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छत्तीसगढ़ सरकार करेगी तारबाहर के सरकारी स्कूल को बंद, शेख गफ्फार ने 1982 में था खुलवाया

हिंदी के बजाए नए सत्र से अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई होगी, अध्ययनरत बच्चों को दूसरे स्कूलो में किया जाएगा ट्रांसफर

छत्तीसगढ़ सरकार करेगी तारबाहर के सरकारी स्कूल को बंद, शेख गफ्फार ने 1982 में  था खुलवाया
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बिलासपुर. कांग्रेस पार्टी के दिवंगत नेता शेख गफ्फार ने वर्ष 1982 में योगदान देकर तारबाहर में सरकारी स्कूल खुलवाया। इस स्कूल को अब सरकार बंद करने की तैयारी में है। पुलिस बैरक के दो कमरों से शुरू हुए इस स्कूल के बंद होने की खबर के बाद पढ़ने वाले बच्चे, शिक्षक, शाला विकास समिति और मोहल्लेवासी बेहद नाराज हैं। कांग्रेस पार्टी के दिवंगत नेता शेख गफ्फार ने वर्ष 1982 में योगदान देकर तारबाहर में सरकारी स्कूल खुलवाया। इस स्कूल को अब सरकार बंद करने की तैयारी में है। पुलिस बैरक के दो कमरों से शुरू हुए इस स्कूल के बंद होने की खबर के बाद पढ़ने वाले बच्चे, शिक्षक, शाला विकास समिति और मोहल्लेवासी बेहद नाराज हैं।

हिंदी से मत करो छेड़छाड़

यहां हिंदी के बजाए नए सत्र से अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई होगी। अध्ययनरत बच्चों को दूसरे स्कूल में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। बच्चों का कहना है कि यह हमारे साथ अन्याय होगा। सुनो सरकार हमारी पुकार, हिंदी से मत करो छेड़छाड़ के नारे लगने भी शुरू हो गए हैं। स्कूल में कक्षा छठवीं से बारहवीं तक की पढ़ाई होती है। 237 बच्चे अध्ययनरत हैं। शाला में अध्ययन के लिए पर्याप्त बिल्डिंग और टीचिंग फैकेल्टी है। प्रतिदिन दो पाली में सुबह सात से 12 और दोपहर 12 से पांच बजे तक कक्षाएं लगती हैं जिसमें हिंदी माध्यम की पढ़ाई होती है। दिवंगत नेता ने मुस्लिम बाहुल क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए मुस्लिम परिवार की बच्चियों को स्कूल शिक्षा से जोड़ने भरकस प्रयास किया था। मुस्लिम जमात को उर्दू तालीम भी निरंतर दी जा रही है। स्कूल बंद होने से उनकी शिक्षा पर भी असर होगा। फिलहाल शासन ने कोई आदेश जारी नहीं किया है,लेकिन शहर के चुनिंदा प्राचार्यों को स्कूल शिक्षा विभाग ने मौखिक जानकारी जरूर दे दी है।

सिरगिट्टी के बच्चे आएंगे पढ़ने

रेलवे क्रासिंग के उस पार सिरगिट्टी क्षेत्र में एक सरकारी स्कूल है। यहां की दर्ज संख्या 1035 है। नए सत्र से यहां के 400 बच्चों को तारबाहर लाने की तैयारी थी। जिससे की ग्रामीण अंचल की लडकियां भी शिक्षा ग्रहण कर सके। क्षेत्र की बच्चियां तारबाहर आने पिछले साल ही आवेदन दिया था। यही वजह है कि सभी का कहना है कि यहां पढ़ने वाले बच्चे गरीब और निर्धन परिवार से आते हैं। उनके लिए अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई, यूनिफार्म, ट्यूशन का खर्च वहन करना मुश्किल होगा। ऐसे में हिंदी माध्यम को यथावत रखा जाए। राज्य सरकार द्वारा शहर के तीन स्कूलों को हिंदी माध्यम को बंद कर अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई शुरू करने प्रस्ताव है। जिन स्कूलों में कम दर्ज संख्या होगी उन्हीं को इस दायरे में लाने की बात सामने आई है। फिलहाल लिखित में कोई आदेश नहीं आया है। बच्चों व शिक्षकों को जो जानकारी मिली है उसी के आधार पर वे नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।

उषा चंद्रा,प्राचार्य

शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला,तारबाहर

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