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योगी ने मंत्रियों-विधायकों को दी नसीहत, परिवार और रिश्तेदारों को रखें दूर
By Swadesh | Publish Date: 22/8/2019 1:58:10 PM
योगी ने मंत्रियों-विधायकों को दी नसीहत, परिवार और रिश्तेदारों को रखें दूर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों, मंत्रियों और विधायकों को नसीहत देते हुए कहा है कि सरकारी विभागों को परिवार और रिश्तेदारों की मोहमाया से दूर रखें। विभागीय कार्यों में किसी भी स्तर पर परिवार और रिश्तेदारों का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और ईमानदारी का होना आवश्यक है। सीएम योगी ने यहां तक कहा कि जिन मंत्रियों को मंत्रिमंडल से मुक्त किया गया है, उसका मुझे दुख है, लेकिन इसके सिवाय कोई रास्ता नहीं था। नये मंत्रियों से कहा कि निजी स्टॉफ पर विशेष ध्यान देते हुए उनकी गतिविधियों पर नजर रखें। 

सीएम योगी बुधवार देर रात तक चली नये मंत्रियों की बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने मंत्रिमंडल के सदस्यों से कहा कि जनसेवा से बढ़कर कोई धर्म और पुण्य का कार्य नहीं हैं। अपने-अपने दा​यित्वों को प्रतिबद्धता और निष्ठा के साथ निर्वहन करने का संकल्प लें। मंत्रियों को जनता और प्रदेश की सेवा करने का एक पुनित अवसर है। इस अवसर को उपलब्धि में बदलते हुए प्रदेश के विकास और जनता की खुशहाली के लिए हम सभी को निरन्तर प्रयासरत रहना होगा, जिससे उत्तर प्रदेश की एक नई छवि के साथ उभरकर सामने आये। विकास कार्यों को नीति एवं नियमों के तहत ही सम्पादित किया जाए। उन्होंने समयबद्धता पर बल देते हुए कहा कि फाइलों का निस्तारण 03 दिन में किया जाए। किसी भी स्थिति में पत्रावलियां लम्बित न रहें और सभी मंत्री समय से अपने कार्यालय में उपस्थित रहकर कार्यों का सम्पादन करें।
 
उन्होंने यह भी कहा कि हमारी कार्य संस्कृति ऐसी हो, जो सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और पार​दर्शिता का उदाहरण बने और जिसमें भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश न हो। जनता की शिकायतों व समस्याओं के समाधान के लिए नियमित जनसुनवाई और निस्तारण की प्रगति पर लगातार ध्यान रखें। इसके साथ ही विभागीय कार्यों के साथ अपने प्रभार के जनपद की प्रगति की भी निरंतर समीक्षा करते रहें। जनपद भ्रमण के दौरान विकास योजनाओं का भौतिक सत्यापन करते हुए जनता का फीडबैक जरूर लें। दौरे के दौरान मंत्रियों के कार्य व्यवहार और आचरण पर सभी की नजर होती है, ऐसी स्थिति में सादगी और शुचिता का उदाहरण प्रस्तुत करें।
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