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एनआरसी की समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध
By Swadesh | Publish Date: 19/7/2019 12:04:43 PM
एनआरसी की समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध

नई दिल्ली। असम में एनआरसी मामले पर केंद्र सरकार ने कहा है कि अवैध घुसपैठियों को हर हाल में अपने देश वापस जाना ही होगा। केंद्र सरकार ने कहा कि हम भारत को विश्व की रिफ्यूजी कैपिटल नहीं बना सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर 23 जुलाई को सुनवाई करेगा। 

केंद्र और राज्य सरकार ने एनआरसी की समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट 31 जुलाई की डेडलाइन में बदलाव करे। एनआरसी की डेडलाइन की भविष्य में कोई तारीख दे। 
 
केंद्र सरकार ने कहा कि लोगों की पहचान संबंधी दस्तावेजों की अभी वेरिफिकेशन करनी बाकी है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि कोआर्डिनेटर ने इस मामले में अच्छा काम किया है। हम लाखों लोगों के मामले में काम कर रहे हैं। बांग्लादेश के बॉर्डर के पास लाखों लोग गलत तरीके से एनआरसी में नाम में आ गए हैं।  जिन लोगों का नाम जोड़ा गया है वो अवैध घुसपैठिए हैं। पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई तक वेरिफिकेशन के काम निपटाने के लिए कहा था। 
 
पिछले 30 मई को एनआरसी रजिस्टर में एक पूर्व सैनिक का नाम नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताते हुए एनआरसी कोआर्डिनेटर प्रतीक हजेला को निर्देश दिया था कि वो ये सुनिश्चित करें कि दावों को निपटाने में जल्दबाजी न की जाए। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली वेकेशन बेंच ने कहा था कि 31 जुलाई को एनआरसी के प्रकाशन की समय सीमा में कोई बदलाव नहीं होगा लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि जिन लोगों ने एनआरसी में अपना नाम दर्ज कराने के लिए दावा किया है उन्हें पूरा मौका दिए ही सुनवाई कर ली जाए।
 
पिछले आठ मई को सुप्रीम कोर्ट ने असम में एनआरसी की प्रक्रिया पूरा करने की तारीख 31 जुलाई से आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने प्रतीक हजेला से कहा था कि आप 31 जुलाई से एक दिन पहले ये काम पूरा करें लेकिन एक दिन देर से नहीं।
सुनवाई के दौरान प्रतीक हजेला की तरफ से कहा गया था कि आपत्तियों पर सुनवाई 6 मई से शुरु हुई है। बहुत से मामलों में आपत्ति दर्ज करानेवाले उपस्थित नहीं हो रहे हैं। तब चीफ जस्टिस ने कहा था कि अगर वे नहीं उपस्थित हो रहे हैं तो कानून अपना काम करेगा। आप अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल कीजिए और उपस्थित नहीं होने वालों के मामलों पर कानून के मुताबिक काम कीजिए।
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