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सुप्रीम कोर्ट का गुजरात सरकार को झटका, बिल्किस बानो को 50 लाख रुपये, घर और नौकरी देने के निर्देश
By Swadesh | Publish Date: 23/4/2019 2:21:12 PM
सुप्रीम कोर्ट का गुजरात सरकार को झटका, बिल्किस बानो को 50 लाख रुपये, घर और नौकरी देने के निर्देश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को निर्देश दिया है कि वह बिल्किस बानो को बतौर मुआवजा 50 लाख रुपये दे। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने गुजरात सरकार को ये भी निर्देश दिया कि वो बिल्किस बानो को सरकारी नौकरी दे और उसे रहने के लिए मकान भी उपलब्ध कराए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गुजरात सरकार के वकील से कहा कि ये आपका सौभाग्य है कि हम आपकी सरकार के खिलाफ कोई आदेश नहीं पारित कर रहे हैं।

सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उन पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है, जिन्हें हाईकोर्ट ने दोषी करार दिया है। कुछ अधिकारी जो रिटायर हो चुके हैं उनकी पेंशन बंद कर दी गई है। जो अभी सेवारत हैं, उन्हें दो रैंक डिमोट कर दिया गया है।

पहले की सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार ने पांच लाख रुपये मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा था लेकिन बिल्किस बानो ने उसे लेने से इनकार कर दिया था। पिछले 29 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को निर्देश दिया था कि वो उन छह पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करे, जिन्हें हाईकोर्ट ने दोषी करार दिया था। 

दरअसल इन अधिकारियों ने बांबे हाईकोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई, 2017 को इन अधिकारियों की अर्जी खारिज कर दी थी। कोर्ट ने गुजरात के पुलिसकर्मी राम सिंह भगोरा और चार दूसरे पुलिस अधिकारियों और दो डॉक्टरों की याचिका खारिज कर दी थी । कोर्ट ने कहा था कि सभी की सजा बरकरार रहेगी। दोनों डॉक्टरों को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आपने डॉक्टर होने के बावजूद पुलिस के कहने पर रिपोर्ट लिखी, ये आपने अपने पेशे के साथ सही नहीं किया।

27 फरवरी 2002 को गोधरा कांड के बाद पूरे गुजरात में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे। इसी के बाद 3 मार्च, 2002 को अहमदाबाद से 250 किमी दूर रंधीकपुर गांव में बिल्किस बानो के परिवार पर भीड़ ने हमला कर दिया था।

इस हमले में बिल्किस की तीन साल की बेटी सहित उसके परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी गई थी। पांच माह की गर्भवती बिल्किस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था। बिलकीस बानो ने इसके अगले दिन यानी 4 मार्च, 2002 को पंचमहल के लिमखेड़ा पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दर्ज करायी थी।

इस घटना की शुरुआती जांच अहमदाबाद में हुई थी। सीबीआई ने 19 अप्रैल, 2004 को अपनी चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद बिल्किस बानो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर यह आशंका जाहिर की थी कि गवाहों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है और सीबीआई के साक्ष्यों से छेड़छाड़ की जा सकती है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने 6 अगस्त, 2004 में मामले को मुंबई ट्रांसफर कर दिया। स्पेशल कोर्ट ने 21 जनवरी, 2008 को दिये अपने फैसले में 11 लोगों को दोषी ठहराया था। इन 11 दोषियों ने अपनी सजा के खिलाफ बांबे हाईकोर्ट में अपील की थी। बांबे हाईकोर्ट ने इनकी सजा बरकरार रखी थी।

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