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कोरोना संक्रमण के कारण नोटों का प्रयोग नहीं कर रहे लोग, जून में ऑल टाइम हाई पर पहुंचा डिजिटल पेमेंट

कोरोना संक्रमण के कारण नोटों का प्रयोग नहीं कर रहे लोग, जून में ऑल टाइम हाई पर पहुंचा डिजिटल पेमेंट
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नई दिल्ली। चार साल पहले नोटबंदी के समय सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने की बात कही थी। लेकिन लाख प्रयासों के बाद भी सरकार डिजिटल पेमेंट के लक्ष्य हासिल नहीं कर पाई थी। अब कोरोनावायरस संक्रमण का प्रकोप डिजिटल पेमेंट के लिए वरदान साबित हो रहा है। आज ग्रॉसरी, बिजली बिल और कैब फेयर से लेकर सभी प्रकार के भुगतान के लिए डिजिटल पेमेंट का सहारा लिया जा रहा है।

नोटों के इस्तेमाल में झिझक रहे लोग

कोरोना संक्रमण के डर से लोग नोटों का इस्तेमाल करने में झिझक रहे हैं। इसकी जगह पर डिजिटल पेमेंट का सहारा लिया जा रहा है। नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के डाटा के मुताबिक, जून महीने में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई के जरिए डिजिटल पेमेंट अपने उच्च स्तर पर पहुंच गया है। डाटा के मुताबिक, जून में अकेले यूपीआई के जरिए 1.2 ट्रिलियन ट्रांजेक्शन हुए हैं। इसके अलावा बैंकों से इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर में भी तेजी आई है। अप्रैल में आर्थिक गतिविधियां ठप होने के कारण फंड ट्रांसफर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी।

पांच साल में होने वाली प्रगति तीन महीने में हुई

गैट सिंपल टेक्नोलॉजी के सीईओ नित्यानंद शर्मा का कहना है कि जिन लोगों ने कभी भी ऑनलाइन बिल का भुगतान नहीं किया था, आज वो यह काम कर रहे हैं। जिन लोगों को कभी ऑनलाइन ग्रॉसरी की खरीदारी नहीं की थी, आज वे खरीदारी कर रहे हैं। शर्मा के मुताबिक, डिजिटल पेमेंट की दिशा में जो प्रगति आने वाले पांच सालों में होनी थी, वो पिछले तीन महीने में ही हो गई है।

डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दे रही है मोदी सरकार

केंद्र में जब मोदी सरकार बनी थी, तब हर चार में से एक उपभोक्ता नकदी में ट्रांजेक्शन करता था। इस प्रथा को खत्म करने के लिए मोदी सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना शुरू किया था। नवंबर 2016 में पीएम मोदी ने अचानक नोटबंदी कर दी थी। पीएम मोदी ने नोटबंदी को डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया कदम बताया था। शुरुआत में नकदी की किल्लत को देखते हुए डिजिटल पेमेंट में बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन सिस्टम में नकदी बढ़ते ही कैश ट्रांजेक्शन में बढ़ोतरी हो गई। अब कोरोना महामारी के कारण एक बार फिर डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिला है।

अब उपभोक्ता खुद दे रहे डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा

नित्यानंद शर्मा का कहना है कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए उपभोक्ता अब खुद डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा दे रहे हैं। मुंबई के 36 वर्षीय आंत्रप्रोन्योर सचिन राजे हाल ही में डिजिटल पेमेंट से जुड़े हैं। इस समय राजे सब्जी, दूध, फल समेत रोजाना के जरूरत वाली सभी वस्तुएं ऑनलाइन ऐप्स के जरिए खरीद रहे हैं। राजे का कहना है कि नोटों की अदला-बदली से होने वाले वायरस इंफेक्शन के जोखिम को टालने के लिए के लिए उन्होंने डिजिटल पेमेंट का सहारा लिया है।

2021 तक जीडीपी के 15% तक डिजिटल ट्रांजेक्शन का लक्ष्य

पिछले साल रिजर्व बैंक ने कहा था कि उसने 2021 तक डिजिटल पेमेंट को जीडीपी के 15 फीसदी तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। अभी जीडीपी के करीब 10 फीसदी के बराबर डिजिटल ट्रांजेक्शन होते हैं। केंद्र सरकार ने भी डिजिटल ट्रांजेक्शन को रोजाना 1 बिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। बड़ी टेक कंपनियां अमेजन और गूगल भी भारत के डिजिटल पेमेंट बाजार में दांव लगा रही हैं। इन कंपनियों का मुख्य मुकाबला पेटीएम और वाट्सऐप-पे से है। वाट्सऐप-पे अभी देश में टेस्टिंग मोड में है।

प्रति व्यक्ति डिजिटल पेमेंट पांच गुना बढ़ा

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 2015 से अब तक डिजिटल पेमेंट में प्रति व्यक्ति पांच गुना की बढ़ोतरी हो चुकी है। 31 मार्च 2019 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में प्रत्येक व्यक्ति ने सालाना औसतन 22.4 डिजिटल ट्रांजेक्शन किए थे। हालांकि, यह चीन से काफी कम है। चीन में 2017 में प्रति व्यक्ति कैशलेस ट्रांजेक्शन की संख्या 96.7 रही थी।

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