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बेमौसम बारिश-ओलवृष्टि से गेहूं, सरसों, चना की फसल को भारी नुकसान, पैदावार पर पड़ेगा सीधा असर

देश के विभिन्न इलाकों खासतौर से उत्तर भारत में हो रही बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि से गेहूं, सरसों और चना जैसी रबी फसलों को नुकसान हो सकता है।

बेमौसम बारिश-ओलवृष्टि से गेहूं, सरसों, चना की फसल को भारी नुकसान, पैदावार पर पड़ेगा सीधा असर
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नई दिल्ली/हरियाणा। देश के विभिन्न इलाकों खासतौर से उत्तर भारत में हो रही बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि से गेहूं, सरसों और चना जैसी रबी फसलों को नुकसान हो सकता है। दक्षिण हरियाणा में गुरुवार को हुई ओलावृष्टि से गेहूं और सरसों की फसल को भारी नुकसान हुआ है। मौसम के बदले मिजाज के चलते भारी बारिश तथा ओलावृष्टि से मुख्यत: सरसों, गेहूं और सब्जी उगाने वाले किसानों की दिक्कत काफी बढ़ गई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के तहत आने वाले भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर), करनाल के निदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि बेमौसम बरसात और तेज हवा चलने से गेहूं की खड़ी फसल गिर जाएगी जिससे फसल की पैदावार पर असर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि अब तक सिर्फ हरियाणा से गेहूं की फसल को नुकसान की रिपोर्ट मिल रही है, लेकिन फसल परिपक्व हो चुकी है इसलिए जहां कहीं भी इस समय ओलावृष्टि होगी या तेज हवा के कारण खड़ी फसल खेतों में गिर जाएगी वहां नुकसान जरूर होगा। सूत्रों ने बताया कि बारिश के साथ तेज हवा के कारण गेहूं, सरसों की फसल पसर गई हैं। मौसम का बदला मिजाज किसानों के लिए आफत बन गया है। बता दें कि पिछले महीने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी फसल वर्ष 2019-20 के दूसरे अग्रिम उत्पादन अनुमान के अनुसार, देश में गेहूं का रिकॉर्ड 10.62 करोड़ टन उत्पादन होने का अनुमान लगाया गया है। वहीं, चना का उत्पादन 112.2 लाख टन और सरसों का 91.10 लाख टन होने का अनुमान है। बारिश तथा ओलावृष्टि के चलते तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि ने किसानों को परेशानी में डाल दिया है। फसलें पकाव की तरफ हैं, यहां तक की मध्य मार्च के बाद सरसों की कटाई शुरु हो जाती है। अंतिम सप्ताह में एक्का दुक्का स्थानों पर गेहूं की कटाई शुरु हो जाती। ऐसे हालात में भारी बारिश तथा ओलावृष्टि से फसल उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

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