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चीनी सामानों के बहिष्‍कार की मुहिम हुई तेज, सफलता के लिए देश में सस्ते और टिकाऊ माल का उत्पादन है जरूरी

देश में चीनी सामान के बहिष्कार की मुहिम तेज हो गई है। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक सस्ते और टिकाऊ माल का उत्पादन करके ही इस मुहिम में सफलता हासिल की जा सकती है।

चीनी सामानों के बहिष्‍कार की मुहिम हुई तेज, सफलता के लिए देश में सस्ते और टिकाऊ माल का उत्पादन है जरूरी
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नई दिल्ली, चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर हुए खूनी संघर्ष के बाद चीनी सामान के बहिष्कार की मुहिम तेज हो गई है। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक सस्ते और टिकाऊ माल का उत्पादन करके ही इस मुहिम में सफलता हासिल की जा सकती है। घरेलू स्तर पर इस्तेमाल होने वाली जरूरी चीज दवा के निर्माण के लिए 90 फीसद एक्टिव फार्मास्यूटिकल्स इन्‍ग्रेडिएंट्स (API) का आयात चीन से होता है। 70 फीसद मोबाइल फोन के लिए भारत चीन पर निर्भर करता हैं। भारत में स्मार्टफोन बनाने वाली 5 टॉप कंपनियों में 4 चीन की है। देश में स्थापित 61,371 मेगावाट बिजली प्लांट चीन में बने उपकरण पर चल रहे हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशंस (फियो) के अध्यक्ष शरद कुमार सराफ का मानना है कि कि हमे कई सुधार करने होंगे। ईज आफ डूइंग बिजनेस के साथ साथ ईज आफ स्टार्टिंग बिजनेस पर ध्यान देना होगा। वह कहते हैं कि सरकार को यह सोचना होगा कि हमारी उत्पादन लागत चीन के मुकाबले इतनी अधिक क्यों हैं। जबकि चीन के मुकाबले भारत के श्रमिक सस्ते हैं। निर्यातकों के मुताबिक चीन के मुकाबले भारत में होने वाली ट्रांजेक्शन लागत (कर्ज पर लगने वाली ब्याज दर के साथ) 23 फीसद अधिक है। उन्होंने बताया कि पिछले साल तक महाराष्ट्र में जिस कमर्शियल प्रॉपर्टी पर 9 लाख रुपये का टैक्स था, वह बढ़कर 45 लाख रुपये हो गया। लोकल टैक्स चीन में नहीं लगता है। चीन में मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट को अलग-अलग विभिन्न प्रकार के टैक्स नहीं देने पड़ते हैं। जमीन के साथ सभी प्रकार के क्लीयरेंस सीमित समय में मिल जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत मोबाइल फोन निर्माण में चीन से आगे निकलना चाहता है, लेकिन भारत सरकार की तरफ से प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) की घोषणा के बाद भी चीन में निर्माण लागत काफी कम है। इंडियन सेलुलर एंड इलेक्टॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) की हाल की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मोबाइल फोन निर्माण लागत पर निर्माताओं को 5.88-8.7 फीसद के इंसेंटिव है तो चीन में यह इंसेंटिव 19.2-21.7 फीसद तक है। भारत के मोबाइल फोन का सालाना आयात 18.7 अरब डॉलर का है। मार्केट रिसर्च फर्म आईडीसी की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में स्मार्टफोन बनाने वाली पहली पांच कंपनियों में चार शाओमी, वीवो, ओप्पो, रियलमी चीनी कंपनियां हैं। भारत से निर्यात होने वाली वस्तुओं के निर्माण में भी चीनी वस्तुओं की हिस्सेदारी अहम है। चीन से सस्ते दाम पर कच्चे माल मिल जाते हैं। इससे लागत कम रहती है और भारतीय वस्तु अंतरराष्ट्रीय बाजार में मुकाबला कर पाती है। फार्मा एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन दिनेश दुआ के मुताबिक एपीआइ का आयात चीन से रोकने या खत्म करने पर घरेलू दवा महंगी हो जाएगी और दवा का निर्यात प्रभावित हो जाएगा। क्योंकि यूरोप से आने वाले कच्चे माल चीन के मुकाबले महंगे होते हैं। यही वजह है कि चीन से होने वाला आयात लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2015 में चीन से 58.26 अरब डॉलर का आयात किया गया। वर्ष 2016 में यह आयात 59.43 अरब डॉलर का हो गया। वर्ष 2017 में 68.1 अरब डॉलर तो वर्ष 2018 में यह आयात 76.87 अरब डॉलर का हो गया। वर्ष 2019 में जनवरी से नवंबर के बीच यह आयात 68 अरब डॉलर का था।

कंपनियों से लेकर स्टार्टअप्स तक में बढ़ रहा है चीन का निवेश

गेटवे हाउस के अनुमान के मुताबिक वर्ष 2015 से लेकर अब तक भारत की टेक स्टार्टअप्स में चीन ने 4 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। चीन की अलीबाबा कंपनी ने भारत की ई-कामर्स कंपनी स्नैपडील, डिजिटल वैलेट कंपनी पेटीएम तो फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो में निवेश किया है। चीनी कंपनी टेनसेंट ने मैसेजिंग कंपनी हाइक और कैब एग्रीगेटर ओला एप में निवेश किया है। गेटवे के मुताबिक एक अरब डॉलर वाली 30 स्टार्टअप्स कंपनियों में से आधे में किसी न किसी रूप में चीन का निवेश है।

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