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स्टार्टअप्स को मिल सकेगा 50 करोड़ रुपए तक का लोन, आरबीआई ने प्रायोरिटी सेक्टर लैंडिंग का किया विस्तार

स्टार्टअप्स को मिल सकेगा 50 करोड़ रुपए तक का लोन, आरबीआई ने प्रायोरिटी सेक्टर लैंडिंग का किया विस्तार
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नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने प्रायोरिटी सेक्टर लैंडिंग (पीएसएल) के लिए नियमों में विस्तार किया है। इससे स्टार्ट-अप्स और अक्षय ऊर्जा सेक्टर को मदद मिलेगी। नए नियमों के तहत अब स्टार्ट-अप्स को 50 करोड़ तक का लोन मिलेगा। वहीं किसानों के लिए सोलर प्लांट और बायोगैस के लिए भी मिलने वाले कर्ज की सीमा दोगुनी कर दी गई है।

विभिन्न सेक्टर्स को बढ़ावा

लडखड़ाती अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए आरबीआई ग्रामीण क्षेत्र और स्टार्ट-अप्स सहित अन्य क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए कर्ज कर्ज की सीमा में बढ़ोतरी की है। इसमें हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर भी शामिल है। सरकारी योजना आयुष्मान भारत में कर्ज की सीमा को दोगुना कर दिया गया है, जो अब बढ़कर 10 करोड़ हो गया है। इससे टीयर-2 से टीयर-4 शहरों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूती मिलेगी।

लोन की सीमा दोगुनी हुई

अक्षय ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती देने के लिए लोन की सीमा लगभग दोगुनी कर दी गई है, जो अब बढ़कर 30 करोड़ तक हो गया है। वहीं पीएसएल के अंतर्गत सौर-आधारित बिजली जनरेटर, बायोमास-आधारित बिजली जनरेटर, पवन चक्कियों और माइक्रो-हाइडल प्लांट्स को शामिल किया गया है।

इसके अलावा लोन के लिए पब्लिक यूटिलिटी आधारित नॉन-कन्वेंशियल एनर्जी, जैसे स्ट्रीट लाइटिंग सिस्टम और दूर दराज के क्षेत्रों में विद्युतीकरण को भी पीएसएल में शामिल किया जाएगा आरबीआई की नई गाइडलाइंस के मुताबिक प्रत्येक घरों में प्रति व्यक्ति कर्ज की सीमा 10 लाख तक होगी।

लोन की उच्च क्रेडिट सीमा निर्धारित

आरबीआई ने पहले से तय मूल्य पर अपनी उपज का बीमाकृत मार्केटिंग के साथ खेती करने वाले किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) / किसान उत्पादक कंपनियां (एफपीसी) के लिए कर्ज की उच्च क्रेडिट सीमा अब तय कर दी हैं। आरबीआई ने कहा है कि छोटे और सीमांत किसानों के साथ साथ कमजोर वर्गों के लिए निर्धारित लक्ष्यों को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा, जिससे ग्रामीण और लघु उद्योग को मजबूती मिल सके।

जीडीपी में 23.9 फीसदी की गिरावट

हाल ही में देश की जीडीपी का आकड़ा जारी हुआ है, जिसमें 23.9 फीसदी की गिरावट देखी गई है। लेकिन इस तिमाही एकमात्र कृषि सेक्टर में 3.4 फीसदी तेजी रही। ऐसे में सरकार को अनुमान है कि अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए कृषि सेक्टर से मदद मिल सकती है।

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्या कांति घोष ने कहा है कि कृषि के बेहतर प्रदर्शन की पहले से ही उम्मीद थी, क्योंकि लॉकडाउन के दौरान इस सेक्टर पर बहुत कम पाबंदी लगाई गई थी, लेकिन कोरोनावायरस का संक्रमण अब गांवों में तेजी से फैल रहा है। इसलिए दूसरी तिमाही में कृषि सेक्टर का प्रदर्शन खराब रह सकता है।

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