्चा, असहमति और निर्णय की नीति पर विश्वास रखती है और चाहती है कि विपक्ष को पूरा मौका मिलना चाहिए।

 
प्रधानमंत्री के बाद बिरला को शुभकामनाए देते हुए चौधरी ने उम्मीद जताई कि वह अध्यक्ष पद पर रहते हुए विपक्ष को पूरा संरक्षण देंगे और उसके द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों को प्राथमिकता में रखेंगे। उन्होंने कहा कि पिछले पांच सालों के दौरान बहुत कम ही विधेयकों को प्रवर समिति में गहन जांच के लिए भेजा गया। वे चाहेंगे कि इस बार ज्यादा से ज्यादा विधेयकों को प्रवर समिति को भेजा जाए ताकि उन पर बेहतर काम हो सके। उन्होंने कहा कि सदन में विधेयक लाने से पूर्व सभी हितधारकों से चर्चा होनी चाहिए।
 
प्रधानमंत्री के वक्तव्य का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र बहुपक्षीय लोकतंत्र है। कांग्रेस पार्टी इस बहुपक्षीय व्यवस्था पर विश्वास रखती है और सरकार को इस संबंध में निष्पक्ष रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि हाल ही में संसद में ‘जय श्री राम’ और और ‘अल्लाहो-अकबर’ के नारे लगे हैं। उन्होंने कहा कि हमें जाति और धर्म से ऊपर उठकर इंसान को इंसान के रूप में देखना चाहिए।
 
तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि संसद के सुचारू रूप से चलने पर सत्ता पक्ष की अगली कतार का बड़ा महत्व होता है। उन्हें आशा है कि वह अपनी भूमिका सही ढंग से निभाएगी। उन्होंने कहा कि अक्सर बड़ी पार्टी के बीच छोटी पार्टियों को अपना नजरिया रखने का अवसर नहीं मिलता। उनकी पार्टी चाहती है कि उन्हें यह अवसर मिले।
 
जेडीयू के नेता राजीव रंजन सिंह में अध्यक्ष बनाए जाने पर बिरला को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी पार्टी सदन के सुचारू रूप से चलाने के लिए पूर्ण सहयोग देगी।
 
बीजू जनता दल के नेता पिनाकी मिश्रा ने कहा कि उनकी पार्टी और नेता नवीन पटनायक का मानना है कि संसद किसी व्यवधान के बिना सुचारू रूप से चलनी चाहिए। उनकी पार्टी कभी भी सदन के बीच में आकर प्रदर्शन करने पर विश्वास नहीं रखती। अपने वक्तव्य में उन्होंने प्रवर समिति में कम विधेयकों को चर्चा के लिए भेजे जाने का भी मुद्दा उठाया।
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