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अयोध्या के संतों को दिवाली के उपहार में सरकार से चाहिए राम मंदिर का निर्माण
By Swadesh | Publish Date: 5/11/2018 2:25:45 PM
अयोध्या के संतों को दिवाली के उपहार में सरकार से चाहिए राम मंदिर का निर्माण

अयोध्या। अयोध्या के संंत-धर्माचार्यों का योगी सरकार के द्वितीय दीपोत्सव को लेकर उत्साह चरम पर है। संंत-धर्माचार्य योगी सरकार से दिवाली में उपहार के रूप में राममंदिर निर्माण कराने की मांग की है। संतों ने केंद्र की मोदी एवं योगी सरकार को दीपोत्सव के सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए स्पष्ट कर दिया कि सरकार राममंदिर से ध्यान भटकाने की कोशिश न करें। अयोध्या में सरकार राममूर्ति बनवाएं लेकिन यह न सोचे कि राममूर्ति राम मंदिर निर्माण का विकल्प हो सकती है। दरअसल, छह नवम्बर को दीपोत्सव पर योगी आदित्यनाथ अपने मंत्रियों के साथ अयोध्या में रहेंगे और संतों से मुलाकात करेंगे।

 
दीपोत्सव के आयोजन पर हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत में राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष एवं मणिराम दास छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि रामलला मंदिर में विराजमान हों यह परम सौभाग्य का विषय है। ऐसा होने पर अयोध्या में लाखों नहीं बल्कि करोड़ों दीपक जलेंगे। जिस दिन अयोध्या में मंदिर बना उस दिन ऐसी दिवाली होगी जो त्रेतायुग का अहसास कराएगी। सरकार को बिना देर किए शीघ्र राम मंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए, जो हिन्दू स्वाभिमान का मूल है।
 
दास ने योगी सरकार के अयोध्या में राम की 151 मीटर ऊंची प्रतिमा को लेकर सराहना करते हुए कहा कि सरकार राममूर्ति बनवाएं लेकिन यह न सोचे कि राममूर्ति राममंदिर का विकल्प हो सकती है। 
 
अयोध्या के प्रतिष्ठित मंदिर रामबल्लभाकुंज के अधिकारी संत राजकुमार दास ने दीपोत्सव में विदेशी कलाकारों के हुनर पर आधारित रामलीला का उद्घाटन रविवार को अवध विश्वविद्यालय में किया था। संत के रूप में दीपोत्सव में उनकी भूमिका सराहनीय है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में दीपोत्सव का आयोजन भव्यता का वाहक है। अयोध्या ने ऐसा आयोजन पहले कभी नहीं देखा, यह योगी सरकार में ही संभव है लेकिन राम हमारे आराध्य है। कुछ भी हों, हमारे आराध्य के मंदिर के बिना हर आयोजन फीका लगता है। हमें उम्मीद है कि अगले वर्ष की दिवाली हम रामलला मंदिर में मनाएंगे।
 
विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के केन्द्रीय मार्गदर्शक मंडल के वरिष्ठ सदस्य एवं सदगुरूसदन गोलाघाट के महंत शिया किशोरी शरण ने कहा कि अयोध्या में सरकार कोई भी आयोजन कर ले, लेकिन राममंदिर को भुलाया नहीं जा सकता है। हालांकि दीपोत्सव से रामनगरी की सांस्कृतिक गरिमा बढ़ी है, लेकिन राममंदिर बनने के बाद ही रामनगरी का गौरव फिर से स्थापित होगा। योगी जी हमें राममंदिर के रूप में दिवाली का गिफ्ट प्रदान करें। क्योंकि हिन्दुओं के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता है। कारसेवकों के बलिदान को सरकार मंदिर बनाकर शद्धाजाली दे।
 
विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि दीपोत्सव का कार्यक्रम अद्वितीय है। योगी सरकार इसके लिए बधाई की पात्र है। इस आयोजन में संपूर्ण रामनगरी लगी हुई है लेकिन संत-धर्माचार्यों एवं करोड़ों हिंदुओं की इच्छा है कि दिव्य दीपोत्सव रामलला के भव्य मंदिर में बने। सरकार को इस दिशा में ठोस प्रयास करना चाहिए।
 
रामजन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि दीपोत्सव का आयोजन सराहनीय है। हमें हर हाल में राममंदिर चाहिए। सरकार का अब कोई बहाना नहीं चलेगा। सरयू तट पर राम की मूर्ति भी बनने जा रही है लेकिन सरकार ये न सोचे कि राम की मूर्ति विराजमान रामलला का विकल्प होगी। 
 
आमरण-अनशन कर सुर्खियों में आए महंत परमहंस दास ने कहा कि मोदी एवं योगी सरकार अयोध्या का विकास कर रही है। दीपोत्सव आयोजन का विशेष महत्व है। राममूर्ति भी बनने जा रही है लेकिन राममूर्ति राममंदिर का विकल्प नहीं हो सकती। यदि पांच दिसंबर तक राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त नहीं होता है तो वे छह दिसंबर को आत्मदाह कर लेंगे। वह इस बार किसी की बात नहीं मानेंगे।
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