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लश्कर-ए-तैयबा ने ली सोपोर हमले की जिम्मेदारी, सीआरपीएफ के काफिले पर की थी फायरिंग

पुलिस ने गुरुवार को बयान जारी कर बताया कि हमले के पीछे उस्मान के पाकिस्तानी आतंकवादी हैं।

लश्कर-ए-तैयबा ने ली सोपोर हमले की जिम्मेदारी, सीआरपीएफ के काफिले पर की थी फायरिंग

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के सोपोर में सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व बल) के गश्ती दल पर बुधवार सुबह आतंकियों ने हमला कर दिया था। इस हमले में सेना का एक जवान शहीद हो गया जबकि 3 जवान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। फायरिंग में एक आम नागरिक की भी जान चली गई है। हालांकि इस दौरान मृतक नागरिक के साथ उनके 3 साल के पौते को बचा लिया गया था। पुलिस ने गुरुवार को बयान जारी कर बताया कि हमले के पीछे उस्मान के पाकिस्तानी आतंकवादी हैं। हमले में मारे गए आम नागरिक की पहचान 65 वर्षीय बशीर अहमद खान के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि वो अपने पोते को सुबह-सुबह उत्तरी कश्मीर के श्रीनगर से सोपोर इलाके तक एक लंबी ड्राइव के लिए ले जा रहे थे, जहां वह अपने एक प्रोजेक्ट में एक निर्माण कार्य की प्रगति की देखरेख करने वाले थे। लेकिन हमले में गोली लगने से उनकी मौत हो गई। इस बीच एक 3 साल के बच्चे की तस्वीर सामने आई है, जिसे भारतीय जवान अपनी गोद में लिए हुए है। मिली जानकारी के मुताबिक ये वही बच्चा है जिसके दादा की इस आतंकी हमले में मौत हुई है। बच्चा इतना मासूम है कि उसको कुछ समझ में ही नहीं आया। इस हमले के दौरान बच्चे की जान तो बच गई लेकिन उसके दादा इस दुनिया में नहीं रहे। हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बच्चे से कुछ ही दूरी पर उसके दादा का शव था। लेकिन बच्चा इतना मासूम था कि उसे कुछ समझ नहीं आया। जवानों ने बहादुरी के साथ इस बच्चे की जान बचाई। ये भारतीय सेना के जवानों का ही हौसला है, नहीं तो आज इस आतंकी हमले में इस मासूम को भी नुकसान पहुंचता।जवानों ने अपनी जान पर खेलकर देश के भविष्य को बचाया। जम्मू कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह के मुताबिक, आतंकवादियों ने सोपोर के मॉडल टाउन इलाके में एक नाका पार्टी पर हमला कर दिया। हमले में सीआरपीएफ के कुछ जवान घायल हुए हैं। उन्होंने बताया कि सुबह 7।40 बजे एक सीआरपीएफ नाका पार्टी मॉडल टाउन सॉपर के क्रॉसिंग पर पहुंची थी। जब वे वाहनों से नीचे उतर रहे थे, तभी पास की एक मस्जिद में छिपे आतंकवादियों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। वहीं सीआरपीएफ में एडीजीपी जुल्फकार हसन ने बताया कि आतंकवादियों ने इमारत के ऊपर से गोलीबारी शुरू की थी और जब से वे मस्जिद में छिपे हुए थे। उन्होंने बताया कि मस्जिद की पवित्रता को ध्यान में रखते हुए बहुत संवेदनशील तरीके से सेना ने जवाबी कार्रवाई की। उन्होंने बताया कि मस्जिद अटारी के अंदर खून मौजूद था जो ये बताता है कि जवाबी कार्रवाई में आतंकवादी घायल हो गए हैं। आगे उन्होंने बताया कि हमें मस्जिद से बहुत अधिक मात्रा में हथियार भी मिले हैं।

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