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चंद्रयान- 2 ने पहली बार चांद की खूबसूरत तस्वीर भेजी
By Swadesh | Publish Date: 23/8/2019 11:11:21 AM
चंद्रयान- 2 ने पहली बार चांद की खूबसूरत तस्वीर भेजी

नई दिल्ली। चंद्रयान-2 ने पहली बार चांद की खूबसूरत तस्वीर भेजी है। लैंडर विक्रम ने यह तस्वीर 2650 किलोमीटर की ऊंचाई से ली है। चित्र में ओरिएंटेल बेसिन और अपोलो क्रेटर्स की पहचान की गई है। इसरो ने अपने ट्विटर हैंडल पर इस चित्र को जारी करके कैप्शन में लिखा है कि-21 अगस्त, 2019 को चंद्र की सतह से लगभग 2650 किमी की ऊंचाई पर चंद्रयान-2 विक्रम लैंडर द्वारा ली गई पहली चंद्रमा छवि।

चंद्रयान-2 से चांद की सतह से करीब 2650 किलोमीटर दूरी से ली गई चांद की पहली तस्वीर इसरो ने गुरुवार को जारी की है। इससे पहले चंद्रयान-2 ने पहली बार अपने एलआई4 कैमरे से पृथ्वी की तस्वीरें भेजीं थीं जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 04 अगस्त को अपने ट्विटर हैंडल पर जारी करके पहली तस्वीर के कैप्शन में लिखा था- 'चंद्रयान 2 में विक्रम लैंडर द्वारा क्लिक की गई पृथ्वी की सुंदर तस्वीरों का पहला सेट 3 अगस्त, 2019 17:28 UT पर चंद्रयान 2 LI4 कैमरा द्वारा क्लिक की गई पृथ्वी।' दूसरी तस्वीर के कैप्शन में इसरो ने लिखा था- '3 अगस्त, 2019 17:29 UT पर चंद्रयान 2 LI4 कैमरे ने कुछ ऐसी देखी पृथ्वी।'
 
चंद्रयान-2 ने 21 अगस्त को चांद की दूसरी कक्षा में प्रवेश किया। इसरो के मुताबिक, कक्षा में स्पेसक्राफ्ट का प्रवेश 12.50 बजे शुरू हुआ, जिसे पूरा करने में उसे 1,228 सेकेंड लगे। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के.सिवन ने कहा कि भारत के पहले चंद्रमा मिशन 'चंद्रयान-2' के चांद पर उतरने के लिए दुनिया भर में उत्सुकता है। उन्होंने कहा कि चंद्रमा लैंडर विक्रम के लिए लैंडिंग ऑपरेशन सात सितम्बर की रात करीब 1:40 बजे शुरू होगा और रात 1:55 बजे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर फाइनल लैंडिंग होगी। चांद की कक्षा का आकार 118 किलोमीटर गुणा 4,412 किलोमीटर है, जिससे होकर स्पेसक्राफ्ट चांद पर उतरेगा।
 
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट चंद्रयान-2 का सफर 22 जुलाई को दिन के 2 बजकर 43 मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से शुरू हुआ था। चांद के दक्षिणी ध्रुव तक का सफर तय करने निकले चंद्रयान-2 ने 20 अगस्त को सुबह 9:02 मिनट पर चन्द्रमा की कक्षा में प्रवेश किया। इसरो ने 24, 26 और 29 जुलाई को चंद्रयान-2 का धरती की पहली, दूसरी और तीसरी कक्षा में परिवर्तन कराया था।  
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