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अमेरिका के बाद अब भारत ने कोरोना के मरीजों के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को दी मंजूरी

अमेरिका के बाद अब भारत ने कोरोना के मरीजों के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को दी मंजूरी
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नई दिल्ली . कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा गठित नेशनल टास्‍क फोर्स ने कोविड-19 के हाई रिस्‍क मामलों में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को रिकमेंड किया है। हालांकि, बिना डॉक्‍टर की सलाह के यह दवा लेने के लिए मना किया गया है। इससे पहले अमेरिकी राष्‍ट्रपति ट्रंप ने मलेरिया रोधी इस दवा हाइड्रोक्‍सी क्लोरोक्वीन को कोरोना से निपटने में संभावित गेमचेंजर के तौर पर पेश किया था।

उल्‍लेखनीय है कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। पत्र में मांग की गई थी कि कोरोना के मरीजों के इलाज में इस दवा के इस्तेमाल की मंजूरी दी जाए।

बकौल अग्रवाल यूरोपियन यूनियन के क्लीनिकल ट्रायल में इस दवा के असर का 25 मरीजों पर अध्ययन किया गया है। अध्ययन में पाया गया है हाईड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन मरीजों में वायरस को तेजी से कम करती है। परीक्षण के दौरान यह दवा देने के छठे दिन बाद जब मरीजों की जांच की गई तो पॉजिटिव मामले 25 फीसद रह गए। रिपोर्टों के मुताबिक, यह अध्ययन इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एंटीमाइक्रोबायल एजेंट्स में प्रकाशित हुआ है। डॉक्‍टरों की मानें तो इस मरीज का कोई ज्यादा साइड इफेक्ट भी नहीं है।

अमेरिकी राष्‍ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि इसके प्रारंभिक परीक्षण में बेहद उत्‍साहजनक नतीजे सामने आए हैं। कोरोना जैसे महामारी से निपटने में यह दवा बेहद कारगर साबित हो सकती है। ट्रंप की हरी झंडी के बाद अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज के लिए दवा को अनुमोदित कर दिया है। यही नहीं बताया यह भी जा रहा है कि अमेरिका में इस दवा के शुरुआती नतीजे बेहद उत्साहजनक रहे हैं। मालूम हो कि दुनिया में इस महामारी से मरने वालों की संख्या 14,000 के करीब पहुंच गई है।

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