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शहादत को सलाम: शाहपुरा में पाक के खिलाफ उबाल, नहीं जले घरों में चूल्हे
By Swadesh | Publish Date: 15/2/2019 4:30:42 PM
शहादत को सलाम: शाहपुरा में पाक के खिलाफ उबाल, नहीं जले घरों में चूल्हे

भंडारे का खाना बनाने के लिए मंगवाई गईं लकड़ियों से होगी शहीद रोहिताश लाम्बा की अंत्येष्टि 

जयपुर। आज हर कोई शोक में है। पुलवामा के आतंकवादी हमले में जयपुर जिले के शाहपुरा का लाल भी शहीद हो गया। इसकी जानकारी मिलने के बाद शाहपुरा में मातम और सन्नाटा पसरा है। हर कोई अपने उस बहादुर सिपाही को याद कर रहा है जिसने वतन के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। 
 
शाहपुरा के शहीद रोहिताश लांबा शाहपुरा के निकट गोविंदपुरा बासडी गांव के रहने वाले थे। शहीद की पार्थिव देह आज देर शाम तक शाहपुरा पहुंचने की संभावना है। उनकी मौत की सूचना शुक्रवार सुबह पता लगने पर आस पास के क्षेत्र में बाजार बंद रहे तो शैक्षाणिक प्रतिष्ठानों में उनको श्रद्धाजंलि दी गई। शहीद के गांव में माहौल गमगीन है। 
 
शाहपुरा में लोगों में पाक के खिलाफ उबाल दिखा। यहां पर हर किसी का मन व्यथित होने के साथ रगों में उबाल दिखा। युवाओं का कहना था कि पाकिस्तान से लड़ाई के लिए पूरा देश तैयार है। आंतकवादी हमारे घर में घुसकर हमारा सब कुछ छीने यह अब बर्दाश नहीं होगा। लोगों ने कहा कि आतंकियों को जड़ से मिटाने के लिए कठोर निर्णय लेना पड़ेगा। हालांकि शहीद भाई को छोड़कर अभी अन्य किसी परिजन को इस मामले की जानकारी नही दी गई है। शहीद रोहिताश लांबा की शादी करीब डेढ़ साल पूर्व ही हुई थी। उनके दो माह की बच्ची है। पांच भाई बहनों में रोहिताश सबसे बड़े थे। उन्होंने करीब दो साल पहले ही सीआरपीएफ ज्वाइन की थी और शनिवार को छुट्टियां बिताकर वापस ड्यूटी पर लौटे थे। 
 
इधर शहीद के गांव बड़ी संख्या में ग्रामीणों और अधिकारियों का पहुंचना शुरू हो गया है। स्थानीय अधिकारी शहीद के गांव पहुंचे तो ग्रामीणों ने उन पर देरी से आने का आरोप लगाते हुए विरोध भी किया हालांकि बाद में समझाइश पर मामला शांत हुआ। गांव में सन्नाटा और शोक की लहर है। यहां पर बाजार पूरी तरह बंद है और घरों में आज चूल्हे नहीं जले। इधर शहीद रोहिताश लाम्बा के परिवार में अभी सिर्फ भाई को जानकारी दी गई है। मां-बाप और पत्नी को शहीद के संबंध में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है। 
 
बताया जाता है कि गांव में तेजाजी के मंदिर के आगे आज भंडारे का कार्यक्रम था। उसकी तैयारी के लिए लकड़ियां मंगवाई गई थी, लेकिन अब भंडारा तो नहीं होगा, ठीक उसी जगह पर शहीद लाम्बा की अन्त्येष्टि होगी। भंडारे का खाना बनाने के लिए जो लकड़ियां मंगवाई गयी थी अब उनसे शहीद रोहिताश लाम्बा की अंत्येष्टि होगी।
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