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चुनावी तालमेल को लेकर माकपा- कांग्रेस के बीच देर रात तक चली बैठक, नहीं निकला समाधान
By Swadesh | Publish Date: 14/3/2019 11:50:03 AM
चुनावी तालमेल को लेकर माकपा- कांग्रेस के बीच देर रात तक चली बैठक, नहीं निकला समाधान

कोलकाता। आसन्न लोकसभा चुनाव के लिए पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और माकपा के संभावित गठबंधन की राह में मौजूद बाधाएं छंट नहीं रही हैं। कई सीटों पर सहमति नहीं बनने की वजह से दोनों ही पार्टियों के नेता इसे लेकर मुश्किल परिस्थिति में फंसे हुए हैंं। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बुधवार रात 12:00 बजे तक प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय विधान भवन में प्रदेश अध्यक्ष सोमेन मित्रा के दफ्तर में दोनों ही पार्टियों के नेता बैठक करते रहे थेे।

कांग्रेस की ओर से इसमें सोमेन मित्रा के अलावा सांसद प्रदीप भट्टाचार्य मौजूद थे जबकि वाममोर्चा की ओर से वयोवृद्ध नेता रोबिन देव इस बैठक में शामिल थे। बताया गया है कि दोनों ही पार्टियों के बीच करीब दो घंटे तक बातचीत हुई है। दरअसल बुधवार को अलीमुद्दीन स्ट्रीट स्थित माकपा के प्रदेश मुख्यालय में सभी जिलों के वाममोर्चा अध्यक्ष को लेकर बैठक की गई जिसमें कांग्रेस को सीटें देने को लेकर बातचीत हुई। लेकिन पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि माकपा के शीर्ष नेतृत्व जिला नेतृत्व को गठबंधन के लिए तैयार नहीं करा पा रहे हैं।

खासकर पुरुलिया और बसीरहाट सीट पर कांग्रेेस अपना उम्मीदवार उतारना चाहती है लेकिन माकपा यह सीट देने के लिए अपने निचले स्तर के नेताओं और कार्यकर्ताओं में सहमति नहीं बना पा रही है। इसलिए गठबंधन की राह की बाधाएं छंट नहीं रही हैं। इस बीच वाममोर्चा आगामी 16 मार्च यानी शनिवार को उम्मीदवारों की एक और सूची जारी कर सकती है। इसलिए किन सीटों पर यह सूची जारी की जा सकती है, विशेषकर उन्हीं सीटों को लेकर बुधवार देर रात कांग्रेस के साथ बैठक हुई है। 

दोनों ही पार्टियों के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि केवल पुरुलिया अथवा बसीरहाट ही नहीं कांग्रेस राज्य की 17 सीटों से उम्मीदवार उतारना चाहती है। इधर वाममोर्चा चाहती है कि राज्य में 20 सीटों पर चुनाव लड़े। ये सीटें वे हैं जिन पर दोनों ही पार्टियों के सांसद नहीं हैं।
 
दरअसल राज्य में 42 लोकसभा सीटों में से 4 पर कांग्रेस का कब्जा है जबकि दो पर माकपा का। इन 6 सीटों को छोड़ दिया जाए तो राज्य में 36 सीटें बची हैं जबकि माकपा 20 पर और कांग्रेस 17 पर लड़ना चाहती है। इन दोनों को मिलाया जाए तो 37 सीटें हो रही है इसलिएक एक सीट को लेकर पेंच फंसा हुआ है। मुख्य रूप से पुरुलिया को लेकर दोनों ही पार्टियां सहमति नहीं बना पा रही हैं। प्रदेश कांग्रेस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि माकपा को यह भी कह दिया गया है कि वे चाहें तो बसीरहाट सीट रख सकते हैं लेकिन पुरुलिया सीट देनी होगी।
 
सूत्रों के हवाले से यह भी बताया गया है कि उत्तर कोलकाता और दक्षिण कोलकाता की सीटों को लेकर भी दोनों पार्टियों में सहमति नहीं बनी है लेकिन यह समस्या पुरुलिया की तरह जटिल नहीं है और इस पर सहमति बनने के आसार हैं। कुल मिलाकर कहा जाए तो चुनाव की तारीखों की घोषणा हो जाने के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने सबसे पहले सभी सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। भाजपा भी धीरे-धीरे उम्मीदवारों की सूची तय कर चुकी है लेकिन माकपा और कांग्रेस के बीच सहमति नहीं बनने की वजह से दोनों ही पार्टियां अपने उम्मीदवार फाइनल नहीं कर पा रही हैं।
 
इस बीच पिछले सप्ताह वाममोर्चा चेयरमैन विमान बोस ने राज्य की उन दोनों सीटों पर माकपा उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी जिन पर पहले से ही माकपा का कब्जा है। इनमें से एक सीट उत्तर दिनाजपुर की रायगंज है जहां से मोहम्मद सलीम सांसद है और उन्हीं को उम्मीदवार बनाया गया है। इसी तरह से मुर्शिदाबाद सीट से बदरुद्दूजा खान सांसद हैं और उनको भी मुर्शिदाबाद सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। इसके साथ ही माकपा ने यह भी साफ कर दिया है कि राज्य की जिन चार सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है, वहां उम्मीदवार नहीं उतारेगी।
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