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कानपुर रेलवे स्टेशन पर लंच पैकेट देख भूखे - प्यासे प्रवासी श्रमिकों का धैर्य टूटा, जमकर चले लात-घूंसे

कानपुर रेलवे स्टेशन पर लंच पैकेट देख भूखे - प्यासे प्रवासी श्रमिकों का धैर्य टूटा, जमकर चले लात-घूंसे

कानपुर. उत्तर प्रदेश के कानपुर में शुक्रवार को कानपुर सेंट्रल का प्लेटफार्म नंबर 8 पर भूख और प्यास से छटपटा रहे कामगारों की ट्रेन जैसे ही स्टेशन पर रूकी तो उनके लिए लंच पैकेट और पानी की व्यवस्था की गई थी। भूख प्यास से परेशान श्रमिक लंच पैकेट देखकर उस टूट पड़े। इस दौरान आपस में शुरू हुई धक्का-मुक्की देखते ही देखते युद्ध के मैदान में तब्दील हो गई।

श्रमिकों के बीच आपस में जमकर लात घूंसे चलने लगे। एक दूसरे की जमकर पिटाई की। सेंट्रल स्टेशन पर लगभग आधे घंटे तक हंगामा चलता रहा। आरपीएफ और जीआरपी के जवान भी मौके से नदारद रहे। किसी ने भी इन्हें छुड़ाने की कोशिस नहीं की। सुरक्षाकर्मी कोरोना के डर की वजह से श्रमिकों से दूरी बनाए रहे ।

अहमदाबाद से बिहार सीतामढी के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन चली थी। कानपुर सेंट्रल स्टेशन पहुंचने से पहले ट्रेन तीन घंटे तक तपती घूप में आउटर पर खड़ी रही थी। श्रमिक भूख और प्यास से परेशान थे। महिलाएं और बच्चों का बुरा हाल था। सिग्नल मिलने के बाद जब ट्रेन स्टेशन पर पहुंची तो लंच पैकेट और पानी के लिए अलाउंस किया। आइआरसीटीसी के कर्मचारी जब खाना लेकर प्लेटफार्म पर पहुंची तो अपनी तरफ आती हुई भीड़ को देखकर लंच पैकेट की ट्राली छोड़कर पीछे हट गए। श्रमिको की भीड़ लंच पैकेट पर टूट पड़ी। श्रमिकों के बीच मारपीट शुरू हो गई। इस दौरान लंच पैकेट पूरे प्लेटफार्म बिखर गए। कुछ को खाना नसीब हुआ तो कुछ भूखे ही रह गए।

मजदूरों का आरोप- अहमदाबाद से कानपुर के बीच कुछ खाने को नहीं मिला

स्पेशल ट्रेन में बैठे श्रमिकों ने बताया कि अहमदाबाद से कानपुर तक हमे कुछ भी खाने पीने को नहीं दिया गया है। किसी भी स्टेशन पर कुछ भी खाने पीने की व्यवस्था नहीं थी कि खाना पानी खरीदकर ही कुछ खा सके। कानपुर के सेंट्रल स्टेशन पर पहुंचने से पहले तीन घंटे आउटर पर ट्रेन को खड़ा रखा। आउटर पर तेज धूप और लू के थपेड़ों ने भूखे पेट श्रकिमों की हालत खराब कर दी।

आइआरसीटीसी के प्रबंधक अमित कुमार के मुताबिक अलाउंस कर श्रमिकों को बताया जाता है कि खाना पानी कहां पहुंचाया जाता है। जब कर्मचारी खाना लेकर पहुंचे तो भीड़ बेकाबू हो गई। फोर्स की कमी की वजह से हंगामा हो गया। स्टेशन निदेशक हिंमाशु शेखर उपाध्याय कानपुर सेंट्रल स्टेशन बहुत ही महत्वपूर्ण स्टेशन है। यहां पर अलग-अलग दिशाओं से ट्रेनों का आवागमन होता है। बिना शेड्यूल के श्रमिक स्पेशल ट्रेनें आ रही हैं। 24 घंटे में 200 से अधिक स्पेशल गुजर रही हैं। ट्रेनों में खाना पानी की व्यवस्था करने में समय लगता है।

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