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ग्लेनमार्क फार्मा ने कोरोना की दवा फैबीफ्लू की कीमत 27 प्रतिशत की कम

ग्लेनमार्क फार्मा ने कोरोना की दवा फैबीफ्लू की कीमत 27 प्रतिशत की कम
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मुंबई। ग्लेनमार्क फार्मा ने एंटीवायरल दवा फैबिफ्लू की कीमत 27 प्रतिशत कम कर दी है। यह जानकारी कंपनी ने दी है। पिछले महीने कंपनी ने इस दवा को बाजार में उतारा था। उस समय इसकी एक टैबलेट की कीमत 103 रुपए थी। अब यह 75 रुपए में मिलेगी। कंपनी ने तीसरे चरण का ट्रायल भी किया है।

कई देशों में बिकती है कंपनी की दवा

बता दें कि कोरोना वायरस का प्रकोप पूरी दुनिया में फैलने के बाद सभी देश इसके इलाज के लिए दवाइयों की खोज में जुट गए। जो दवाइयां बाजार में उतारी गईं, उनकी कीमत ज्यादा है। ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स ने कहा कि उसने अपनी एंटीवायरल दवा फेविपिराविर (Favipiravir) की कीमत 27 प्रतिशत कम करके 75 प्रतिशत कर दिया है।

ज्यादा प्रोडक्शन से कीमतों में कमी संभव हुई

स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में कंपनी ने कहा कि उसने अपनी दवा फेबिफ्लू के दाम 27 फीसदी कम कर दिए हैं। अब इसका रिटेल प्राइस 75 रुपए प्रति टैबलेट होगा। कंपनी ने कहा कि ज्यादा फायदे और बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन के कारण दवा की कीमत में कमी संभव हो पाई है। दवा का एक्टिव फार्मास्‍युटिकल इंग्रेडिएंट (एपीआई) और फॉर्मूलेशन तैयार किया जा रहा है। इस सबका फायदा भारत में कोरोना के मरीजों को दिया जा रहा है।

अन्य देशों में दवाओं की कीमतें हैं ज्यादा

कंपनी के वाइस प्रेसीडेंट आलोक मलिक ने कहा कि भारतीय बाजार में फेबीफ्लू (Fabiflu) नाम से सबसे सस्ती दवा उतारी है। जबकि अन्य देशों में Favipiravir नाम से जो दवा बाजार मे उतारी है वो काफी महंगी है। कीमत में कमी से हमें उम्मीद है कि भारत में फेबीफ्लू कोरोना वायरस संक्रमित हर मरीज को आसानी से मिल सकेगी।

1,000 मरीजों पर किया गया अध्ययन

उन्होंने कहा कि कंपनी ने पोस्ट मार्केटिंग सर्विलांस स्टडी के जरिए फेबीफ्लू को कोरोना के मरीजों पर स्टडी किया है। 1000 ऐसे मरीजों को यह दवा दी गई। मलिक ने कहा कि हमारी इस स्टडी से कोविड-19 के इलाज में फैबीफ्लू को बड़े पैमाने पर इस्‍तेमाल करने में डॉक्‍टरों को काफी मदद मिलेगी।

20 जून को रेगुलेटर से मिली थी मंजूरी

ग्‍लेनमार्क ने 20 जून 2020 को बताया था कि उसे भारत के ड्रग रेगुलेटर से फैबीफ्लू की मैन्‍युफैक्‍चरिंग और मार्केटिंग की मंजूरी मिल गई है। इसके बाद उसने कोविड-19 के मॉडरेट पेशेंट्स के इलाज में इस्‍तेमाल होने वाली दवा का भारत में प्रोडक्शन शुरू कर दिया था।

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