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एनआईए से जुड़ा विधेयक संसद में पारित
By Swadesh | Publish Date: 15/7/2019 6:32:19 PM
एनआईए से जुड़ा विधेयक संसद में पारित

नई दिल्ली। लोकसभा में सोमवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी को अधिक सशक्त बनाने से जुड़ा विधेयक चर्चा के बाद संसद में पारित हो गया। विधेयक पर चर्चा के अंत में विपक्ष की मांग पर मतविभाजन कराया गया, जिसमें विधेयक के पक्ष में 278 और विपक्ष में 6 वोट पड़े।

 
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (संशोधन) विधेयक, 2019 पर चली चर्चा का जवाब देते हुए केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि आतंक को ‘राइट’ और ‘लेफ्ट’ के तौर पर नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सदस्यों ने चिंता जाहिर की है कि इस कानून का दुरुपयोग हो सकता है। मोदी सरकार का इस कानून के दुरुपयोग का कोई इरादा नहीं है। उनकी सरकार आतंक के दायरे में धर्म देखे बिना कोई भी आयेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
 
गृहमंत्री ने कहा कि पोटा कानून को राजनीतिक कारणों से वापस लिया गया था। उनका मानना है कि इसे हटाने से देश में आतंक में वृद्धि हुई है। पोटा कानून हटाने के चलते ही पूर्व की यूपीए सरकार को एनआईए कानून लाना पड़ा। शाह ने कहा कि आतंक के नाम पर एक धर्म के लोगों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का आरोप सही नहीं है। उन्होंने कहा कि तमिल संगठन भी आतंक करते थे, तब भी कड़ी कार्रवाई होती थी।
 
उन्होंने कहा कि श्रीलंका, बांग्लादेश में हुए आतंकी हमलों में भारतीय मारे गए हैं। हमारी एजेंसियों के पास अभी अधिकार नहीं है कि वह देश के बाहर जाकर इन मामलों की जांच कर सके। शाह ने कहा कि एनआईए को देश के बाहर जाकर जांच करने का अधिकार देने के लिए भी सरकार यह विधेयक लाई है।
 
केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि एनआईए हर मामले की जांच नहीं करेगी। यह केवल विशेष मामलों की जांच करेगी और इन मामलों के अभियुक्तों को इसके लिए दूरदराज के इलाकों से आना भी पड़े तो कोई विषय नहीं होना चाहिए। हम केवल अभियुक्तों के अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन आतंक में मारे गए लोगों और उनके परिवारवालों की बात नहीं करते। उन्होंने कहा कि विधेयक में एनआईए के दायरे में विश्व के अन्य देशों की तरह पाकिस्तान शामिल नहीं है, लेकिन हमारे पास आतंक पर निशाना साधने के सर्जिकल स्ट्राइक जैसे अन्य विकल्प उपलब्ध हैं।
 
प्रत्यक्षदर्शियों के अदालतों में घबराकर गवाही से मुकर जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश पर काम कर रही है और गवाहों को सभी तरह की सुरक्षा मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आतंक से जुड़े मामलों में उच्च अदालतों में अपील पर विधि अधिकारी निर्णय लेता है और सरकार इसमें कोई हस्ताक्षेप नहीं करती है।
 
इससे पूर्व, विधेयक को चर्चा के लिए पेश करते हुए गृह राज्यमंत्री जी. कृष्णा रेड्डी ने कहा कि आतंक के अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय स्वरूप  को देखते हुए एनआईए विधेयक में संशोधन से जुड़ा विधेयक सरकार लाई है। इससे एनआईए अब दुनिया में कहीं भी आतंक से जुड़े मामलों में भारतीयों और भारतीय संपत्ति को होने वाले नुकसान के मामलों की जांच कर सकेगी। रेड्डी ने कहा कि वर्तमान में एनआईए की जांच के दायरे में आए 90 प्रतिशत मामलों में दोष साबित हुआ है।
 
रेड्डी ने कहा कि दुनिया में हथियारों, मादक पदार्थों और मानव की तस्करी होती है। इन दिनों ही मामलों में एनआईए को जांच का अधिकार मिलेगा। इसके अलावा एनआईए अब साइबर अपराध और उनके आतंक से जुड़े तार को भी जांच सकेगी।
 
विपक्ष की ओर से चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने निजता, स्वतंत्रता और उनके न्यायिक अधिकारों से जुड़ा मामला उठाया। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति जबतक गुनाह साबित न हो निर्दोश होता है। मीडिया में कुछ लीक के माध्यम से भी गुनाह साबित होने के पहले व्यक्ति को दोषी साबित किया जाना शुरू हो जाता है। इस दौरान उन्होंने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि सीबीआई को गैरकानूनी साबित करने से जुड़े निर्णय को भले ही सुप्रीम कोर्ट ने दरकिनार कर दिया हो, लेकिन एजेंसी की संवैधानिक वैधता से जुड़ा मामला अभीतक पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में एनआईए पर भी इसका प्रभाव हो सकता है।
 
देश में अभी तक डाटा सरंक्षण से जुड़ा कोई कानून नहीं बना है, ऐसे में एनआईए को साइबर मामलों की जांच का अधिकार सही नहीं है। द्रमुक नेता ए राजा ने कहा कि कानून को किसी एक धर्म के पक्ष का नहीं होना चाहिए। टाडा और पोटा जैसे कानूनों को हटाए जाने के पीछे भी यही कारण रहा है। ‘राइट विंग’ से जुड़े अपराधों एमएम कलबुर्गी और गौरी लंकेश की हत्या के मामलों से निपटने में भी एनआईए का इस्तेमाल होना चाहिए।
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